क्या है साजिश का राज –
०७०, अगहन ४ गते संविधान सभा का चुनाव शान्तिपर्ूण्ा वातावरण में सम्पन्न हुआ। कहीं पर भी धांधली, दंगा फसाद की खबरे नहीं मिली। यह एक ऐतिहासिक चुनाव है -सबों ने कहा। सुबह ७ बजे से शाम को ५ बजे तक मतदान हुआ। फिर क्या हुआ – एमाओवादी और मधेशवादी दलांे का जो आरोप है, वह चौंका देनेवाली बात है। ऐसी भी बात नहीं है कि उनका आर ोप गलत है। जनता की आवाजें और कुछ प्रमाण भी ऐसे मिले हैं कि यह आरोप सही भी लग रहा है। 
मतदान सम्पन्न होने के बाद मतपेटिका निर्वाचन कार्यालय में आनी चाहिए। किन्तु करीब पाँच घण्टा तक वे बक्से कहाँ गायब रहे – यह बात एक यक्ष प्रश्न बन कर खडÞा है। मैटि्रक की जिस तरह से परीक्षा होती है और काँपी जाँच के लिए कहाँ जाता है किसी को मालूम नहीं होता है, वैसा ही इस चुनाव में हुआ। निर्वाचन कार्यालय का कहना था- र ात १२ बजे तक सारे बक्से आ जाने की सम्भावना है और कल सुवह ८ बजे से गिनती चालू हो जाएगी। सवाल यह नहीं उठता है कि मत बक्स कहाँ था, सवाल यह है कि जनता ने जिसे अपना मत दिया आखिर वह मत कहाँ गया – मत बक्स चुनाव स्थल से लाते वक्त सेना ने किसी भी पार्टर्ीीे प्रतिनिधि को गाडी में क्यो नहीं बैठने दिया। जब मतगणना शुरु हर्ुइ तो सबसे पहले मतदान स्थल पर मत बक्स को सीलबन्द करते समय जो मुचुल्का तैयार किया जाता है, वह क्यो नहीं दिखाया गया। बहुत सारे ऐसे भी मतपत्र मिले हैं, जिस में अधिकृत के हस् ताक्षर ही नहीं हैं। दूसरी बात मतपेटिका स् थानान्तरण करते समय पार्टर्ीी्रतिनिधिओं को साथ में क्यों नहीं रखा गया – सील टुटे हुए बक्से को बिना मुचुल्का के गिनती कर ना भी सन्देहास्पद रहा। इस बात का प्रेस कन्प|mेन्स में मधेशी जनअधिकार फोरम लोकतान्त्रिक, फोर म नेपाल, फोरम गणतान्त्रिक, सद् भावना पार्टर्ीीनेपाल सद्भावना पार्टर्ीीर ाष्ट्रिय मधेश समाजवादी पार्टर्ीीसंघीय सद्भावना पार्टर्ीीे आरोप लगाया है। मतगणना को बहिष्कार करते हुए उन्होने यह आरोप भी लगाया है कि हाथी के दाँतो की तरह षड्यन्त्रपर्ूण्ा चुनाव हुआ है। बाहर शान्तिपर्ूण्ा चुनाव हुआ है इसे नकारा नहीं जा सकता है, परन्तु भीतर धांधली ही धांधली चली है। र्सलाही जिले की जो घटना सामने आई है, वह भी आर्श्चर्यजनक है। जंगल में मतपेटिका जली हर्ुइ अवस्था में देखी गई। इससे दो बातें सावित होती हैं। पहली बात चुनाव धांधली हर्ुइ है। दूसरी बात, चुनाव को असफल कराने की साजिश भी हर्ुइ है। सद्भावना पार्टर्ीीे जिला अध्यक्ष संजय सिंह के शब्दो में कहा जाए तो यह परिचालित ‘पावर हाउस के ग्राण्ड डिजाइन के तहत चुनाव हुआ है। जिसका एक ही मतलव था- परिवर्तनकारियों को किसी भी हालत में हराना है। नेपाल की राजनीति को अस्थिर करने की साजिस है यह। मधेश के मुद्दों को दवाने के लिए यह ग्राण्डडिजाइन र ची गई है -उन्होने कहा। मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल के धनुषा अध्यक्ष शेषनारायण यादव ने कहा कि चुनाव में साजिस और धांधली हर्ुइ है। परिवर्तन विरोधी देशी वा विदेशी शक्ति के तहत यह घिनौनी चाल चाली गई है। र ाजनीतिक रूप से गुलाम बना कर रखने वाली सोच के व्यक्तियों ने परिवर्तनकार ी शक्ति को हराने के लिए यह साजिस र ची है। उन्होने यह भी कहा कि जब तक चुनाव में धांधली के उच्चस्तरीय छानबीन कर सत्यतथ्य बाहर नहीं आयेगा, तब तक मधेशवादी दल संविधान सभा के किसी भी प्रक्रिया मे सहभागी नहीं होंगे। उसी प्रकार मधेशी जनअधिकार फोर म लोकतान्त्रिक के धनुषा अध्यक्ष उमाशंकर अरगडिया ने कहा कि खसवादी शासकों ने मधेशवादी शक्ति को कमजोर करने के लिए यह षड्यन्त्र किया है। अगर इसकी सही छानबीन नहीं हर्ुइ तो फिर से मधेश में आन्दोलन होगा। तमलोपा धनुषा सहसंयोजक परमेश्वर साह ने कहा- विगत के चुनाव से कुछ दल डर गये थे। उन्हे पता था कि मधेश में हमारी नहीं चलेगी इसलिए साजिस के तहत यह चाल चली गई है। चुनाव शान्तिपर्ूण्ा वातावरण में हुआ है, इस में कोई दो मत नहीं है। परन्तु भीत

