जनकपुर से भारत को जोड़ेगा रामायण कॉरिडोर
इसे अवश्य सुनें, क्लिक करें
काठमांडू: पिछले एक साल से भारत और नेपाल के रिश्तों में गोरखा सैनिकों की भर्ती की वजह से काफी तनातनी जारी है। अग्निवीर स्कीम की वजह से नेपाल ने 200 साल पुरानी परंपरा को तोड़कर गोरखा सैनिकों की भर्ती को रोक दिया। लेकिन जब पिछले दिनों नेपाली प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड भारत आए तो उन्होंने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई आपसी मसलों पर चर्चा की। मगर इसी दौरान भारत ने रामायण कॉरिडोर को भी आगे बढ़ाने की ख्वाहिश जताई।
भारत और नेपाल के बीच कई ऐसी जगहें धार्मिक जगहें हैं जो इन दोनों देशों के बीच संबंधों का आधार हैं। दोनों ही देश हिंदू धर्म में आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। साथ ही इन दोनों देशों का भगवान राम से भी गहरा नाता है। अब भारत श्रीराम के सहारे नेपाल के करीब होने की तैयारी कर चुका है। भारत की तरह नेपाल में भी भगवान राम वहां की जनता की आस्था का केंद्र बिंदु हैं। अब भारत एक नेपाल तक एक ऐसा रेलवे नेटवर्क तैयार करने की तैयारी कर रहा है जो चीन को पछाड़ कर दोनों देशों की साझा विरासत को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा
सूत्रों पर अगर यकीन करें तो भारतीय रेलवे रामायण कॉरिडोर के जरिए नेपाल तक एक ट्रेन चलाना चाहता है। यह रेलवे लाइन नेपाल में जनकपुर को भारत से जोड़ेगी। विशेष ट्रेन पूरे भारत में हिंदुओं के पवित्र स्थलों को कवर करेगी और जिसने भगवान राम के जीवन में एक आवश्यक भूमिका निभाई, जिसमें भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या के साथ सीतामढ़ी, बक्सर, वाराणसी, प्रयाग, चित्रकूट, नासिक, हम्पी, रामेश्वरम कांचीपुरम, और भद्राचलम जैसे स्थान शामिल हैं। भारतीय विदेश सचिव क्वात्रा ने इस बारे में कुछ दिनों पहले कहा था कि इस प्रोजेक्ट का कार्य प्रगति पर है।
रामायण प्राचीन हिंदू महाकाव्य है जो भगवान राम की जीवनी है। कहा जा रहा है कि रामायण कॉरिडोर दोनों देशों के हिंदुओं को उन जगहों तक लेकर जाएगा जिनका जिक्र रामायण में हुआ है। नेपाल तक जाने वाली यह दूसरी रेल होगी। इसका मकसद दोनों देशों के बीच धार्मिक पर्यटन को सुविधाजनक बनाने के अलावा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करना होगा। इससे पहले भारतीय रेलवे ने बोधगया, सारनाथ और लुंबिनी जो नेपाल में है, वहां तक एक ट्रेन चलाई है। लुंबिनी में महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। उन्होंने भारत के बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया और पहला उपदेश सारनाथ में दिया था।
रामायण कॉरिडोर का पहला जिक्र साल 2018 में हुआ था। उस समय पीएम नरेंद्र मोदी नेपाल के जनकपुर गए थे। यह जगह माता सीता की जन्मस्थली है और यहां पर जानकी मंदिर है। उनका दो दिवसीय नेपाल दौरा यहीं से शुरू हुआ था। जनकपुर में तत्कालीन नेपाली पीएम केपी ओली ने उनका स्वागत किया था। यह पीएम मोदी का तीसरा नेपाल दौरा था। साल 2022 में चीन ने नेपाल को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत तिब्बती पठार की सुरंगों में ब्लास्ट करके एक ट्रांस-हिमालयन मल्टी-डायमेंशनल कनेक्टिविटी नेटवर्क की पेशकश की। चीन, नेपाल में रेल नेटवर्क बिछाने में लगा है। ऐसे में रामायण कॉरिडोर उसके प्रभाव को कमजोर करने में मददगार साबित हो सकता है।

