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सभी धर्मों की आस्था का प्रतीक है – बंगला साहिब गुरुद्वारा : ज्योति पवार

 

ज्योति पवार, भारतवर्ष अनेकता में एकता का प्रतीक है। इसका साक्षात उदाहरण है, यहाँ विभिन्न धर्मो – हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब आपस में मिल – जुलकर रहते हैं। देश की राजधानी, दिल्ली में भी इन सभी धर्मों के अनुयायी अपने -अपने धार्मिक स्थलों पर पूजा अर्चना करने जाते हैं। धार्मिक आस्था से इन्हें आत्मिक शांति एवं जीवन की खुशहाली प्राप्त होती है।

इसी कड़ी में, मैं आज आपको विश्व प्रसिद्ध गुरुद्वारा बंगला साहिब के बारे में कुछ जानकारियां साझा कर रही हूं। 9 दिसंबर 2022 यानी शुक्रवार को मैं अपनी जिंदगी में पहली बार ‘बंगला साहिब गुरुद्वारा’ जो दिल्ली शहर में है, मैं अपने दोस्तों तथा अपनी फैमिली दोस्त के साथ गई। गुरुद्वारे में प्रवेश करते ही एक अलग ही सुकून वाली अनुभूति महसूस हुई। पिछले कुछ सालों से काफी मन था कि मुझे एक बार गुरुद्वारे जरूर जाना है लेकिन कभी जाने का प्लान नहीं बन पाया। बंंगला साहिब गुरूद्वारे में प्रवेश पाते ही सबसे पहले हमने अपने जूते उतारकर जूताघर में रखवाने पश्चात अपने हाथ पानी से धोकर अपने – अपने सिर पर पटका बांध लिया। वहां से बाहर आकर हमने सीढ़ियों के नीचे बहते पानी में अपने पैरो को साफ किया। यह सब करने के बाद हम अंदर गए, अपना माथा टेका और फिर कुछ देर वहीं बैठकर अरदास सुनी। अरदास सुनकर मेरा मन काफी खुश हो गया। अंदर का माहौल काफी शांत और सुखमय था। मैं गुरूद्वारे की भव्यता, सौन्दर्यता तथा स्वच्छता देखकर अत्यंत प्रभावित हुई।
गुरुद्वारा से वापस आने के बाद मैंने अपने कॉलेज साथियों तथा फैकल्टी से भी बंगला साहिब गुरुद्वारा में बिताए यादगार क्षणों के बारे में बताया। लेकिन मेरे शिक्षक – ऐसिस्टैट प्रोफेसर एस. एस. डोगरा ने मुझे इस पवित्र धार्मिक स्थल की अच्छी तरह से रिसर्च करने तथा बंंगला साहिब गुरुद्वारा को पुनः दर्शन करने तथा महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने के लिए प्रेरित किया। जिसकी झलक आपको मेरे निम्न पंक्तियों में अवश्य ही प्रकट हो जाएगी। तो आइए आज हम आपको भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित सिख धर्म की आस्था के प्रतीक विश्व प्रसिद्ध ‘गुरुद्वारा बंगला साहिब ’ की सैर कराते हैं।
यह प्रचीन गुरुद्वारा दिल्ली के बाबा खड़गसिहं मार्ग गोल मार्केट एक प्राचीन चर्च के सामने स्थित है। इसकी स्थापना सिख जनरल बघेल सिंह के द्वारा 1783 में की गई थी। इस प्रसिद्ध गुरुद्वारे की स्थापना में महाराज जयसिंह जी की प्रमुख भूमिका है। क्योंकि यह गुरुद्वारा कभी उन्हीं का बंगला हुआ करता था। परंतु सिक्खों के आठवें गुरू हरि कृष्ण सिंह जी यहाँ (इसी बंगले) गुरुद्वारा परिसर में अपने दिल्ली प्रवास के दौरान रहे थे। उस समय चेचक और हैजा की बीमारियां फैली हुई थी। गुरु महाराज ने इन बीमारियों से पीडित मरिज़ो को सरोवर के जल एवं अन्य सुविधाएं प्राप्त कराते हुए, उन्हें इन गंंभीर बीमारियों से मुक्त कराया। इसी कारण आज भी सरोवर में इस जल को पवित्र माना जाता है और बंंगला साहिब गुरुद्वारा विश्व भर के सिखों में विशेष आस्था का प्रतीक है। इस प्रसिद्ध गुरुद्वारे में सभी धर्मो के लोग पवित्र तीर्थ के रूप में इसके दर्शन करने आते हे।

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गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में एक बड़ा रसोईघर, एक बड़ा सरोवर, एक लाइब्रेरी, एक अस्पताल, एक सीनिर माध्यमिक विद्यालय, सिख इतिहास को दर्शाता संग्रहालय तथा आर्ट गैलरी भी है। साथ ही परिसर के बाहर कुछ आकर्षक दुकानें भी है, जहां पर सिख एवं हिन्दू धर्मो से संबंधित साहित्य, आभूषण, गुरुओं, भगवान- देवियो की तस्वीरें, दुपट्टे, कड़े, कृपाण आदि भी उचित दामो पर उपलब्ध है।
अन्य सिख गुरुद्वारो की भाति ही, यहाँ भी बिना किसी धर्म जाति भेद-भाव के प्रतिदिन विशाल लंगर (प्रसाद रुपी भोजन )परोसा जाता है। परंतु गुरुद्वारे में प्रत्येेक श्रद्धालु को जूते उतार कर अपने सिर पर पटका लगाकर ही गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश करना होता है। यहाँ गुरुद्वारा में, सिख पंत के मुताबिक कोई भी श्रद्धालु लंगर बनवाने, जूते उठाने का कार्य स्वेच्छानुसार कर सकता है। इस धार्मिक स्थल के दर्शन करने वर्षभर देश विदेशों से सिख समुदाय के ही नहीं बल्कि अन्य धर्म के श्रद्धालु भी पूजा अर्चना करने आते हैं ।

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(लेखक- एफ.आई.एम.टी कालेज, आई.पी. यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली की पत्रकारिता एवं जन-सचांर कोर्स की प्रथम वर्ष की छात्रा हैं।)

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