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6 चैत, काठमांडू।



लेखक और कहानीकार परशु प्रधान का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है । उनका सोमवार रात बाणेश्वर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। प्रधान का पार्थिव शरीर आज सुबह 9 बजे तक बाणेश्वर के राधामोहन मार्ग-20 पर श्रद्धांजलि के लिए रखा गया है।
परशु प्रधान के बेटे और बारहखरी ऑनलाइन के प्रधान संपादक प्रतीक प्रधान ने जानकारी दी है कि अंतिम संस्कार आज सुबह 9:30 बजे पशुपति आर्यघाट पर होगा. 2000 में भोजपुर में पैदा हुए परशु प्रधान गद्य यानी कहानियां और उपन्यास लिखते थे.
पी.आर. प्रधान की प्रथम रचना,  विस‌ं‍ 2016 में इसे विराटनगर से प्रकाशित छारी में ‘‘हाँसेकी ती चन्द्रमा’ ‘ शीर्षक से प्रकाशित किया गया था.

प्रारंभ में, उन्होंने कविता लिखी, लेकिन अपने पहले कविता संग्रह, जीवनपथ के प्रकाशन के बाद, उन्होंने कविता छोड़ दी और कहानियों को अपनी मुख्य शैली के रूप में अपनाया। उनकी कहानियों के 13 संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।उनका बक्ररेखा, फेरी आक्रमण, यौटा अर्को दन्त्यकथा, असम्बद्ध, समुद्रमा अस्ताउने सूर्य, प्रतिनिधि कथाहरु, यौटा क्रान्तिपुरुषको जन्म, कथा र रचनागर्भ, उत्तरार्ध, द लिटिल बुद्ध इन टोकियो, परशु प्रधानको उत्कृष्ट कथा, नेपलिज लभ स्टोरी और धनिया कथा संग्रह प्रकाशित हैं।

प्रधान ने बाल साहित्य में भी लिखा। उनके बच्चों के कहानी संग्रह जैसे  उनका नानीको कथा, सुनको छाती, रीताको स्कूल अ न्य प्रकाशित हुए हैं।



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