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जेएनयू JNU के प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप

 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू JNU) के प्रो. प्रियदर्शी मुखर्जी (Prof. Priyadarsi Mukherji) जो चीनी और दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र (CCSEAS) के प्रोफेसर है उनपर जेएनयू की 22 वर्षीय छात्रा ने यौन उत्पीड़न का गम्भीर आरोप लगाया है। छात्रा ने 10 अप्रैल को इस संबंध में विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद नौ अन्य छात्राओं ने भी उसके मुद्दे का समर्थन करते हुए शिकायत की और आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने उनके साथ भी यौन उत्पीड़न किया है।

जेएनयू में नेपाल के छात्र बहुसंख्यक रूप से पढ़ाई करते है, इस संबंध में नेपाल की छात्राओं ने “हिमालिनी” से अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि प्रो. प्रियदर्शी मुखर्जी ने उन सभी छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न का प्रयास किया और शिकायत करने पर यूनिवर्सिटी से निकलवा देने की धमकी दी।

एक अन्य छात्रा ने बताया कि उक्त प्रोफेसर ने उसकी सहेली जिसने आईसीसी में शिकायत की है को अपने केबिन में बुलाया और बिना सहमति के उसे गले लगा लिया। फिर वह उनसे उन फिल्मों पर बात करने लगे जो बेहद अश्लील थी। वह उसे मैसेज करता रहता था। एक बार, उसने रात 1 बजे चीनी भाषा में एक भद्दी कविता भेजी। वह उससे लगातार पूछता था कि क्या वह किसी रिश्ते में है। उससे आहत होकर छात्रा ने कक्षा में जाना बंद कर दिया।

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू JNUSU) ने शिक्षक को निलंबित करने की मांग की और विश्वविद्यालय पैनल से जांच कार्यवाही में तेजी लाने का आग्रह किया।

छात्र संगठन (जेएनयूएसयू) ने कहा कि प्रोफेसर ने लगातार संदेशों और कॉलों के माध्यम से पीड़िता को परेशान किया है, जिसमें अश्लील कविताएं, “व्यक्तिगत मिलन” के लिए अनुरोध भी शामिल है। प्रोफेसर ने महिला छात्रा को परीक्षा में फेल कराने की धमकी दी है। उक्त प्रोफेसर ने इसके बाद अन्य महिला छात्रों को परेशान करना शुरू कर दिया ताकि पीड़िता के ठिकाने के बारे में पता चल सके।

शिकायतकर्ताओं ने कहा कि प्रोफेसर अपने खिलाफ गंभीर आरोपों के बावजूद कक्षाएं लेना जारी रखे हुए हैं।

जेएनयूएसयू ने आरोप लगाया कि ICC ने शिक्षक के खिलाफ कक्षाएं लेने से रोकने वाला कोई आदेश जारी नहीं किया, इससे ये साबित होता है कि ICC पक्षपात कर रहा है। विश्वविद्यालय अधिकारियों द्वारा लगातार उत्पीड़न और निष्क्रियता के कारण छात्रा को परिसर छोड़ने और अपने गृहनगर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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छात्राओं ने पुलिस में एफआईआर की भी नाकाम कोशिश की। मामला डीसीपी तक ईमेल से भेजा गया, मगर
आज तक एफआईआर नहीं हुई।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने कहा कि मामला आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के पास है जो इसे स्वतंत्र रूप से संभाल रही है। विश्वविद्यालय पैनल के एक सदस्य ने कहा कि वे “सभी मामलों में जांच कराने की प्रक्रिया” में हैं।

गौरतलब है कि 2017 में भी एक सेंटर फैकल्टी ने प्रो. प्रियदर्शी मुखर्जी पर केस किया था, लेकिन इनको आजतक कोई सजा नहीं हुई। सेंटर के सारे पूर्व छात्र इनके चरित्र के बारे में जानते हैं और कुछ ग्रुप में चर्चा भी हुई है, लेकिन ऐसा लगता है की इनको यूनिवर्सिटी एडमिन से सुरक्षा मिल रही है। जबकी आज यूनिवर्सिटी में सेंटर के हेड (चेयरपर्सन), स्कूल के डीन और यूनिवर्सिटी की वीसी तीनो महिला हैं।

सवाल ये उठता है, क्या कारण है कि ऐसे प्रोफेसर जिनके बारे में सब जानते हैं, मगर कोई कार्रवाई नहीं होती, उन्हें सुरक्षा दी जाती है ? जेनयू जैसी प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी जहां महिला सशक्तीकरण की बड़ी बड़ी बातें होती हैं, फेमिनिस्ट समूहों को बड़ावा देने वाली महिला प्रोफेसर भी बहुत है, लेकिन अपनी ही यूनिवर्सिटी में होने वाली महिला उत्पीड़न पर चुप्पी साथ बैठी रहती है? ऐसे प्रोफेसरों पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाय, पीड़ित को दोषी ठहराना और उनका बहिष्कार किया जाता है। पीड़ित का अकादमिक करियर एक अजीब से इको-सिस्टम के चलते खराब कर दिया जाता है, और ऐसे प्रोफेसर अपनी नौकरी और मनमौजी करते रहते हैं। गौरतलब बात ये है कि ये यूनिवर्सिटी का पहला मामला नहीं है। मगर यूनिवर्सिटी प्रशासन कोई करवाही ना करके, ऐसे मामले में आरोपी प्रोफेसर को लंबी छुट्टी देकर, मामला रफा-दफा कर देता है।

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सुत्रो से पता चला है कि इस मामले में भी प्रोफेसर को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। क्या ये मामला भी सिर्फ अखबार की सुरखी बनके दब जाएगा? क्या छात्रा को न्याय मिलेगा? या फिर से यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा के चलते इस मामले को भी दबाया जाएगा?

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