“ऊँ ईग्नोराय नम:” मंत्र परेशानियों से छुटकारा दिलाती है :बिम्मी कालिन्दी शर्मा,
बिम्मी कालिन्दी शर्मा,( व्यंग्य ) बिरगंज ।
हम सभी परिवार की खुशी और स्वास्थ्य के लिए कोई न कोई पाठ या मन्त्र जाप करते ही हैं । कोई शिव का तो कोई काली का तो भगवान विष्णु का मन्त्र जाप कर के जीवन में मूक्ति की कामना करते हैं । पर यह दुनिया भूक्ति, मूक्ति या मोक्ष कुछ होने नहीं देती । बस पैर पकड कर पछाड कर गिराने में ही दुसरों को आनंद आता है । अब ईनसे कितना और कंहा तक बचें ? यह समाज और दुनिया नहीं बदलेगी बस हमें ही हर हाल में बदलना और दुनिया के रस्मोरिवाज के अनुसार ढल जाना है । जो ढल गए उनकी तो पांचो उंगली घी में और सर कडाही में है ही । जो न ढल पाए उनके लिए ऊँ ईग्नोराय नम: मन्त्र का जाप सर्वोत्तम है । ईस मंत्र को गांठ बांध लेनी है और दुनिया के रीति रिवाज और दस्तुरों से मुंह मोड लेनी है यानी कि बेवास्ता करनी है । ईस मंत्र का जाप करने से ज्यादा अपने दैनिक क्रियाकलाप में अमल में ला कर दुनिया की ऐसी की तैसी करनी है ।
दुनिया आपको लाख ताने मारें आपको निचा दिखाने की कोशिश करें आप ऊँ ईग्नोराय मंत्र: का जाप करते हुए ईस करमजली दुनिया को ठेंगा दिखाएं । दुनिया और समाज अपने सुख से खुश नही यह दुसरों के दु:ख से खुश.होती है । ईसी लिए दुसरों को दुखी और परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड्ती । यह दुनिया ताना मारने और दुसरों के घाव पर नमक छिड्कने में माहिर है । अब ईस दुनिया या समाज को तो हम सुधार नहीं सकते ईसी लिए खुद सुधर गए और महामृत्युंजय मंत्र की तरह एक सौ आठ बार ऊँ ईग्नोराय नम: मंत्र का जाप करो और दुनियादारी से खुद को अलग कर लो । जब तक ईनको भाव दोगे तब तक यह आपके सर पर नाचेगें । आपने भाव देना बंद कर दिया और निर्लिप्त और निर्विकार बन गए तब ईनकी घटिया हरकतों से आपको कोई फर्क नहीं पडेगा । यह जितना भी आपके खिलाफ षडयंत्र करेगें आप ईनको ध्यान ही मत दिजिए यह खुद ही थक कर अलग हट जाएगें । क्यों कि प्रकृति का नियम है दुसरों को गिराने के लिए खोदे गए गढ्ढे में पहले स्वयं ही गिरना पडता है ।
बनारस के जिस मकान में मै किराए में रहती हूं उंहा दुसरे किरायादार ने मेरे साथ बहुत ही घटिया हरकत की । मैनें मकान मालिक से शिकायत नहीं की बल्कि ऊँ ईग्नोराय नम: मंत्र का जाप करते हुए उस आदमी को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया । उस आदमी का नाम तो शुसिल था पर ब्यवहार स्वभाव ठीक उल्टा । बस दुसरों के ऐब गिनाना और झगडे लगवाना । उसने मुझे परेशान करने के लिए मेरें चप्पल छूपा दिए, मेरे कमरे के नल में आने वाले पानी को चाबी घूमा कर बंद कर दिए, मेरे बारे में.