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२०४६ के बाद से अब तक आम निर्वाचन में राज्यकोष से ६३ अरब २० करोड़ खर्च

 

अनौपचारिक खर्च का कोई हिसाब नहीं

प्रथम जनआन्दोलन २०४६ के बाद से अब तक आम निर्वाचन में राज्य कोष से ६३ अरब २० करोड़ रुपया बराबर बजेट खर्च किया गया है । जनआन्दोल के बाद पहले निर्वाचन २०४८ में कुल ८० करोड़ रुपया बराबर बजट खर्च किया गया था । किन्तु, तथ्यांक के अनुसार २०६२÷६३ के दूसरे आन्दोलन के बाद हुए पहले संविधानसभा और उसके बाद के निर्वाचन में अचानक खर्च बढ़ा है ।
अर्थ मन्त्रालय के अनुसार सिर्फ आसन्न प्रतिनिधिसभा तथा प्रदेशसभा निर्वाचन के लिए सरकार ने कुल २० अरब ४ करोड़ ८३ लाख रुपया बजट बिनियोजन किया है । यह खर्च समेत जोड़ने पर २०४८ से २०७९ तक के ७ आम निर्वाचन में कुल ६३ अरब २० करोड़ ७१ लाख रुपया खर्च हो रहा है । इसमें स्थानीय तह के निर्वाचन का कोई भी खर्च नहीं जोड़ा गया है । यदि स्थानीय निर्वाचन का खर्च भी जोड़ दिया जाए तो अनुमानतः यह खर्च डेढ खरब तक पहुँच सकता है ।
आम निर्वाचन २०४८
आम निर्वाचन, २०४८ पहले जनआन्दोलन २०४६ के बल पर बहुदलीय प्रजातन्त्र पुनस्र्थापना होने के बाद पहला निर्वाचन हुआ था । नेपाल अधिराज्य के संविधान २०४७ के अनुसार २०४८ वैशाख २९ गते हुए निर्वाचन में ११० सीटसहित नेपाली कांग्रेस ने बहुमत प्राप्त किया था । इसी तरह ६९ सीटसहित नेकपा एमाले दूसरे और ९ सीट सहित बाबुराम भट्टराई नेतृत्व का तत्कालीन संयुक्त जनमोर्चा नेपाल तीसरा दल बना था । । प्रतिनिधिसभा के लिए कुल २०५ सीट के निर्वाचन में तत्कालीन समय में लगभग ८० करोड़ रुपया खर्च होने की जानकारी निर्वाचन आयोग ने दी है ।
आम निर्वाचन, २०५१
२०४८ के निर्वाचन के बाद सत्ता में आए नेपाली काँग्रेस नेतृत्व की बहुमत की सरकार गिरने के साथ ही २०५१, कात्र्तिक २९ गते राजा वीरेन्द्र के आह्वान में पुनः प्रतिनिधिसभा का निर्वाचन हुआ था । २०५ सीट के लिए हुए उस निर्वाचन में नेकपा एमाले ने नेपाली काँग्रेस को पछाड़ते हुए ८८ सीट जीता था । पर, काँग्रेस ८३ सीट में ही सिमट गई थी । तथापि, कोई भी दल इस निर्वाचन में बहुमत प्राप्त नहीं कर पाई थी । बहुमत प्राप्त करने के लिए किसी भी दल को कम से कम १०३ सीट जीतना आवश्यक था । अल्पमत के इस निर्वाचन को सम्पन्न करने में १ अरब १५ करोड़ रुपया खर्च होने की जानकारी निर्वाचन आयोग देता है ।
आम निर्वाचन, २०५६
पहले जनआन्दोलन के बाद हुए तीसरे आम निर्वाचन, २०५६ में पुनः नेपाली काँग्रेस बहुमत लेकर आई थी । कुल २०५ सीट के लिए हुए निर्वाचन में नेपाली काँग्रेस ने अकेले १११ सीट पर कब्जा किया था और नेकपा एमाले ७१ सीट ही हासिल कर पाई थी । उक्त निर्वाचन में राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी ११ सीट सहित तीसरे स्थान पर थी । इस निर्वाचन में २ अरब ७५ करोड़ रुपया खर्च हुआ था ।
संविधान सभा का पहला निर्वाचन २०६४
