भारतीय मूल के सुनक शासन करेंगे ब्रिटेन पर, नेपाल के लिए बहुत बड़ा सबक
कंचना झा, काठमांडू, २५ अक्टूबर – एक इतिहास रचने जा रहें ऋषि सुनक । भारतीयों के लिए यह बहुत बड़ी खबर है कि जिस बिट्रेन ने भारत पर दो सौ साल शासन किया उस भारतीय मूल के व्यक्ति ऋषि सुनक बनने जा रहें हैं बिट्रेन के प्रधानमंत्री । वैसे वो कितने सफल होंगे ये तो बाद की बात है । लेकिन उनके प्रधानमंत्री बनने की खबर अभी चर्चा हर ओर है ।
विट्रेन – एक ऐसा देश जिसने कभी विश्व पर राज किया, उसकी सोच को देंखें उसने विश्व के हर नागरिक को समानता के साथ स्वीकार किया है । अगर अपने देश नेपाल की बात करें तो यहाँ तो बस खोखली राष्ट्रीयता में ही हम चलें जाते हैंं । खोखली राष्ट्रीयता की बात सिर्फ इसलिए कही जा रही है क्योंकि कि यहाँ की राजनीति में जाति , भाषा, धर्म, पहरिन को लेकर राजनीति की जाती है । वरिष्ठ व्यक्ति, ही राजनीति कर सकते हैं । युवाओं का कोई दखल ही नहीं है राजनीति में बाहर के व्यक्तियों का आना तो असंभव ही है यहाँ । उसका भी कारण है यहाँ के नेता सिर्फ और सिर्फ अपना ही देखते हैं । हम कब तक पद पर रहें ? जब तक है जान तबतक पद पर रहेंगे बने । जनता का क्या है वो तो पहले भी मरी थी अब भी मरेगी । जब तक नेपाल की राजनीति से ये परिवारवाद, नातावाद, कृपावाद नहीं हटेगी तब तक देश का विकास संभव नहीं है । नेपाल की जनता के लिए भी यह बहुत बड़ा सबक है । एक नागरिकता के नाम पर जितना बड़ा भेदभाव दखाया गया है उसके लिए यह बहुत बड़ा उदाहरण है कि उदार कैसे बना जा सकता है।
अब फिर एकबार आए बिट्रेन पर । जिसकी सोच ही ऐसी है कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किस मूल के, किस जाति के, किस धर्म के व्यक्ति बिट्रेन की राजनीति में सक्रिय है उसे मतलब है तो केवल इतना कि उसके देश का विकास हो, बिट्रेन समृद्ध बने ये उसकी पहली प्राथमिकता में आती है । वो इस नातावाद, कृपावाद, पावर कुछ नहीं देखता तभी तो पहले भी उसने शासन किया है विश्व पर आज भी वो बिट्रेन है बिट्रेन ।
वैसे सुनक के लिए बहुत बड़ी चुनौती भी है ये पद आसान नहीं होने वाला है सुनक के लिए ये पद क्योंकि बिट्रेन की अर्थतंत्र को लेकर बहुत चर्चा है । बिट्रेन की मौजूदा अर्थ व्यवस्था बहुत कमजोर हो गई है सो सुनक पर बहुत ज्यादा दबाब है । इसी अर्थतंत्र को सुधार करने के लिए जो पोलिसी लेकर लिज ट्रस आई थी उसका बहुत ही ज्यादा विरोध हुआ था । अब देखना है कि सुनक की क्या योजनाएं हैं बिट्रेन के अर्थतंत्र को सुधारने के लिए ।
दूसरी यह कि जिस कंजर्वेटीव पार्टी से सुनक यह संबंध रखते हैं । इसका बहुमत रहा है । लेकिन अपनी ही पार्टी में बहुत ज्यादा अस्थिरता है अभी । सुनक कैसे अपने पार्टी में सुधार कर सकेंगे ? कैसे सभी को मिला कर चल सकेंगे ? ये तो भविष्य ही बताएगा । ।
अगर तुलना करें नेपाल और बिट्रेन की तो समझ में आएगा कि क्यों बिट्रेन की जनता ने एक भारतीय मूल को भी अपना प्रधानमंत्री चुन रही है । नेपाल अपनी खोखली राष्ट्रीयता से जब तक बाहर नहीं आएगा तब तक आगे बढ़ना संभव नहीं है ।
बहु भाषी, बहु जाति, और बहु धर्म राष्ट्रगान में शामिल करने से देश में शांति,संवृद्धि और विकास नहीं हो सकता है । इसके लिए एक अलग सोच का आना जरुरी है । देश के विकास के लिए मन बड़ा चाहिए । मृत्यु शैया पर जो हैं वो पद का त्याग करें और युवाओं को आगे आने दें ।





