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छठ का तीसरा दिन, अस्त होते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य

 

काठमांडू, ३ मंसिर  काठमांडू, ३ मंसिर –छठ लोक आस्था का पर्व । लोक आस्था तो इससे ही दिखता है कि इस पर्व में डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है । उगते सूर्य को प्रणाम करना दैनिकी है लेकिन यह विश्वास कि डूबते को भी अर्घ्य दें ये हिन्दू धर्म का संस्कार है ।
आज छठ का तीसरा दिन शाम के अर्घ्य के लिए प्रसाद की तैयारी एवं नदी किनारे पहुँच कर लोग डूबते सूर्य को अर्घ देते हैं । जिसे सँझिया अर्घ के नाम से भी जाना जाता है । आज छठ का सबसे प्रमुख दिन है । कल सुबह उगते सूर्य का अघर््य देने के बाद ही छठ पूजा की समाप्ति होगी । महा आस्था का पर्व, विश्वास का पर्व, प्रकृति को साथ लेकर चलने का पर्व, खेती किसानी से अटूट बंधन का पर्व, बांस पात का पर्व, माँ की ममता का पर्व, गंगा घाट का पर्व, जलाशय का पर्व, घर परिवार का पर्व, हर जाति धर्म का पर्व है ये छठ । अब किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं रह गया है छठ में । छठ केवल हिन्दूओं का नहीं रह गया यह पर्व दिन प्रतिदिन एक नए धर्म को अपने साथ जोड़ रहा है । यह पर्व नेपाल में केवल मधेशी या तराईबासी का नहीं रह गया यह पर्व अब पहाड़ी मूल के लोग भी बहुत आस्था के साथ मना रहे हैं । ऐसे ही इस पर्व को लोक आस्था का पर्व नहीं कहा गया है । कल तक केवल तराई में मनाए जाने वाला यह महान पर्व अब काठमांडू के हर मोहल्ले में देखने को मिल जाता है ।
आज अस्त होते सूर्य को अर्घ देने के लिए  राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के साथ ही अन्य विशिष्ठ व्यक्ति कुपण्डोल स्थित छठ पूजा स्थल में जाने का कार्यक्रम है ।
राजधानी के गौरीघाट, कमलपोखरी, विष्णुमती, नख्खु, गहनापोखरी, कुपण्डोल के साथ ही काठमांडू के २१ स्थानों में पूजा स्थल का निर्माण किया गया है ।

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