सत्तामोह ने सद्भावना पार्टी की विश्वसनीयता को कम किया
श्वेता दीप्ति, काठमान्डौ श्रावण ३ गते । सद्भावना पार्टी के द्वारा नया बानेश्वर के अल्फा वीटा के सभागार में संविधान सभा और मधेश की भावी योजना तथा आर्थिक मार्ग विषय पर अन्तरक्रियात्मक कार्यक्रम आयोजन किया गया । कार्यक्रम में सद्भावना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र महतो के अतिरिक्त अन्य सम्बन्धित लोगों की उपस्थिति थी । अध्यक्ष महोदय ने माना कि अतीत में कई गलतियाँ हुई हैं जिसका खामियाजा आज मधेशी पार्टियाँ भुगत रही है । किन्तु आज विश्लेषण और विवेचन का वक्त है । हमें अपने अधिकारों के लिए सडक से संसद तक की राह तय करनी होगी ।
कार्यक्रम में दो कार्यपत्र प्रस्तुत किए गए जो मधेश की आर्थिक स्थितियों का अवलोकन थी । प्रस्तुतकत्र्ता त्रि। वि। के अर्थशास्त्र विभाग के डा। सोहन कर्ण और डा। उमाशंकर प्रसाद थे । इन्होंने काफी विस्तार से मधेश के सन्दर्भ में आर्थिक नीतियों और त्रुटियों का विश्लेषण किया ।
खुले सत्र में महाजन यादव, पूर्व मंत्री उमाकान्त झा, अधिवक्ता सुरेन्द्र महतो, अधिवक्ता दीपेन्द्र झा , दिगिवजय मिश्र, दिगम्बर झा जैसे विज्ञ ने अपनी अपनी धारणा व्यक्त की । वक्ताओं का मानना था कि पार्टी को सरकार में न जाकर सरकार पर बाह्य दवाब बनाना चाहिए । बजट जो पूरी तरह मधेश विरोधी है उसे जलाना चाहिए । पार्टी जो हार का सामना कर रही है उसे जनता के समक्ष फिर से पूरी तैयारी के साथ जाना चाहिए । परिवारवाद भी विचारों में उभर कर आया । कार्यक्रम में हर पक्ष के विद्वानों की उपस्थिति थी ।

