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अफगानिस्तान में महिलाओं पर बढती पाबंदी, अब नहीं कर पाएँगी एनजीओ में काम

 

काबुल.

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने शनिवार को महिलाओं के घरेलू और विदेशी एनजीओ में काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया. साथ ही सभी गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को महिला कर्मचारियों की भर्ती नहीं करने का आदेश दिया. यह आदेश वित्त मंत्री कारी दीन मोहम्मद हनीफ के एक पत्र में आया है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई एनजीओ आदेश का पालन नहीं करता है, तो अफगानिस्तान में उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा.

वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल रहमान हबीब ने इस आदेश की पुष्टि की है. मंत्रालय ने कहा कि उसे एनजीओ के लिए काम करने वाली महिला कर्मचारियों के बारे में ‘गंभीर शिकायतें’ मिली हैं, जो ‘सही तरह से हिजाब नहीं पहनती हैं.’

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हालांकि, तत्काल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह आदेश एनजीओ में काम करने वाली अफगान महिलाओं पर ही लागू होगा या सभी महिलाएं इसके दायरे में आएंगी.

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इससे पहले तालिबान शासकों ने इस हफ्ते मंगलवार को एक आदेश जारी कर देशभर में महिलाओं के निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों में पढ़ने पर तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक रोक लगा दी थी. तालिबान प्रशासन ने इसका कोई कारण नहीं बताया और न ही उसने इसकी कड़ी वैश्विक निंदा पर प्रतिक्रिया दी है.

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इस आदेश के अगले दिन यानी बुधवार को काबुल में विश्वविद्यालयों के बाहर तालिबान सुरक्षाकर्मी नजर आए, जिन्होंने कुछ महिलाओं को अंदर जाने से रोका जबकि कुछ अन्य को अंदर जाकर अपना काम पूरा करने की अनुमति दी. उन्होंने किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी, शूटिंग या विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की.

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बता दें कि शुरुआत में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करने तथा और ज्यादा उदार शासन का वादा करने के बावजूद तालिबान ने व्यापक रूप से इस्लामिक कानून या शरिया को कड़ाई से लागू किया है. उसने अगस्त, 2021 में सत्ता पर कब्जा कर लिया था.

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