यदि राजतंत्र चाहिए तो पूर्वराजा ज्ञानेन्द्र शाह को भी आंदोलन में आना होगा – दुर्गा प्रसाई
काठमांडू, २० फागुन –
व्यवसायी दुर्गा प्रसाईँ ने ‘राजतन्त्र–जिन्दावाद’ नहीं कहने का आग्रह किया है । राजतन्त्र पुनःस्थापना करने की मांग को लेकर शनिवार काठमांडू के नया बानेश्वर में आन्दोलन का शुभारम्भ करने वाले दुर्गा प्रसाई ने कहा कि जबतक पूर्वराजा ज्ञानेन्द्र शाह उपस्थित नहीं होते हैं तबतक राजतन्त्र जिन्दावाद का नारा नहीं लगाने का आग्रह किया है । इससे पहले प्रसाई के समर्थक ‘राजा आऊ, देश बचाऊ’ (राजा आए देश बचाए) का नारा लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे थे । लेकिन प्रसाई ने अपने सम्बोधन के क्रम में राजतन्त्र जिन्दावाद का नारा नहीं लगाने का अब सभी से आग्रह किया है ।
प्रसाई ने शर्त रखते हुए कहा कि अगर देश में राजतन्त्र चाहिए तो पूर्वराजा शाह और उनके परिवार के सदस्यों को भी आन्दोलन में सहभागी होना होगा । उन्होंने कहा कि मैं आप लोगों से राजतन्त्र जिन्दावाद नहीं कहने का आग्रह किया है क्योंकि अगर राजतंत्र चाहिए तो उनलोगों को भी आन्दोलन में आना ही होगा । उन्हें हमारे साथ आना ही होगा, लड़ना होगा, हमारा साथ देना होगा । साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ‘राजा को दिखाकर रोटी सेंकने का काम करनेवालों में नहीं है दुर्गा प्रसाईँ । मैं राजा को दिखाकर सांसद बनना नहीं जानता ।’
माओवादी छोड़कर एमाले में प्रवेश करने वाले प्रसाई ने हाल ही में उस पार्टी से भी परित्याग कर राष्ट्र, राष्ट्रीयता, धर्म–संस्कृति और नागरिक बचाओं महाअभियान सञ्चालन कर काठमांडू में आन्दोलन का कार्यक्रम शुरु किया है । उन्होंने कहा कि उन्हें बाध्य होकर आंदोलन का सहारा लेना पड़ा है । राज्य व्यवसाय तथा रोजगारी के अवसर सृजना नहीं कर पा रही है । सारे रास्ते बंद होने के बाद बाध्य होकर आन्दोलन में आना पड़ा है ।

