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नेपाल को पर्यटकीय ‘हब’के रूप में विकास करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध– नारायणकाजी श्रेष्ठ

 

काठमांडू, जेठ २१– उपप्रधान तथा परराष्ट्रमन्त्री नारायणकाजी श्रेष्ठ ने कहा है कि नेपाल को पर्यटकीय ‘हब’के रूप में विकास करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है । ७४ वां अन्नपूर्ण दिवस के अवसर में परराष्ट्र मन्त्रालय और नेपाल पर्यटन बोर्ड, गण्डकी प्रदेश कार्यालय द्वारा विभिन्न देश के राजदूत तथा कूटनीतिक नियोग के प्रतिनिधियों का स्वागत के लिए पोखरा में रविवार को आयोजित रात्रि भोज में उन्होंने यह बात कही ।
आगामी वर्ष १६ लाख पर्यटक को लाना है । इस लक्ष्य को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार नए पर्यटकीय गन्तव्य की पहचान और प्रवर्द्धन में लगी है । ‘नया गन्तव्य स्थल और पदमार्ग की पहचान के साथ ही पर्यटकीय सर्किट विकास करने की भी सरकार योजना बना रही है । उपप्रधानमन्त्री श्रेष्ठ ने कहा कि ‘प्रकृति, संस्कृति, परम्परा, भौगोलिक विविधता आदि हमारी पर्यटकीय धरोहर है ।’ उन्होंने राजदूत और कूटनीतिक नियोग के प्रतिनिधियों को अपने समुदाय और देश में नेपाल के पर्यटन को लेकर प्रचार प्रसार कर देने का भी आग्रह किया ।
‘अतिथि देवो भवः’के आदर्श वाक्य को उद्धृत करते उपप्रधानमन्त्री श्रेष्ठ ने कहा कि हम नेपाली आतिथ्य संस्कार को लेकर ही विश्वभर में पहचाने जाते हैं । सिद्धार्थ गौतम बुद्ध की जन्मस्थल लुम्बिनी, विश्व के ही सबसे ऊँची शिखर सगरमाथा के साथ ही अनेकों प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक सम्पदा को देखने के लिए विश्वभर के पर्यटकों को नेपाल आने का आग्रह किया ।
उपप्रधानमन्त्री श्रेष्ठ ने बताया कि पर्यटकीय राजधानी पोखरा भी साहसिक पर्यटन गतिविधि में उतना ही महत्त्वपूर्ण गन्तव्य के रूप में विकसित हो रहा है । उन्होंने ध्यान, योग तथा आध्यात्मिक पर्यटन के माध्यम से पोखरा को थोड़ा और विकास करना होगा । अन्नपूर्ण दिवस के अवसर में रविवार को ही विभिन्न देश के राजदूत तथा कूटनीतिक नियोग के प्रतिनिधि ने कास्की के धम्पुस से लेकर अस्ताम थक की पदयात्रा की ।
विश्व में पहली बार आठ हजार मीटर से ज्यादा ऊँचे हिमाल आरोहण की स्मरण में उक्त पदयात्रा का आयोजना किया गया था । सन् १९५० जुन ३ में फ्रान्सेली आरोही मौरिस हर्जोग और लुई लाशनाल ने आठ हजार ४१ मिटर ऊँचे अन्नपूर्ण प्रथम हिमाल का आरोहण किया था । उसी दिन को याद कर प्रत्येक वर्ष यह अन्नपूर्ण दिवस मनाई जाती है ।

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