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आरती साह प्रकरण : परिवार और सरकार के बीच पांच बिंदुओं पर सहमति

 

काठमांडू.13 मार्च

 

लंबे समय से आंदोलन कर रहे आरती साह के परिवार और सरकार के बीच पांच बिंदुओं पर सहमति बनी है.

जनकपुर उपमहानगरपालिका -9, थापाचोक की 22 वर्षीय आरती शाह की मौत की आगे की जांच करने और प्राप्त साक्ष्य अदालत में जमा करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) टीम को तैनात करने पर सहमति हुई है।

उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री रवि लामिछाने ने पीड़ित परिवारों से बातचीत के लिए गृह मंत्रालय को बुलाया. मंत्रालय के अनुसार, लंबित मामले पर विचार करने के बाद प्राप्त अतिरिक्त साक्ष्य को अदालत में प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त जांच का जिम्मा सीआईबी को सौंपने पर सहमति बनी है।

समझौते के मुताबिक, जांच टीम परिवार के साथ समन्वय करेगी और काम शुरू करने के 45 दिनों के भीतर 4 मामलों की जांच करेगी. जिसके मुताबिक, कहा गया है कि मौत से जुड़े मामले की कमियों की जांच करना और पुलिस द्वारा परिवार की पिटाई और दुर्व्यवहार की जांच भी की जाएगी ।

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बताया जा रहा है कि इस मामले पर नेपाल मेडिकल काउंसिल और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में उल्लिखित विषयों का अध्ययन किया जाएगा. बताया जा रहा है कि घटना को लेकर तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट का भी अध्ययन किया जाएगा.

इससे मिले साक्ष्यों के आधार पर कहा गया है कि दोबारा कानून के मुताबिक मुकदमा चलाया जाएगा. यह भी कहा गया है कि गृह मंत्रालय साहा के परिवार को राहत के तौर पर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करेगा। इसके साथ ही परिवार की ओर से विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम भी बंद कर दिया जाएगा.

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परिवार की ओर से निर्मला देवी साह, भाई प्रेम साह और चाचा संतोष कुमार साह ने समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं.

जनकपुरधाम उप-महानगरपालिका-9, थापाचोक की आरती साह 7 गते जेष्ठ को अपने घर में मृत पाई गईं थी ।

जनकपुरधार के काव्या अस्पताल ले जाने के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी कि आरती ने आत्महत्या कर ली है. इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू की.

घटना से दो साल पहले उसकी शादी मोतीबाबू साह से हुई थी. मायके पक्ष के दावे के मुताबिक, शादी में उन्हें दहेज के साथ-साथ 25 लाख रुपये भी दिए गए थे.

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लेकिन परिजनों का आरोप है कि मौत से कुछ महीने पहले कम दहेज की बात कह कर आरती को घर में प्रताड़ित किया जाता था।

इस मामले में पुलिस ने उसके पति मोती बाबू और ससुर मदन मोहन को गिरफ्तार कर लिया है और मौत से जुड़े अपराध की जांच शुरू कर दी थी । जिला अदालत ने उन्हें 5 गते को जेल भेज दिया था ।

लेकिन जनकपुरधाम उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि तत्काल प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर दोनों को हिरासत में लेने की कोई आवश्यकता नहीं है ।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने ऊपरी अदालत के आदेश को पलट दिया और उन्हें दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया ।

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