पशुपति मंदिर से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में जांच करने पहुंचे अधिकारी, भक्तों को परिसर से किया बाहर

काठमांडू । पशुपतिनाथ मंदिर में जलहरी को लेकर हुए भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए भ्रष्टाचार रोधी संस्था ने रविवार को मंदिर के परिसर को खाली करा दिया और अधिकारियों ने मंदिर की जलहरी में इस्तेमाल किए गए सोने की जांच शुरू कर दी है। एक रिपोर्ट अनुसार 100 किलोग्राम वजन के जलहरी से 10 किलोग्राम सोना गायब था।
पशुपतिनाथ मंदिर काठमांडू का सबसे पुराना हिंदू मंदिर है। जलहरी एक सोने का आभूषण है जो पिछले साल महा शिवरात्रि के दौरान मंदिर के अंदर शिवलिंग के चारों ओर स्थापित किया गया था। इस शिवलिंग के आभूषण से 10 किलोग्राम सोना गायब होने की रिपोर्ट के बाद संसद में सवाल उठाए जाने के बाद सरकार ने प्राधिकरण के दुरुपयोग की जांच आयोग (सीआईएए) को जांच शुरू करने का निर्देश दिया।
पशुपति क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने दावा किया कि उसने जलहरी बनाने के लिए 103 किलोग्राम सोना खरीदा था लेकिन आभूषण से 10 किलोग्राम सोना गायब था। पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक, घनश्याम खातीवाड़ा ने मीडिया को बताया कि गायब हुए सोने पर सवाल उठने के बाद पशुपतिनाथ की सोने से बनी जलहरी को उसकी गुणवत्ता और वजन निर्धारित करने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक निकाय ने अपने कब्जे में ले लिया है।
जांच प्रक्रिया जारी रहने के दौरान पशुपति मंदिर परिसर में नेपाल सेना के जवानों सहित दर्जनों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। रविवार दोपहर 3.30 बजे से भक्तों को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया है और सूत्रों ने कहा कि मंदिर आधी रात तक बंद रहेगा। सीआईएए अधिकारियों ने मंदिर के सभी चार दरवाजे सील कर दिए गए और भक्तों को परिसर छोड़ने के लिए कहा गया।
तत्कालीन राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने निर्धारित तिथि से तीन दिन पहले 24 फरवरी, 2021 को जलहरी का अनावरण किया थाा। करीब एक अरब रुपये की कीमत वाली जलहरी का मुद्दा नेपाल संसद में भी उठा था।

