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छानबीन के लिए सरकार तैयार, संसद होगी सुचारु

 

काठमांडू, जेठ ६ – लगातार संसद में हो रहे अवरोध का आज से अंत होने के असार नजर आ रहे हैं । आज से संसद की बैठक में अवरोध नहीं होनी चाहिए क्योंकि सरकार ने कांगे्रस की जो मांग थी उसे स्वीकार कर लिया है ।
लगातार संसद अवरोध के कारण सरकार अपना कोई भी प्रस्ताव पेश नहीं कर पा रही थी । इस बात को लेकर सत्तारुढ़ दल किसी भी तरह एक ठोस निर्णय पर पहुँचना चाहते थे । प्रत्येक दिन संसद अवरोध, प्रत्येक दिन सभी दलों की बैठक लेकिन निर्णय कुछ भी निकल कर बाहर नहीं आ पा रही थी । कांग्रेस ने एक अड़ान ले रखी थी कि तबतक संसदीय छानबीन समिति नहीं बनेगी संसद नहीं चलने देंगे । तो अन्ततः सरकार इसके लिए मान गई ।
संसद् अवरुद्ध होने की वजह से जेठ १५ गते बजट प्रस्तुत करने का कार्यक्रम भी प्रभावित हो सकती है इसलिए सरकार एमाले के नेतृत्वमा छानबीन समिति गठन करने के लिए शनिवार को हुई बैठक में राजी हुई है ।
एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली, प्रधानमन्त्री एवं माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष एवं गृहमन्त्री लामिछाने बीच शनिवार को हुए चर्चा के बाद सरकार विपक्षी दल के मांग को संबोधन करने के लिए तैयार हुई है । सरकार ने छानबीन समिति बनाने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है । इसी के साथ ही संसद अवरोध का अंत हुआ ।
सत्तारूढ़ प्रमुख तीन दलों के बीच हुई चर्चा के बाद कल अपराह्न प्रधानमन्त्री के सरकारी निवास बालुवाटार में भी सत्तारूढ़ दल और प्रतिपक्षी दलों के बीच बैठक हुई । जिसमें यह निर्णय लिया गया कि संसदीय छानबीन समिति बनेगी ।
कांग्रेस के नेता शनिवार की सुबह भी प्रधानमंत्री से मिले थे । उन्होंने इस मुलाकात को सकारात्मक ढ़ंग से लिया था । इसके बाद ही प्रधानमंत्री ने यह संकेत दिया कि रविवार से संसद चलेगी ।
सत्ता पक्ष के साथ हुई बैठक में कांग्रेस के महामन्त्री गगनकुमार थापा और प्रमुख सचेतक रमेश लेखक भी सहभागी थे । संसदीय छानबिन समिति की कार्यविधि (टिओआर) तैयार करने में कानून मंत्री पदम गिरी के नेतृत्व में चार सदस्यीय कार्यदल बनाई गई है । जिसमें एमाले से प्रमुख सचेतक महेश बर्तोला, कांग्रेस से जीवन परियार और रास्वपा से शिशिर खनाल हैं । दोनों पक्ष के बीच हुई यह बैठक लगभग ३ घंटे चली थी । शायद आज शाम तक ही संसदीय छानबीन समिति बन जाएगी ।
इसके बाद गृहमन्त्री रवि लामिछाने को नैतिक रूप से मन्त्रालय संभालने में समस्या आ सकती है । क्योंकि उनका नाम बार बार सहकारी घोखाघड़ी मामले में लिया जा रहा है । संसदीय छानबीन समिति बनने के बाद नैतिक रूप में गृह मन्त्रालय छोड़ने के लिए उनपर दबाब डाला जाएगा ।
इससे पहले संसदीय छानबीन समिति गठन के विषय को लेकर प्रतिनिधिसभा की गुरुवार को हुई बैठक में सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष के बीच झड़प भी हो गई थी । इस घटना के बाद सत्ता और प्रतिपक्षी दोनों गंभीर रुप से सोचने के लिए बाध्य हुए । फलतः शनिवार सत्ता पक्ष प्रतिपक्ष के मांग अनुसार संसदीय छानबीन समिति बनाने के लिए तैयार हुए हैं ।

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