Tue. May 28th, 2024



काठमांडू, वैशाख ११ – आज नेपाल अपना १८वां लोकतन्त्र दिवस मना रहा है । आज विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया है । विसं २०६३ वैशाख ११ गते तत्कालीन राजा ज्ञानेन्द्र ने आन्दोलनरत दल की मांग अनुसार विसं २०५९ जेठ ८ गते विघटन हुए संसद् की पुनःस्थापना की थी । जनता ने विजय हासिल की । इस अवसर में विसं २०६४ से देशभर में लोकतन्त्र दिवस मनाया जाता रहा है ।
तत्कालीन राजा ज्ञानेन्द्र ने उस समय लोकेन्द्रबहादुर चन्द, सूर्यबहादुर थापा और शेरबहादुर देउवा करके तीनों को प्रधानमन्त्री बनाया और हटाया । विसं २०६१ माघ १९ गते ज्ञानेन्द्र ने शासन सत्ता को अपने हाथ में ले लिया । इसके बाद आन्दोलनरत सात दल और तत्कालीन सशस्त्र युद्धरत नेकपा (माओवादी)के बीच १२ बुँदे समझदारी हुई ।
विसं २०६२ मंसिर में १२ बुँदे समझदारी के माध्यम से तीन ध्रुव में विभाजन हुई राजनीतिक शक्ति दो ध्रुव में आई और उसके बाद आन्दोलन ने गति ले लिया । विसं २०६२ फागुन से लेकर पूर्वप्रधानमन्त्री एवं नेपाली कांग्रेस के तत्कालीन सभापति गिरिजाप्रसाद कोइराला के नेतृत्व में शुरु हुए निर्णायक आन्दोलन ने चैत में गति ले ली ।

नयाँ वर्ष के साथ ही लाखों जनता सड़क में उतर आए । चक्रपथ जनता से भरने और उग्र रुप लेने के बाद राजा ज्ञानेन्द्र राजनीतिक दलों के मार्गचित्र में सहमत हुए । आन्दोलनरत दल द्वारा किए गए मसौदा के आधार में राजा ज्ञानेन्द्र ने वैशाख ११ गते की रात संसद् पुनःस्थापना की घोषणा की और बैठक का भी आह्वान किया । इसलिए इस दिन को लोकतन्त्र दिवस कहा गया ।
विसं २०६३ जेठ ४ गते को संसद् ने राजदरबार के अधिकार में कटौती कर दी तथा राजसंस्था को निलम्बन किया । बैठक ने माओवादी को शान्ति प्रक्रिया में लाकर संविधान सभा निर्वाचन करने का संकल्प प्रस्ताव पारित किया था । इसी के आधार में विसं २०६४ चैत २८ गते पहली संविधानसभा निर्वाचन हुई । संविधानसभा के २०६५ जेठ १५ गते हुई पहली बैठक ने २४० वर्ष के राजसंस्था का विधिवत् अन्त किया ।
विसं २०७० मंसिर ४ गते सम्पन्न दूसरे संविधानसभा निर्वाचन से निर्वाचित सभा ने २०७२ असोज ३ गते संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल का संविधान जारी किया । संविधान अनुसार दो बार तीनों तह का निर्वाचन सम्पन्न हुआ है ।
जिसके अनुसार संघीय, प्रादेशिक और स्थानीय सरकार ने शासन सञ्चालन किया । इस परिवर्तन को प्रवेशद्वार मानकर वैशाख ११ गते को लोकतन्त्र दिवस के रुप में मनाया जाता रहा है ।

 



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