नये साल का “नववधु” की तरह हृदय से तुम स्वागत कर लेना : मनीषा मारू
नये साल का
“नववधु” की तरह
तुम हृदय से स्वागत करना।
नवसंकल्प के साथ
बुलंद हौसलों से हर नई
चुनौतियों को भी स्वीकार करना।
संघर्ष की कुमकुम थाल में
शौर्य और साहस से हर कदम रंगकर….निरंतर…आगे…..बढ़ना।
दृढ़ विश्वास भरकर
रस्मों की हर बाज़ी को तुम
बुद्धि –विवेक से हरदम खेलना।
कौन तुम्हें फिर मात दे सकेगा ??
दुआओं की पग–पकड़ाई भी तुम
जरा……झुक…..झुक….कर ले लेना।
लेकिन मुंह दिखाई में,
अपने स्वाभिमान और आत्मसम्मान
को भी जरा संयमता से झलका देना।
साजिशों की भीड़ में,
तुम अकेले ही हर दिन कुछ नया
अपने मुस्कुराते जज़्बो संग परोसना।
अंतर्मन के घरौंदे को
कोई तोड़ ना पाए उत्साह–उमंगों से
नवऊर्जा का उर में संचार भी करना।
बिगड़ते हालातों पे,
मजबूत इरादों की लूणराई कर
जुनून की नींबू– मिर्ची भी उँवारना।
दर्द के ज़हरीले फन को
विनम्रता के दर्प से कुचल देना।
बिखरते जज्बातों को तुम स्वयं संभालना।
दुविधाओं में फंस जाओ तो
ध्यान जगत की डोली में बैठकर
“परमात्मा”को बस एकबार पुकार लेना।
सही मार्ग दिख जायेगा
हृदय चेतना से जगकर शून्य से
फिर तुम जीवन की नयी शुरूवात कर लेना।
नये साल का
“नववधु” की तरह
हृदय से तुम स्वागत कर लेना।

नेपाल
मनीषा मारू
नेपाल


