कहाँ हैं राजनीति में महिलाएं …? : कंचना झा
काठमांडू, १० अक्टूबर –राजनीति और महिला शायद बहुत समय लगेगा इन्हें एक होने में । जनसंख्या और मतदाता दोनों की बात करें तो महिलाओं की ही संख्या ज्यादा है लेकिन जब बात आती है राजनीति की तो वही पुरानी बात की महिलाएं कहीं नहीं है । रविवार को उम्मीदवारी दर्ता थी जिसमें महिलाएं मात्र ९ प्रतिशत थी । प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा निर्वाचन के लिए बहुत ही कम महिलाओं ने उम्मीदवारी दी है ।
निर्वाचन आयोग के विवरण अनुसार प्रतिनिधि सभा की ओर से देशभर में २ हजार १२८ लोगों ने उम्मीदवारी दी है जिसमें से महिलाएं हैं १९२ । यानी पुरुषों की संख्या हुई १ हजार ९३६ । कुल उम्मीदवारी का ८.९७ प्रतिशत हुई ।
अब प्रदेश सभा तो २ हजार ८४५ उम्मीदवारी डाली गई है जिसमें २ हजार ८४५ पुरुष हैं तो २४४ महिलाएं । एक तरह से कहें तो उम्मीदवारी ही बहुत कम पड़ी है इसबार ।
यदि नेपाल के जनसंख्या की बात आती है तो पिछले जनसंख्या के अनुसार हरेक १०० लोग में ५१ महिला आती हैं और पुरुष ४९ । लेकिन जब देश की राजनीति की बात आती है तो नीति निर्माण की बात आती है तो उस तह में पहुँचने के लिए उनकी उम्मीदवारी पाँच गुणा कम है ।
नेपाली कांग्रेस ने ८६ उम्मीदवार उठाया है जिसमें केवल पाँच जगह में महिलाओं को आगे किया है – तेहृथुम में सीता गुरुङ, मोरङ–२ में सुजाता कोइराला, सिरहा–२ से चित्रलेखा यादव,मकवानपुर –१ से महालक्ष्मी उपाध्यायडिना, अर्घाखाँची से पुष्पा भूसाल उम्मीदवार हैं ।
एमाले ने स्याङजा–२ से पदमा अर्याल, दाङ–३ से कोमल ओली को उम्मीदवार बनाया है । काठमांडूं–५ में स्वतन्त्र उम्मीदवार रञ्जु दर्शना उम्मीदवार हैं । सुनसरी–३ से भगवती चौधरी, बारा–३ से ज्वाला साह, उदयपुर–१ से मञ्जु चौधरी, धनुषा–३ से जुलीकुमारी महतो, कास्की–२ से विद्या भट्टराई, बाग्लुङ–२ से मञ्जु शर्मा चालिसे, दाङ–१ से शान्ता चौधरी, डोटीबाट गौरी ओली और कञ्चनपुर–३ से निरु पाल उम्मीदवार हैं । एक बात तो है कि एमाले ने बहुत से निर्वाचन क्षेत्र में अहिलाओं को आगे किया है ।
माओवादी केन्द्र ने काठमांडू उपत्यका के भीतर जिला में तुलनात्मक रुप में महिलाओं को आगे किया है । माओवादी केन्द्र ने काठमांडू–२ से ओनसरी घर्ती, काठमांडूं–७ से मानुषी यमी भट्टराई, काठमांडू –९ से कल्पना धमला और ललितपुर–३ से पम्फा भुसाल को उम्मीदवार बनाया है । दाङ–२ से रेखा शर्मा, काठमांडू –१० में अञ्जना विशंखे, कञ्चनपुर–१२ में बीना मगर उम्मीदवार हैं ।
निर्वाचन क्षेत्रगत रुप में देखें तो काठमांडू और तराई के कुछ जिलों में महिला उम्मीदवारों की संख्या कुछ बढ़ती दिखाई देती है । काठमांडूं–१ में १० महिला उम्मीदवार हैं । झापा–५, धनुषा–३, दाङ–१, रुपन्देही–३ और मोरङ–३ में ४÷५ महिला उम्मीदवार हैं । दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में मुश्किल से १÷२ के अनुपात में उम्मीदवारी दी गई है । करिब ६० से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में किसी भी महिला की उम्मीदवारी नहीं पड़ी है ।
प्रदेश की ओर से भी महिला उम्मीदवारों का अनुपात वैसा ही है । १६२ जगहों में महिलाओं की उम्मेदवारी पड़ी ही नहीं है । सबसे ज्यादा उम्मीदवारी काठमांडूं–१ (ख)में दिखाई दिया है । यहाँ कुल १० उम्मीदवारों में ५ महिला हैं । चितवन–२ (ख)में भी यही अवस्था है । कास्की–२ (ख)में ३ पुरुष उम्मीदवारों के साथ ४ महिला उम्मीदवार हैं ।
स्थानीय तह निर्वाचन में इक बाध्यता थी कि उसके ऐन में ही यह व्यवस्था थी कि अनिवार्य रुप से महिलाओं की संख्या होनी ही चाहिए । राजनीतिक दलों को प्रमुख÷उपप्रमुख या अध्यक्ष÷उपाध्यक्ष पद में एक महिला अनिवार्य रुप में उम्मीदवार बनाना होगा तो बनाया गया । अगर ऐसा नहीं होता तो जो महिलाएं अभी दिख रही हैं राजनीति में वो भी नहीं दिखतीं । आगे महलिाओं की भूमिका क्या होगी ये तो समय ही बताएगा ।


