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वैद्यमाओवादी पार्टी स्वयं वैद्यजी के नियन्त्रण से बाहर : पुर्वराजदूत जयन्त प्रसाद

 

jayanta-prasadवैद्य पक्ष को चुनाव मे  आना चहिये था क्यों नही आये यह पता लगाने का समय अब नही रह गया है ।  कुछलोग वैद्य पक्ष व्दारा रखे गये माग के बारे मे  बहुत बात समझने और बुझने का संकेत कर रहें हैं तर लेकिन य कैसा संकेत (सिम्बोलिक-जेस्चर) है अब जान पाना मुस्किल है। दुसरी ओर चुनाव बहिष्कार करने वालों पर विश्वसनियता की समस्या भी बढ्ते जाने की भी स्थिति देखि गयी है । एक अवसर पर मुझे एमाओवादी पार्टी के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल स्वयं बताये थे कि ‘मोहन वैद्यजी नेपाल के ही सबैसे ज्यादा आदरणीय इमानदार नेता हैं।’ लेकिन अपने मे होने वाले ये इमानदारी और सार्वजनिक जीवन मे दिखने वाला व्यवहार मे ‘लिंकेज’ होना जरुरी है । फिर ऐसी इमानदारी का प्रश्न नेपाल मे ही नही, भारत सहित विश्व भर के नेताओं मे  देखि जाने वाली सनातन प्रश्न है । यह विचार पुर्व राजदूत जयन्त प्रसाद ने कान्तिपुर के साथ अपने अन्तर्वाता के दौरान व्यक्त किया है ।

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दुसरीओर मुझे नही लगता है कि वैद्यजी ने हत्या, हिंसा, विध्वंस वाली अपनी छवि को तुरुन्त हटाने का कोइ प्रयास किया है ? इस  अवसर का उन्हे सदुपयोग करना चहिये । सुरु के दिनों मे चुनाव बहिष्कार करने के बाबजुद किसी भी प्रकार का कोइ भी बाधा-व्यवधान और विध्वंस नही करने की प्रतिबद्धता उन्होने जनायी थी । लेकिन अभी की स्थिति देखने से माओवादी (वैद्य) पार्टी स्वयं वैद्यजी के नियन्त्रण से बाहर दिखती है ।

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एक अन्य प्रश्न पर विचार प्रगट करते हुये पुर्व राजदूत जयन्त प्रसाद ने कहा कि राजनीतिक पक्ष की मुद्दा संघ, संघीयता नेपाल के लिये निश्चित रुप से एक नयाँ विषय है । लेकिन आम तौर पर नेपाल मे क्या भ्रम रहा है कि संघीयता देश को विभाजित कर देगी वा देश को विभिन्न टुकडों मे तोड देगी, यह भययुक्त मनोविज्ञान है । भारत मे ऐसी स्थिति कभी नही रही । यहाँ संघ, संघीयता वाली शब्द का कभी भी उच्चारण नही हुआ । संघ शब्द का प्रयोग भारत के संविधान मे भी नही है ‘युनियन अफ स्टेट’ शब्द का प्रयोग जरुर हुआ है । और केन्द्र तथा राज्यों के बीच शक्ति समायोजन के सिद्धान्त का भी अच्छी तरह उपयोग हुआ है । यह कहने का मतलव भारत के इस अनुभव को ही हुबहु अपनाना नही है। अपनाही विशिष्ट रुप का भूगोल, संस्कृति, सभ्यता, जातजाति और समूह मे रहे नेपाल मे नेता व्दारा अपनाने वाला राज्य पद्धति भी विशिष्ट होना चहिये, ‘युनिफाइड’ होना चहिये । – See more at: http://www.ekantipur.com/np/2070/8/2/full-story/379344.html#sthash.zJiqMKsN.dpuf

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