क्या प्रभु साह के लिए एमाले का दरवाजा बंद हो गया है ?

काठमांडू, ११ अक्टूबर – राजनीति में कब किसका पलड़ा भारी हो जाए नहीं कहा जा सकता है । साथ ही ये भी नहीं कहा जा सकता है कि आज जो नेता एक पार्टी में है वो कल दूसरे में नहीं जा सकता है । ये होता आया है और आगे भी होता ही रहेगा । लेकिन ऐसे में कभी कभी सभी के लिए मुश्किलें बढ़ कर सजती है । । कुछ ऐसी ही अवस्था है नेकपा एमाले स्थायी कमिटी सदस्य तथा पूर्व मंत्री प्रभु साह का जिनके लिए पार्टी में वापस लोटने के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं । यह संकेत पार्टी अध्यक्ष ओली ने द है ।
प्रभु साह ने मधेश में सहानुभूति जरूर बटोरा है लेकिन अब वे पार्टी में लौटेंगे या नहीं यह अनिश्चित बना हुआ है ।चुनाव के मनोनयन क्रम में उन्हें एमाले से रौतहट ३ का लिए टिकट मिल गया था । रविवार की शाम ५ बजे तक भी अपने मनोनयन क्रम में उन्होंने अध्यक्ष केपी ओली को जानकारी दी थी । और अन्तिम समय में आकर उन्होंने स्वतन्त्र की हैसियत में अपनी उम्मेदवारी दर्ता कर दी जिससे एमाले नेतृत्व नाराज है ।
अध्यक्ष ओली ने इसे ‘संदिग्ध गतिविधि’ कहा है । दल की उम्मेदवारी को छोड़कर स्वतन्त्र उम्मीदवारी देने के पार्टी की सदस्यता से स्वतः ही प्रश्न उठने की बात को बताया है । पिछले कुछ दिनों से उनकी गतिविधियां संदिग्ध दिखाई दे रही थी । मेरे साथियों ने मुझसे कहा भी था लेकिन मैंने विश्वास नहीं किया था । ओली अपनी प्रतिक्रिया एक टिभी में दे रहें थे । आगे उन्होंने कहा कि – यदि उन्हें स्वतन्त्र रहना है तो दल से बाहर रहें ।
ओली के इस जबाब से स्पष्ट हो गया है कि एमाले का दरवाजा उनके लिए बंद हो चुका है । खास बात यह है कि उन्होंने अपने साथ ही मधेश के आठों जिलों में अपने ही कार्यकर्ताओं के लिए स्वतंत्र टिकट में देने में लगे थे ।
साह ने रौतहट ३ से उम्मीदवारी दी साथ ही किरण साह रौतहट २ , प्रदीप साह रौतहट ४ , राम आधार कापड महोत्तरी ३ , मानबहादुर खडका सर्लाही १ , किसोरी साह धनुषा १ , कृष्ण कुमार महतो, धनुषा ४ से , संतोष श्रेष्ठ पर्सा १ से अपनी अपनी उम्मीदवारी दिया है । प्रदेश सभा की ओर से १७ उम्मीदवारी दी गई है और ये सभी साह पक्ष के हैं ।
अब एमाले का यह आरोप है कि प्रभु साह रौतहट सहित मधेश को एमाले विहिन बनाना चाहते हैं ।

