नेपाल भारत साहित्य महोत्सव का पूर्व राज्यपाल ने किया उद्घाटन
माला मिश्रा बिराटनगर नेपाल । नेपाल के कोशी प्रदेश का राजधानी बिराटनगर के जानकी सेवा सदन में पूर्व निर्धारित तीन दिवसीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के चतुर्थ संस्करण का कोशी प्रदेश के पूर्व राज्यपाल गोबिन्द सुब्बा ने दीप प्रज्वलित कर किया इससे पूर्व इसका शुभारंभ नेपाल भारत के राष्ट्रीय गीत से किया गया । इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत रुद्राक्ष का माला और गमछा ओढ़ाकर किया गया ।
उद्घाटन सत्र का अध्यक्षता नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार दधिराज सुवेदी ने किया । इस मौके पर बिशिष्ट अतिथि के रूप में बिराटनगर महानगरपालिका मेयर नागेश कोइराला रहे । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री गोविंद सुब्बा ने आयोजक को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से नेपाल भारत का सांस्कृतिक , साहित्यिक , धार्मिक सम्बन्ध में मिठास आएगा । हमारे आपके बीच का दूरी कम होगा। एक दूसरे का साहित्यिक इतिहास जानने का बेहतर प्लेटफार्म है ये । विशिष्ट अतिथि श्री नागेश कोइराला ने कहा कि नेपाल भारत सदियों से चला आ रहा सम्बन्ध के लिए जो बन पड़ेगा कभी पीछे नही हटेंगे । उन्होंने कहा इस तरह का कार्यक्रम होते रहना चाहिए । दोनो देश के बीच व्यपारिक सहित धार्मिक , साहित्यिक सम्बन्ध को हम अनदेखा नही कर सकते । नेपाल भारत साहित्य महोत्सव आयोजक डा . विजय पंडित ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला । स्वागत भाषण बिराटनगर महानगरपालिका के ओर से युवा साहित्यकार मीन कुमार नबोदित ने दिया । संचालन कार्यक्रम का संयोजक डा. देवी पंथी ,गोकुल अधिकारी संयुक्त रूप से कर रहे थे । इस मौके पर प्रज्ञा प्रतिष्ठान मधेश प्रदेश का अध्यक्ष डा. रामभरोस कापड़ी , पोखरा से पहुचे ज्योतिष शिरोमणि डा. बलराम उपाध्याय , पटना से पहुची श्रीमती बिभा रानी श्रीवास्तव , प्राज्ञ श्रीमती गंगा सुवेदी , पूर्व सांसद खेम नेपाली , विधायक किशोर चन्द्र दुलाल , डा. देवी क्षेत्री दुलाल , बरिष्ठ साहित्यकार डा. मीनाक्षी नेपाल , सांसद रेखा यादव , बरिष्ठ साहित्यकार विवश पोखरेल , भीष्म उप्रेती , अभय श्रेष्ठ , नेपाल भारत मैत्री संघ का अध्यक्ष इंजीनियर शैलेन्द्र मोहन झा , समाजसेवी करुणा झा , समाजसेवी आभा अनुपमा , झूमा निरौला , भारत नेपाल मैत्री समाज का अध्यक्ष व कार्यक्रम का सह संयोजक माला मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारत नेपाल के कई प्रान्त से सैकड़ो साहित्यकार मौजूद थे ।







