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एक वर्ष से अध्यक्षविहीन त्रिवि सेवा आयोग राजनीतिक दांवपेच का शिकार

 

काठमांडू.

18 गते सावन  2079 से पदाधिकारी विहीन त्रिभुवन विश्वविद्यालय सेवा आयोग में सरकार अभी तक नियुक्ति नहीं कर सकी है।

विश्वविद्यालय के सहकुलपतिसमेत रहे शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधिमन्त्री के संयोजकत्व में  समिति की सिफारिस के आधार पर प्रधानमन्त्री द्वारा अध्यक्ष नियुक्ति करने की व्यवस्था है । लेकिन राजनीतिक नेतृत्व पदाधिकारी नियुक्ति में विलम्ब के कारण   गत वर्ष की स्थगित  शिक्षक तथा कर्मचारी की परीक्षा और अन्तरवार्ता रोकने के साथ ही   करीब तीन हजार शिक्षक कर्मचारी के लिए नया   विज्ञापन नहीं खुल पाया है ।

आयोग के पदाधिकारी विहीन हो जाने के बाद तत्कालीन शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री देवेन्द्र पौडेल के समन्वय में गठित तीन सदस्यीय अनुशंसा समिति ने खुले आवेदन मांगे थे ।

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सूत्रों का दावा है कि हालांकि 36 लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन तत्कालीन प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा और शिक्षा मंत्री पौडेल के परस्पर विरोधी हितों के कारण नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

पुष्प कमल दहाल के नेतृत्व में सरकार बनने के 7 महीने बाद शिक्षा मंत्री अशोक राई ने हाल ही में सेवा आयोग के अध्यक्ष के लिए 3 नामों की सिफारिश की थी तब कहा गया कि , ‘अब प्रधानमंत्री  जल्द ही  नियुक्ति करेंगे.’ किन्तु यह अभी तक संभव नहीं हो पाया है ।

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त्रिवि कर्मचारी संघ ने कहा है कि स्टाफ की कमी के कारण सेवा वितरण काफी प्रभावित हो रहा है. अध्यक्ष छत्र कार्की का कहना है कि सेवा आयोग के अध्यक्ष विहीन होने के दूरगामी प्रभावों को लेकर राजनीतिक नेतृत्व गंभीर नहीं है।

“कई बार इस ओर ध्यान दिलाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई. करीब दो महीने पहले सिर्जनात्मक आंदोलन की घोषणा करने पर  जल्द ही अध्यक्ष नियुक्त करने की बात कही गई थी और विरोध न करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है.”

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त्रिभुवन विश्वविद्यालय केन्द्रीय क्याम्पस के स्ववियु अध्यक्ष श्यामराज ओझा , का कहना है कि प्रधानमंत्री ने यूनिवर्सिटी की उपेक्षा की है.

हमने बार-बार आवाज उठाई कि सेवा आयोग को नेतृत्व मिलना चाहिए, लेकिन कुलपति हमारी मांग को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे । उन्होंने कहा कि इस स्तर पर विश्वविद्यालय की उपेक्षा राज्य के लिए बड़ी क्षति है.

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