चीन की टालमटाेल की नीति से तंग आकर, अरनिको हाइवे का काम अब सरकार स्वयं करेगी
काठमांडू:25 जुलाइ
माना जाता है कि नेपाल-चीन की बहुत निकटता है । चीन भी इस बात पर हमेशा जोर देता है कि वह नेपाल का सच्चा मित्र है । किन्तु जब वादा पूरा करने का समय आता है तो चीन की तरफ से निराशा ही हाथ लगती है । चीन हमेशा से अपना स्वार्थ सिझ करना चाहता है । दोस्ती के तमाम दावे करने वाला चीन जब बात पैसा खर्च करने की होती है तो वह टाल मटोल करने लगता है। चीन की सरकार पिछले 9 साल से वादा करने के बाद भी अरनिको हाइवे पूरा करने के लिए वित्तीय और तकनीकी मदद नहीं दे रही थी। इस हाल मे केपी ओली सरकार ने चीन को कड़ा संदेश देते हुए खुद ही इस हाइवे प्रॉजेक्ट को पूरा करने का फैसला किया है। नेपाल के एक सांसद और कई अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है। चीन यह भी चाहता है कि नेपाल बीआरआई प्रॉजेक्ट को मंजूरी दे लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई फैसला नहीं हो सका है। इससे भी चीन नेपाल की सरकार से खुश नहीं है।
साल 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति राम बरन यादव की यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 16 अरब नेपाली रुपये देने का वादा किया था ताकि 115 किमी लंबे अरनिको हाइवे को अपग्रेड किया जा सके और ट्रांसपोर्ट ढांचा बनाया जा सके। यही वह हाइवे है जो नेपाल को चीन से जोड़ता है। सांसद माधव सापकोटा ने कहा कि चीन हर साल यह वादा करता है कि वह यह मदद देगा लेकिन कई बार फोन पर और बैठकों में अनुरोध करने के बाद भी बीजिंग की ओर से कोई मदद नहीं आ रही है।
सापकोटा ने कहा कि चूंकि चीन की सरकार पैसा नहीं दे रही है, ऐसे में हमने अपने बजट से 3.6 अरब रुपये का आवंटन किया है ताकि इस 26 किमी लंबे हाइवे की मरम्मत की जा सके। नेपाल को भूस्खलन से बचाया जा सके। अरनिको को कोदारी हाइवे के नाम से भी जाना जाता है। इस हाइवे को 1960 के दशक में चीन की सरकार ने ही बनाया था। इस हाइवे के कई हिस्से साल 2015 में आए भूकंप में खराब हो गए हैं। उन्होंने बताया कि मैंने पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड से बात की तो उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से फोन पर दो बार बात की। इसके अलावा चीन के वित्त मंत्रालय और दूतावास से भी कहा गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

