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भारत के साथ हुए बीपा समझौते को नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

 

काठमाण्डू/प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई के हाल ही संपन्न भारत भ्रमण के दौरान किए गए निवेश प्रवर्धन और संरक्षण (बीपा) समझौते को नेपाल की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी गई है। इस समझौते को असमान और राष्ट्रघाती बताते हुए वामपन्थी अधिवक्ता बालकृष्ण न्यौपाने ने कल ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस समझौते के लागू करने पर अन्तरिम रोक लगाने और इस समझौते को खारिज करने की मांग की है।

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याचिकाकर्ता का कहना है कि भारत के साथ किए गए बीपा समझौते में कई ऐसी धाराएं हैं जिनसे नेपाल को घाटा होने वाला है। इस समझौते को नेपाल के अन्तरिम संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए पूरे समझौते को ही गैरसंवैधानिक होने का दावा भी याचिका में किया गया है।

याचिकाकर्ता ने अपने रिट में कहा है कि समझौते के परिभाषा में भारत के हवाई क्षेत्र को भी समेटा गया है जबकि नेपाल के बारे में ऐसा कुछ भी नहीं लिखे होने के कारण यह सन्धि असमान है। रिट में याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि जिस तरह से अंग्रेजों की इष्ट इंडिया कंपनी ने भारत में व्यापार के लिए समझौता कर बाद में पूरे देश पर ही कब्जा कर लिया वैसा ही इस समझौते के बाद नेपाल का भी हश्र होने वाला है।

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इस सन्धि से नेपाल में भारतीय निवेश के उद्योग और कल कारखानों को तो संरक्षण मिलेगा और सरकार के तरफ से इन उद्योगों में होने वाले नुकसान की भरपाई की भी बात की गई है लेकिन नेपाली उद्योगों के बारे में कुछ भी नहीं उल्लेख होने की वजह से इस संधि से नेपाल के उद्योग धंधे निरूत्साहित होंगे।nepalkikhabar.com

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