नमन मधेस ! : अजय कुमार झा
नमन मधेस!
कहाँ गया वह महतो जिसने सिने में गोली खाई?
कहाँ गया वह ठाकुर जिसने तेरे लिए दी कुर्वानी?
कहाँ गया वह आन्दोलन और कहाँ क्रान्ति की वह ज्वाला?
कैसे तू ने की समझौता पीकर मद का वह प्याला? 1
अपना मधेस अपना स्वदेस बस एक प्रदेस का नारा है।
अपनी जाती अपनी संस्कृति अपना भाषा प्यारा है।।
सभी वर्ग और जाती धर्म के सारे लोग हमारा है।।।
इस पुण्य भूमि में जन्मा बच्चा बच्चा राजदुलारा है।।।। 2
नहीं हमें धन की लालस है वर्ग भेद नहीं जाना है।
नहीं किसी से इर्ष्या घृणा नहीं क्रोध अपनाना है।।
छल कपटी के धूर्त चाल से हमें मधेस बचाना है।।।
बाएँ कर गीता धारण कर दाएँ खडग उठाना है।।।। 3
सतयुग के परशुधारी तुम परशुराम सा योद्धा हो।
त्रेता में रावण को मारा दसरथ सा तुम नेता हो।।
द्वापर में गांडीव उठाया कुरुक्षेत्र थर्राया है।।।
आज तेरे हुँकार के आगे ख्सबादी घबराया है।।।। 4
तेरे हर इक शब्द भड़ा है क्रान्ति के रसधारों से।
तुमने भी इतिहास रचा है आजादी के नारों से।।
जाती छोड़ा पार्टी छोड़ा सबकुछ अपना छोड़ चला।।।
टूटे दिल को जोड़ने वाला तुझ में है बेजोड़ कला।।।। 5
युवाओं के सही दर्द को तुम ही समझने बाले हो।
हम किशान के मर्म भाव को तुम ही बुझने बाले हो।।
दलित पीड़ित की दीन हीनता तुम ही मिटाने बाले हो।।।
खसवादी दुष्टों को तुम ही धूल चटाने बाले हो।।।। 6