अंटसंट बोल कर अगल बगल में मेरी बदनामी करवाई । यहां तक कि मेरे द्वारा बाहर फेंका गया आम छिलके को भी पैखाना बता कर मुझे परेशान किया । पर मैनें उससे कोई झगडा ही नहीं की । मुझे मालुम था यह आदमी बेरोजगार होने से फ्रस्टेटेड है और ईसकी नियत ठीक नही हैं । जो खुद असफलता के गढ्ढे में है वह मेरा गढ्ढा क्या खोदेगा ? मैनें ऊँ ईग्नोराय नम: मंत्र का जाप किया और उसको ऐसे नजरअंदाज किया जैसे गली के मरियल कुत्ते की करते हैं । वह अभी भी मुझे कोसता है गंदी बाते करता है मेरे बारे में पर मै उसके लिए ऊँ ईग्नोराय नम: मंत्र का जाप करती हूं और उसे सडे हुए टमाटर के जितना भी भाव नहीं देती ।
तो देखा कितना कमाल का है यह ऊँ.ईग्नोराय नम: का मंत्र । यह अचूक और कारगर मंत्र है । वैसे बहुत से लोगो की आदत होती है की कोई दो परिचित ईंसान आपस में बात कर रहे होते हैं तो मन में यह आशंका हो जाती है कि हो न हो यह मेरी ही बात कर रहे हैं या शिकायत कर रहे हैं । हम सब को अपने आपको भिआईपी मानने या होने का भ्रम है । ईसी लिए तो लगता है कि हर कोई हमारी बुराई करता है, हमारे खिलाफ षडयंत्र कर रहा है । हम खुद को महान मानते हैं ईसी लिए तो दुसरों को हानने में मजा आता है । किसको ईतनी फुर्सत है कि किसी दुसरे के बारे में शिकायत कर के अपना समय खराब करें ?
हम सब को भ्रम है कि दुनिया में एक हम ही अच्छे और लायक हैं और बांकी सब खराब और नालायक हैं । और सब हमारी सफलता और खुशी से जलते हैं और हम को गिराना चाहते हैं यह दुसरा भ्रम है । यदि सच में कोई आपको गिराना चाहता है और परेशान कर रहा है तो ईसका मतलब आप उससे आगे और बेहत्तर स्थिति में है तभी तो वह आपका पिछे से पैर खिंच रहा है । यदि उसमें ईतनी ल्याकत या हिम्मत होता तो आगे से वह आपका गला पकडता । वह बेचारा खुद ही मान रहा है कि वह आपके पिछे है ईसी लिए तो आपका पांव हीला रहा है । आप अंगद बन जाईए और उसको नजरअंदाज करते हुए टस से मस मत होईए तब देखिए थक हार कर वह खुद भाग जाएगा । जो कमजोर और असफल होते हैं उनका काम ही दुसरों को दुलत्ती मारना है । पर जब प्रकृति खुद ही ईन्हे चारलत्ती मारती है तब बेचारे कंही के नहीं रहते । किसी की बुरी बात या षडयंत्र को सहन करना बडी बात नहीं है पर उसको ईग्नोर कर के बाबा जी का ठूल्लू दिखाना बडा काम है । कोई पिछे से जितना भी चिल्लाए हाथी की तरह चलना चाहिए । हाथी कुत्ते कि परवाह नहीं करता । बस अपने रास्ते पर चलता है । हमें भी वही करना है । जो भी हमारे रास्ते पर आए उनको अनदेखा कर के अपनी मंजिल की तरफ हर हाल में बढना है । जिस की औकात ही पैर खिंचने की है उस से हाथ और साथ की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ? ईसी लिए ऊँ ईग्नोराय नम: एक अचूक मंत्र है ईसको हर दिन जपिए और बुरे और घटिया लोगों को किडे मकौडे कि तरह नजरअंदाज करिए । कौन से चिंटी या मक्खी नें आपको कब काटा यह आप याद रखते हैं क्या ? नहीं न तब आप ईन पीठ पिछे बुराई करने वालों को मसहरी समझिए और नजरअंदाज का ‘मसहरी’ टांग कर मजे से सोईए । ऊँ ईग्नोराय नम: 🙏🙏😊

