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मोदी का संवेदनात्मक संबोधन

 

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कुमार सच्चिदानन्द सिंहभारत–नेपाल के बीच सद्भावना यात्रा के रूप में परिवर्तित हो रही नरेन्द्र मोदी की मौजूदा यात्रा के दौरान आज उन्होंने नेपाल की व्यवस्थापिका संसद को सम्बोधित किया जिसमें भारत और नेपाल के समाजिक–सांस्कृतिक सम्बन्धों की दुहाई देते हुए भावुकता भरे अन्दाज में भारत के प्रति अविश्वास का भाव समाप्त करने का आग्रह किया और यह अभिव्यक्ति दी कि नेपाल पर्याप्त संभावनाओं का देश है, आवश्यकता है इसके संसाधनों का समुचित दोहन की । इसके आधार पर यह समृद्ध देश हो सकता है । पर्यटन, जलस्रोत, आयुर्वेदिक औषधियों के क्षेत्र में यहाँ पर्याप्त संभावनाएँ हैं । इस क्षेत्र में विकास के द्वारा यह समृद्धि के पथ पर अग्रसर हो सकता हैै । अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि हमारे सम्बन्ध कागज की कश्तियों में आगे नहीं बढ़े हैं, ये दिल की दास्तान कहते हैं । भारत और नेपाल के रिश्तों की अहमियत को संकेतित करते हुए उन्होंने यह कहा कि भारत ने ऐसी कोई लड़ाई नहीं जीती जिसमें नेपालियों का रक्त नहीं बहा । संविधान–निर्माण की दृष्टि से उन्होंने कहा कि आज समस्त विश्व नेपाल की ओर देख रहा है । अगर नेपाल में संविधान बनता है और शांति प्रक्रिया सफल होती है तो सम्पूर्ण विश्व के लिए संदेश होगा कि द्वन्द्व और संघर्ष का मार्ग अन्तिम नहीं है, शांति और संविधान के द्वारा भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है । इस दृष्टि से नेपाल युद्ध से बुद्धत्व की ओर अग्रसर हुआ है और यह अनुकरणीय है । लेकिन संविधान निर्माण के लिए उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि संविधान ऐसा होना चाहिए कि देश के हर तबके के लोग इसमें अपना सम्मान और स्वाभिमान ढूँढ सके । उन्होंने कहा कि संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र के द्वारा भी जनता की अपेक्षाओं को पूरी की जा सकती है और समावेशी संविधान आदर्श हो सकता है । इसके साथ ही उन्होंने एक और महत्वपूर्ण बात कही कि संविधान निर्माताओं की दृष्टि ऋषियों की तरह होनी चाहिए जिसमें ‘सर्वजन हिताय’ की भावना हो । नेपाल के प्रति भारतीय नीति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल एक संप्रभु देश है और उसे दिशा देना हमारा काम नहीं है लेकिन हम हिमालय की तरह एक सम्मुन्नत नेपाल देखना चाहते हैं । नेपाल के सन्दर्भ में अपनी महत्वाकांक्षा भी उन्होंने संकेत दिया कि नेपाल सिर्फ बिजली बेचकर समृद्ध हो सकता है औरु उसके द्वारा उत्पादित और उसकी आवश्यकता से अधिक सारी बिजली खरीदने के लिए भारत तैयार है । इसके अतिरिक्त उन्होंने यातायात, सूचना तकनीक और प्रसारण लाइन के क्षेत्र में नेपाल को सहयोग की प्रतिबद्धता जतलायी । दस हजार करोड़ नेपाली रुपए के सहयोग के साथ–साथ उन्होंने नेपाल के लिए विद्युत की दूनी आपूर्ति की बात कही । लेकिन इस आशा के साथ कि अभी मैं नेपाल का अँधेरा दूर करुँगा और आगामी दस वर्षों बाद नेपाल अपनी ऊर्जा से भारत का अँधेरा दूर करेगा । अपने इस सम्बोधन में मोदी ने सदाशयता परिचय तो दिया, अब बारी नेपाल की है ।

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