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महन्थ ठाकुर, राजेन्द्र महतो को सभासद होना मुशकिल,पासवान का छक्का ?

 
दिपेन्द्र झा, अधिवक्ता
दिपेन्द्र झा, अधिवक्ता

काठमाणडू। सर्वोच्च अदालत ने एतिहासिक निर्णय करते हुये सरकार को आदेश दिया है कि वह १५ दिन के अन्दर २६ सभासदों का नियुक्ति करे ।

 न्यायाधीश द्वय रामकुमारप्रसाद साह और कल्याण श्रेष्ठ की इजलास ने संविधानसभा मे सरकार व्दारा मनोनयन कियेजाने वाले २६ लोगों को दिये गये समय सीमा मे मनोनयन करने का आदेश दिया है।  सर्वोच्च ने मनोनयन करते समय संविधानसभा के निर्वाचन मे पराजित हुये और समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली अन्तर्गत बन्दसूची मे जिनका नाम था उसे मनोनयन नही करने का आदेश भी दिया है ।
सर्वोच्च अदालत मे किये अपनी जोरदार बहस पर खुशी व्यक्त करते हुये अधिवक्ता दिपेन्द्र झा ने कहा है कि उनके वकालत मार्फत यह ऐतिहासिक आदेश मिला है तथा सम्मानित सर्वोच्च अदालत के इस आदेश से देश एक नयाँ कोस्र लिया है ।
सभासद विश्वेन्द्र पासवान व्दारा दायर किये गये रीट पर सुनुवाइ करते हुये सोमबार को अदालत ने २६ सभासदों का  मनोनयन विना कियागया संविधानसभा की काम कारवाही को अपूर्ण करार दिया है ।

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सर्वोच्च अदालत के इस आदेश के बाद महन्थ ठाकुर, राजेन्द्र महतो सहित चुनाव मे पराजीत हुये नेताओं को सभासद होना अब मुशकिल हो गया है । इसप्रकार चुनाव मे हारे हुये या समानुपातिक से बाहर होने बाले जो २६ मे मनोनति होने का प्रयास कररहे थे ऐसा कांग्रेस और एमाले के कई

विश्वेन्द्र पासवान
विश्वेन्द्र पासवान

नेताओं का सभासद बनने का सपना अब अधुरा रह गया है । अदालत ने इसका दरबाजा बन्द कर दिया है ।

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अदालत व्दारा दिये गये आदेश मे कहा गया है कि दलीय पंतिनिधित्व से ही संविधानसभा को पूर्ण नही किया जा सकता, मन्त्रिपरिषद से कियेजानेवाले मनोनयन मे दलीय स्वार्थ समायोजन वा राजनीतिकरण कियागया तो वह संविधानस की भावना के विपरीत तथा आपत्तिजनक माना जायेगा ।

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