१० वर्ष के जनयुद्ध और शान्ति सम्झौता के बाद २०६२÷६३ के दूसरे जनआन्दोलन के बाद २०६४ चैत २८ गते पहला संविधान सभा का निर्वाचन सम्पन्न हुआ था । समानुपातिक, मनोनित और ३३५ प्रत्यक्षसहित कुल ६०१ सीट के लिए हुए निर्वाचन में शान्ति प्रक्रिया में आए नेकपा माओवादी अकेले २२९ सीट लेकर आई थी । नेपाली काँग्रेस ११५, नेकपा एमाले १०८ और मधेस केन्द्रीत पार्टी को ७५ सीट मिली थी । तथापि, संविधान निर्माण के लिए हुआ यह निर्वाचन संविधान नहीं दे पाया । अन्ततः २०६९ जेठ १४ गते संविधान सभा का पहला संसद विघटन हो गया । पहला संविधान सभा निर्वाचन के लिए करीब १५ अरब रुपया बराबर का खर्च होने के बाद भी सरकारी हिसाब से ७ अरब ५० करोड़ रुपया खर्च होने का तथ्याङ्क है ।
संविधान सभा का निर्वाचन, २०७० (दूसरा)
पहला संविधान सभा द्वारा देश को संविधान नहीं मिलने के बाद दूसरी बार २०७० मंसिर ४ गते निर्वाचन हुआ । जिस निर्वाचन में नेपाली काँग्रेस पहली पार्टी बनी और २०६ सीट पर अपना कब्जा जमाया वहीं, नेकपा माओवादी को सिर्फ ८३ सीट पर संतोष हासिल करना पड़ा । १८४ सीट के साथ नेकपा एमाले दूसरे नम्बर की पार्टी बनी । जिसने काफी जद्दोजहद के बाद २०७२ असोज ३ गते नेपाल का संविधान, २०७२ जारी कियाउस समय सरकार का नेतृत्व नेपाली काँग्रेस के नेता सुशील कोइराला कर रहे थे । संविधान निर्माण के इस दूसरे निर्वाचन के लिए ११ अरब १० करोड़ रुपया खर्च होने की जानकारी मन्त्रालय ने दी है ।
प्रतिनिधि सभा तथा प्रदेश सभा निर्वाचन, २०७४
संविधान बनने के बाद देश संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्रात्मक प्रणाली में गया । उसके अनुसार प्रतिनिधि सभा तथा प्रदेश सभा के लिए २०७४ मसिंर १० गते और मसिंर २१ गते दो चरण में निर्वाचन सम्पन्न किया था । २६५ सीट(प्रत्यक्ष) के लिए हुए निर्वाचन में नेकपा एमाले ८० सीट हासिल कर पहली पार्टी बनी । नेकपा माओवादी ३६ सीट के साथ दूसरी पार्टी बनी । और नेकपा नेपाली २३ सीट सहित तीसरी पार्टी बनी । समानुपाति के मत से काँग्रेस दूसरी पार्टी बनी । सरकार के अनुसार इस निर्वाचन में कुल १९ अरब ८५ करोड़ ८८ लाख रुपया खर्च हुआ था ।
निर्वाचन आयोग ने १० अरब रुपया, म्यादी प्रहरी ५ अरब रुपया, नेपाल प्रहरी के लिए २ अरब ६९ करोड़ २४ लाख रुपया, सशस्त्र प्रहरी १ अरब १६ करोड़ ३७ लाख रुपया और नेपाली सेना ८४ करोड़ ७५ लाख रुपया निर्वाचन में खर्च होने की बात मन्त्रालय ने कही है ।
प्रतिनिधि सभा तथा प्रदेश सभा निर्वाचन, २०७९
प्रतिनिधि सभा तथा प्रदेश सभा के ५ वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद पुनः निर्वाचन होने जा रहा है । आसन्न प्रतिनिधि सभा तथा प्रदेश सभा निर्वाचन, २०७९ इसी मंसिर ४ गते होने जा रहा है । कुल १६५ (प्रत्यक्ष) प्रतिनिधि सभा और ३३० प्रदेश सभा के लिए होने जा रहे इस निर्वाचन में लगभग २० अरब खर्च होने का अनुमान किया गया है ।
आम निर्वाचन में राज्यकोष से ६३ अरब २० करोड़ रुपया से अधिक खर्च होने का अनुमान है । अनौपचारिक रूप में किए जाने वाले खर्च का कोई हिसाब ही नहीं है । अध्ययन के अनुसार एक निर्वाचन में प्रति उम्मीदवार एक करोड़ रुपया खर्च होता है । किन्तु इसका कोई तथ्याङ्क उपलब्ध नहीं है ।

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