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स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय राजदूतावास, काठमांडू द्वारा हरितालिका-तीज उत्सव मनाया गया

 

काठमांडू, नेपाल, 31 अगस्त। भारत तथा नेपाल दोनो देशों की सांस्कृतिक परंपरा में समानता स्वाभाविक रूप से दिखाई जाती है। हरितालिका-तीज ये महिलाओं का उत्सव इसी समान परंपरा की एक कडी है।
नारदजी की भविष्यवाणी को सुनकर महान योगी शिवशंकर जी के प्रति कोमल भावनाएं हिमालय पुत्री पार्वती के मन में उमड आई। किन्तु पार्वती जानती थी की प्रेम की देवता मदन को जलाकर भस्म करनें वाले इस महान योगी को विवाह बंधन में बांधना अत्यंत कठीन है। इस योगी को केवल बाह्य सौंदर्य से जितना दुष्प्राप है अतः उनसे भी श्रेष्ठ योगी बनकर ही उन्हे जितना संभव है इस विचार से सुकोमलांगी राजकुमारी पार्वती ने अत्यंत कठोर तप किया। पार्वती के गुण और कठोर तप देखकर शिवजी भी प्रसन्न हुए और पार्वती के साथ स्वयं को विवाह बंधन में बांधने के लिए तैयार हुए। प्रेम का उच्चतम आदर्श लोगों के सामने आ गया।
इसी कथा के संस्मरण में मनाया जाने वाला उत्सव है हरितालिका-तीज!
स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय राजदूतावास, काठमांडू नेपाल में भी हरितालिका-तीज उत्सव को बड़े धुमधाम से कल मनाया गया। शिवजी की पूजा के उपरांत भारत में खेले जाने वाले फुगडी, पिंगा, दिंड्या जैसे स्त्रीयों के विशेष खेल खेलकर तीज का उत्सव मनाया गया।

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