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छोटी सी क्रिया से बीमारियों में होता है बडा लाभ

 

सुबह-सुबह थोडा सा व्यायाम या योगासान करने से हमारा पूरा दिन स्फर्र्ति और ताजगी भरा बना रहता है । यदि आपको दिनभर अत्यधिक मानसिक तनाव झेलना पडÞता है तो यह क्रिया करें, दिनभर चुस्त रहेंगे । इस क्रिया को करने वाले व्यक्ति से फेफडे और साँस से सम्बंधित बीमारियाँ सदैव दूर रहेंगी ।
क्रिया की विधिः समतल और हवादार स्थान पर किसी भी आसन जैसे पद्मासन या सुखासन में बैठकर इस क्रिया को किया जाता है । दोनों हाथ को दोनों घुटनों पर रखें । अब नाक के दोनों छ्रि्र से तेजी से गहरी सांस लें । फिर सांस को बिना रोके, बाहर छोडÞ दें । इस तरह कई बार तेज गति से सांस लें और फिर उसी तेज गति से सांस छोडते हुए इस क्रिया को करें । इस क्रिया में पहले कम और बाद में धीरे-धीरे संख्या को बढाएँ ।
इस क्रिया से लाभः इस क्रिया के अभ्यास से फेफडे में स्वच्छ वायु भरने से फेफडÞे स्वास्थ्य और रोग दूर होते हैं । यह आमाशय तथा पाचक अंग को स्वास्थ्य रखता है । इससे पाचन शक्ति और वायु में वृद्धि होती है तथा शरीर में शक्ति और स्फर्र्ति आती है । इस क्रिया से सांस संबंधी कई बीमारियाँ दूर ही रहती हैं ।
सावधानी  किसी व्यक्ति को दमा या सांस सम्बंधी कोई बीमारी हो तो वह अपने डाँक्टर से परामर्श कर ही इस क्रिया को करें ।
रंग-रुप भी निखरता है प्राणायाम से
प्राणायाम ऐसी क्रिया है जिसके नियमित अभ्यास से बडी-बडी बीमारियाँ साधक से दूर रहती है । साथ ही व्यक्ति का रंग-रुप भी निखर जाता है । शीतली प्राणायाम के संबंध में ऐसा माना जाता है कि इसका नियमिति अभ्यास करने वाले व्यक्ति को कभी जहर नहीं चढÞता ।
शीतली प्राणायाम की विधिः शीतली प्राणायाम और सीत्कारी प्राणायाम लगभग एक जैसे ही हैं । अंतर केवल इतना है कि सीत्कारी प्राणायाम में जीभ गोलकर तालु से लगा ली जाती है और शीतली में जीभ को गोलकार बना लेते है और सीत्कार करते हुए मुँह द्वारा वायु को पेट में भर लेते हैं । इस प्रणायाम को खडÞे होकर, चलते हुए अथवा बैठकर भी कर सकते हैं । इसमें मूँह को गोल करके जीभ को भी गोल कर लिया जाता है और होंठ को बाहर निकालकर सांस लेते हैं । जितना संभव हो उतना समय सांस रोककर फिर सांस को बाहर निकाल दिया जाता है ।
शीतली प्राणायाम के लाभ ः    इस प्रणायाम से पित्त, कफ, अपच जैसी बीमारियाँ बहुत जल्द समाप्त हो जाती है । योग शास्त्र के अनुसार लंबे समय तक इस प्रणायाम के नियमित अभ्यास से व्यक्ति पर जहर का भी असर नहीं होता ।

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