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आज हम चांद पर हैं : डॉ. सत्यवान सौरभ

 

डॉ. सत्यवान सौरभ, हिमालिनी अंक सेप्टेंबर ।बभारत की अंतरिक्ष एजेंसी ने आज चंद्रमा पर एक रोवर को उतारकर अंतरिक्ष अन्वेषण में एक शक्ति और अंतरिक्ष वाणिज्य की नई सीमा के रूप में देश के आगमन को चिह्नित किया है । ७५ मिलियन डॉलर से कम के बजट पर निर्मित, चंद्रयान –३, जिसका संस्कृत में अर्थ है “चंद्रमा वाहन”, आज चांद पर है । अपनी पीठ पर चंद्रयान–३ आज १४० करोड़ भारतीयों की उम्मीदों को साकार कर चुका है । चांद को चूमने पर ये उम्मीदें हर भारतीय के दिल में खुशी बनकर फूटी है । पूरा देश खुशियां मना रहा है । पिछली बार जो कसक रह गई थी, इस बार सब मंगल हुई । जी हां, आज हम चांद पर है । पूरे देश को बेसब्री से चंद्रयान की लैंडिंग का इंतजार था वो खत्म हुआ ।
मिशन की सफलता से भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, पूर्व सोवियत संघ और चीन वाले देशों के एक छोटे समूह में शामिल हो गया है, जिन्होंने चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की है । इस साल की शुरुआत में एक जापानी स्टार्ट–अप का प्रयास ऊंचाई की गलत गणना के कारण लैंडर के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ समाप्त हुआ, जिसका मतलब था कि अंतरिक्ष यान का ईंधन खत्म हो गया था । स्पेसआईएल और इजÞराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) द्वारा निर्मित एक इजÞराइली अंतरिक्ष यान भी इस साल की शुरुआत में चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था । २०२० में चंद्रयान–२ मिशन में एक ऑर्बिटर को सफलतापूर्वक तैनात करने के बाद भारत का अंतरिक्ष उद्योग इस मिशन से मुक्ति की तलाश से, लैंडर और रोवर को उतारने में सफल हुए । चंद्रयान–२ मिशन को स्थायी रूप से छाया वाले चंद्रमा के क्रेटर का अध्ययन करने के लिए डिजÞाइन किया गया था । ऐसा माना जाता है कि इसमें पानी का भंडार है जिसकी पुष्टि २००८ के पहले चंद्रयान–१ मिशन से हुई थी – जिसने चंद्रमा की कक्षा तो ली लेकिन उतरा नहीं ।
इस बार सब योजना के अनुसार हुआ, चंद्रयान –३ में २–मीटर (६ ।५–फुट) लंबा लैंडर शामिल है जिसे चंद्रमा के पास एक रोवर तैनात करने के लिए डिजÞाइन किया गया है । दक्षिणी ध्र‘व जहां पानी की बर्फ पाई गई है । उम्मीद है कि प्रयोगों की एक श्रृंखला चलाने के बाद रोवर दो सप्ताह तक कार्यशील रहेगा । चंद्रयान–३ का लैंडर और रोवर चांद की सतह पर उतरने के बाद अपने मिशन का अंजाम देने के लिए सौर्य ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा । चांद पर १४ दिन तक दिन और अगले १४ दिन तक रात रहती है, अगर चंद्रयान ऐसे वक्त में चांद पर उतरेगा जब वहां रात हो तो वह काम नहीं कर पाएगा । इसरो सभी चीजों की गणना करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है कि २३ अगस्त से चांद के दक्षिणी ध्र‘व सूरज की रौशनी उपलब्रहेगी ।

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इसरो सभी चीजों की गणना करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है कि २३ अगस्त से चांद के दक्षिणी ध्र‘व सूरज की रौशनी उपलब्रहेगी । वहां रात्रि के १४ दिन की अवधि २२ अगस्त को समाप्त हो रही है । २३ अगस्त से ५ सितंबर के बीच दक्षिणी ध्र‘व पर धूप निकलेगी, जिसकी मदद से चंद्रयान का रोवर चार्ज हो सकेगा और अपने मिशन को अंजाम देगा ।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा निजी अंतरिक्ष प्रक्षेपण और संबंधित उपग्रह–आधारित व्यवसायों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतियों की घोषणा के बाद से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा लॉन्च देश का पहला बड़ा मिशन है । २०२० के बाद से, जब भारत निजी लॉन्च के लिए खुला, अंतरिक्ष स्टार्ट–अप की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है । भारत ने, हाल के वर्षों में, खुद को वाणिज्यिक अंतरिक्ष संचालन के एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में मजबूत किया है, जिसमें नवंबर २०२२ में प्रारंभ नामक मिशन के हिस्से के रूप में अपने पहले निजी तौर पर विकसित रॉकेट, विक्रम–एस का प्रक्षेपण भी शामिल है, जिसका अर्थ है शुरुआत ।
भारत चाहता है कि उसकी अंतरिक्ष कंपनियां अगले दशक के भीतर वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में अपनी हिस्सेदारी पांच गुना बढ़ा लें, जो २०२० में राजस्व के मामले में २ प्रतिशत से अधिक है । भारत छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने में अनुभवी है और इस बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है । खुद को उपग्रह प्रक्षेपण सुविधा के रूप में पेश करना है, भारत ने यूके स्थित उपग्रह कंपनी वनवेब के लिए घट इंटरनेट उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है । “भारत अंतरिक्ष को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखता है और इसका लक्ष्य बाहरी अंतरिक्ष में अग्रणी खिलाडि़यों में से एक बनना है ।” “यह भारत के लिए इस उद्योग में अग्रणी बनने का अवसर हो सकता है ।”
सांप और साधुओं का देश कहा जाने वाला भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी में दुनिया के ताकतवर देशों के साथ खड़ा है । भारत चंद्रयान–३ मिशन के साथ चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया है । चंद्रयान–३ अंतरिक्ष यान का रोवर चांद की सतह का अध्ययन करेगा और यह लैंडर के अंदर बैठकर गया है । लैंडर के मिशन की पूरी अवधि एक चंद्र दिवस की रहने वाली है, जो पृथ्वी के १४ दिन के बराबर है । पिछली बार क्रैश लैंडिंग हुई थी । पर इस बार अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद की सतह पर लैंड करने वाला चौथा देश बन गया है । ‘स्पेस के क्षेत्र में हमारी विशेषज्ञता में जबर्दस्त इजाफा हुआ है । भारत के चंद्रयान–३ को सॉफ्ट लैंडिंग में सफलता से भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश तो बना ही है साथ ही दक्षिणी ध्र‘व के इलाके में लैंडिंग कराने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है ।

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