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अंधेरे दौर में रोशनी के पर्याय कवि मुक्तिबोध का पावन स्मरण

 

जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । संकल्पधर्मा चेतना के रक्तप्लावित स्वर, अंधेरे में रोशनी के पर्याय मशहूर मार्क्सवादी कवि गजानन माधव मुक्तिबोध का जयंती समारोह कॉ. महेश्वर स्मृति सभागार में जन संस्कृति मंच दरभंगा के तत्वावधान में रविवार कोजिलाध्यक्ष डॉ. रामबाबू आर्य की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

“मुक्तिबोध: स्वप्न और रचना संसार” विषय पर बोलते हुए जसम राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ.सुरेंद्र सुमन ने कहा कि मुक्तिबोध क्रांति की बड़ी संभावना के कवि हैं। वो मुक्ति की कविता लिखते हैं। अंधेरे से लड़कर उजाले की तलाश है उनकी रचनाएँ।

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शोषण-दमन-उत्पीड़न के तमाम रूपों से मुक्ति ही मुक्तिबोध का स्वप्न था। अगर उनके स्वप्नों को साकार करना है तो आज का जो फ़ासीवाद है उसके खिलाफ़ सिर से कफ़न बाँध कर निकलना होगा।

मौके पर डॉ. सजंय कुमार ने मुक्तिबोध के रचना संसार पर प्रकाश डालते हुए उनकी कहानियों के जरिये समाज के मूल्य प्रणाली को सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनका रचना संसार बहुत व्यापक है। उनकी रचनाओं की अमरजीविता है कि आज आधी सदी के बाद वे और मौजूँ हैं।

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अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रामबाबू आर्य ने मुक्तिबोध को याद करते हुए उन्हें मानव मुक्ति का महान उद्घोषक बताया।

आगे उन्होंने कहा कि प्रतिरोध की संस्कृति के जाज्वल्यमान नक्षत्र, सबसे प्रभावकारी कवि मुक्तिबोध ने अपने लेखन से साहित्य में नई-नई सम्भावनाओं के द्वार खोले। प्रगतिवाद से लेकर प्रयोगवाद, नई कविता तक विस्तृत अपने रचना संसार में उन्होंने बराबरी का समाज स्थापित करने का स्वप्न देखा। इस स्वप्न को पूरा करने वाले तमाम जनांदोलनों की आहट को उन्होंने बख़ूबी दर्ज किया।

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साहित्यिक हलके में उत्सव सरीखे मुक्तिबोध जयंती समारोह में समाज के ख्यातिलब्ध बुद्धिजीवी डॉ. चंद्रमोहन पांडेय, भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित कवि मनोज कु.झा, डॉ. सूरज पासवान, देवेंद्र प्रसाद, एस.एस.ठाकुर आदि ने भी अपने-अपने अंदाज में मुक्तिबोध को याद किया।

इस अवसर पर साहित्य के शोधार्थी मंजू सोरेन, दुर्गानंद कुमार तथा राजीव कुमार सहित कतिपय छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का संचालन जसम जिला सचिव समीर ने किया।

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