मधेश की पहचान है धोती, बालेन न मधेशी है न धोती : कंचना झा
कंचना झा, काठमांडू, १५ मंसिर । मैं कट्टर पंथी नहीं हूँ, मैं जाति पाति पर बहुत ज्यादा बहस करना पसंद नहीं करती हूँ लेकिन ये सच है कि अपनी भाषा, अपनी बोली, पहिरन, खानपान पर हमेशा गर्व करती रही हूँ । मैं मधेशी हूँ, मेरे पूर्वजों ने धोती पहना है, आज के लोग भी पहन रहे हैं और आने वाली पीढ़ी भी धोती को पहनेंगे । हमें जरा भी शर्म नहीं है अपने पहनावे से । लेकिन अगर इस धोती शब्द का प्रयोग गाली के रुप में कोई हमें दे तो फिर सहन नहीं ।
एकबार फिर कुछ लोग मधेशियों को गाली देकर अपना उल्लु सीधा कर रहें हैं । ऐसा न हो कि मधेश एक बार फिर आन्दोलन करे । रही बात बालेन्द्र साह की जिसे थापाथली के सुकुमवासी धोती –धोती कहकर गाली दे रहे हैं या फिर ये जो कह रहे हैं कि ये मधेशी, मरसिया हमसे जगह खाली करवाएगा । जिस बालेन्द्र को सुकुमवासी धोती कह रहे हैं वो बालेन न तो मन से धोती है न ही पहिरन से धोती है, न ही उसकी मातृभाषा मधेश की है । बिल्कुल गलत सोच है सुकुमवासियों की कि बालन मधेशी है या वो धोती है । जिसे काठमांडू के पहाड़ी मूल के लोग धोती, मरसिया, मदिशे और न जाने क्या –क्या कहकर संबोधित कर रहे हैं । तो उस बालेन साह के बारे में जानकारी अवश्य ले । बालेन मधेशी है ही नहीं । तो फिर क्यूँ ऐसे गाली देना । क्या वो सचमुच गलत कर रहा है ?काठमांडू के कुछ ऐसे हिस्से में सुकुमवासियों ने अपना ठिकाना बना लिया है जहाँ से उन्हें आज नहीं तो कल हटना ही पड़ेगा ।
लेकिन ये गाली मधेश और मधेशशियों को देकर जो कुछ लोग अपना उल्लु सीधा कर रहें हैं उनका क्या ? वो इस बात पर राजनीति कर रहे हैं और भड़का रहें हैं मधेश की जनता को । हमें गाली नहीं दें । हाँ हम हैं मधेशी, हाँ हम हैं धोती, और गर्व भी करते हैं, लेकिन ये सुकुमवासी कहाँ से आए हैं ? हमारी पहचान है मधेश और धोती ।
अब जाने की काठमांडू, भक्तपुर और ललितपुर में कितने जगहों सुकुमवासी बस्ती है ? तो तीनों जिलें को मिलाकर २७ जगहों पर सुकुमबासी बस्ती है जहाँ ३४ सौ ६६ परिवार दशको से हंै और यह सरकारी तथ्यांक है ।
अधिकार सम्पन्न वाग्मती सभ्यता एकीकृत विकास समिति ने काठमांडू महानगर पालिका को दिए तथ्यांक अनुसार महानगर में केवल २२ सौ४५ घर है । तथ्यांक में इन्हीं घर को अव्यवस्थित बसोबास’ कहकर उल्लेख किया गया है ।
काठमांडू के वडा नम्बर ३१ स्थित शान्तिनगर में केवल ४७६ घर रुप में बना है । १४ नम्बर के बल्खु स्थित जागरण मार्ग में ४०१ घर है । वडा नम्बर १० में देविनगर, शान्ति–विनायक और शंखमूल में क्रमशः ४०, ३६ और १५० करके २ सौ २६ घर रुप में है ।
वडा नम्बर ११ के थापाथली और वंशीघाट के सुकुमबासी बस्ती में ३ सौ ६ घर है । वडा नम्बर ४ स्थित धुम्बराही में ६ और बालुवाटार में १४ घर है ।
वडा नम्बर ३ में १८९, वडा नं २९ के अनामनगर में २३, वडा नं ३२ के जडिबुटी÷मिलनचोक में ११४, १६ के जागृति मार्ग में १२२ और बुद्धज्योति में ७५ घर है । वडा नम्बर २, २६, ९ और १५ में २ सौ ६० घर है ।
कुछ लोगों का कहना है कि सुकुमबासी बस्ती यहाँ बहुत ज्यादा नहीं है । अगर खोजबीन की जाए तो दूसरे जगहों पर यहाँ से बहुत ज्यादा अन्य जिले में सुकुमवासी मिलेंगे ।
इसी तरह कागेश्वरी मनोहरा नागरपालिका के वडा नम्बर ९ आरै ८में ९० घर है । बुढानीलकण्ठ नगरपालिका के वडा नम्बर १२ और १०में १५६ घरधुरी है । थापाथली स्थित सुकुम्बासी बस्ती के लोगों ने घरके बाहर बहुत से सामान को समेट कर रखा था लेकिन सोमबार को जब काठमांडू महानगरपालिका की टोली डोजर सहित वहाँ पहुँची तो बस्ती के स्थानीय ने प्रतिकार किया ।
ललितपुर महानगरपालिका के मिलटोल बालकुमारी में १७ घर, भक्तपुर नगरपालिका के मनोहरा मध्यपुर ठिमि क्षेत्र में ७७३ और गोदावरी नगरपालिका ३ स्थित गोदावरी नहर में २१५ घर है । इसका समिति के तथ्यांक में उल्लेख किया गया है ।
अब बालेन क्यों चाहते हैं या क्या उन्हें संवैधानिक अधिकार है ? स्थानीय तह को संविधान ने जो अधिकार दिया है उसमें स्पष्ट रुप से कहा गया है कि खोला, नदी, नाला संरक्षण करना और वैसे जगहों में बनाए गए अनधिकृत संरचनों को हटाया जाए । महानगर की नजर में इस तरह के संरचना को हटाना और क्लियर करने का उनका लक्ष्य है । उनके अनुसार महानगर के भीतर लगभग १२ हजार अनधिकृत संरचना है । अनधिकृत संरचनों को हटाना और क्लियर करने का हमारा लक्ष्य है और इससे हमें कोई अलग नहीं कर सकता है । खास बात यह है कि यहाँ के रहनेवाले बहुत से लोग राजनीतिक दल के कार्यकर्ता हैं । और दल के नेता उन्हें अपने स्वार्थ के लिए प्रयोग करते आ रहें हैं ।
दुख की बात यह है कि इसमें मधेश, मधेशी,मरसिया या धोती को क्यों समेटा गया है ? क्यों आग को हवा दी जा रही है । समझ में नहीं आ रहा है कि ये सुकुमवासी या इनके पीेछे खड़े लोग मधेश को जलाने का काम क्यों कर रहें हैं ?



