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एनपीएल फाइनल –जनकपुर और सुदूरपश्चिम आमने सामने

 

काठमांडू, पुष ६ । नेपाल में पिछले तीन सप्ताह से एनपीएल का जादू चल रहा है । जादू पूरे नेपाल को जोड़ने का था । सभी स्थानीय क्रिकेट खिलाडि़यों का जलवा दिखाने का था । स्थानीय खिलाडि़यों के साथ ही साथ विदेशी खिलाडि़यों को नेपाल की भूमी का दर्शन कराना भी था । नेपाल की संस्कृति, नेपाल की सभ्यता को दर्शाना भी था । एनपीइल ने अपनी बहुत अच्छी तरह से यह भूमिका निभाई है । पिछले तीन सप्ताह से नेपाली खेलकूद का सबसे ज्यादा चर्चित प्रतियोगिता के रुप में आए नेपाल प्रीमियर लीग (एनपीएल) का फाइनल आज होने जा रहा है । आज ट्रॉफी के लिए मधेस प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही जनकपुर बोल्ट्स और सुदूरपश्चिम के सुदूरपश्चिम रोयल्स बीच मुकाबला होने जा रहा है ।
प्रतियोगिता के लीग चरण से दोनों ही टीम चुनी गई है जनकपुर और सुदूरपश्चिम । लीग चरण में सात खेल में से केवल एक ही खेल में हार को देखने वाली सुदूरपश्चिम १२ अंक सहित शीर्ष स्थान हासिल किया था । इसी तरह दूसरे स्थान में रहे जनकपुर को ७ खेल में से दो में हार का सामना करना पड़ा । १० अंक के साथ वा फाइनल में पहुँची है ।
कप्तान दीपेन्द्र की कप्तानी में खेल रही सुदूरपश्चिम को एक मजबूत टीम के रुप में देखा जा रहा है । उसकी गेंदबाजी, बल्लेबाजी तथा फील्डिंग तीनों ही क्षेत्र में सन्तुलन दिखता है । साथ ही साथ सुदूरपश्चिम के बहुत समर्थक भी हैं ।
सुदूरपश्चिम के कप्तान दीपेन्द्र ने कहा है कि “ इससे पहले के सभी खेल को हमने अच्छे तरीके से खेला है । हमारी तैयारी अच्छी है । हम फाइनल के लिए तैयार हैं । रही बात जनकपुर की तो उनकी भी अच्छी टीम है । फाइनल के पूर्वसन्ध्या में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में सुदूरपश्चिम के कप्तान दीपेन्द्र ने कहा कि “जैसे लीग के हमने खेला था वैसे ही खेलेंगे । बहुत ज्याद नहीं सोचा है लेकिन अपना शतप्रतिशत देंगे ।”
जनकपुर बोल्ट्स के आसिफ ने कहा कि हम बदला लेने में विश्वास नहीं करते । जनकपुर का ध्यान बदला से भी ज्यादा स्तरीय क्रिकेट प्रस्तुत करने में है । जब हम मैदान से निकले तो महसूस हो कि हमने अपना प्रयास किया । जनकपुर के बारे में कहा जा रहा है कि वह बहुत ज्यादा विदेशी खिलाड़ी पर आश्रित है । जनकपुर को अपनी बल्लेबाजी तथा गेंदबाजी में बहुत सुधार करना है और संभल कर खेलना है ।
जीत चाहे किसी की भी हो । जीत नेपाल की ही होगी । लेकिन अपनी माटी से सभी को प्यार होता है । सुदूरपश्चिम के लोगों के लिए यह टीम ही जीते ये चाहना भी गलत नहीं है । इसी तरह जनकपुर के लोगों की अगर ये चाहत है कि फाइनल जनकपुर ही जीते तो यह भी गलत नहीं है । दोनों में से कोई भी जीते फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि यह केवल प्रदेश की बात नहीं है । ये बात नेपाल की है । नेपाली क्रिकेट जगत की है ।
लेकिन सामाजिक संजाल में जिस तरह से लोग दोनों टीम के लिए लिख या बोल रहे हैं इससे हमारी संकीर्ण मानसिकता दिखती है । एनपीएल के फाइनल में जनकपुर के प्रवेश से पूरे नेपाल को खुश होना चाहिए था लेकिन विभेद ने अपना काम कर दिया है । मधेश और पहाड़ का जो भीतरी रुप है उसे भी दिखा दिया है । युवा जब जनकपुर की टीम जीत रही थी उस वक्त का उनका चेहरा देखने लायक था । और जिस तरह के शब्दों का, जिस तरह का हुटिंगबाजी की गई उससे ऐसा लग रहा था जैसे सच में मधेश प्रदेश या कहे जनकपुर नेपाल का नहीं है ।
ये हम क्या शिक्षा दे रहे हैं अपने युवाओं को अपने बच्चों को कि नेपाल के ही प्रांत आपके अपने ही स्थानीय लोग खेल रहे हैं और आप उनकी हुटिंग कर रहे है । इससे ज्यादा दुर्भाग्य की बात और क्या होगी ? जनकपुर बोल्ट्स का जीतना उन्हें नहीं भी अच्छा लगा फिर भी उन्हें स्वागत करना चाहिए था । इस तरह से ठोक्यों जनकपुर लाई ठोक्यों कहकर हुटिंग नहीं करनी चाहिए थी ।
इतना ही नहीं सामाजिक संजाल के फेसबुक में तो हद ही हो गई । जब खुलकर सुदूरपश्चिम और कर्णाली को लेकर बहुत ही अच्छा लिखा गया लेकिन जनकपुर बोल्ट्स के लिए धोती, इंडियन, बिहारी कहकर लिखा गया । भाग धोती भाग । धोतीहरुको काम छैन । साला धोती हरु बडि़ भुक्यो ।
जबकि इन्हें मालूम ही नहीं है कि इनके पूर्वज भी धोती ही लगाते थे । आज भी श्राद्ध कर्म या पूजापाठ या कोई भी पवित्र कार्य के समय ये लोग भी धोती ही लगाते हैं । स्वयं अपने ही पूर्वजों को गाली देने वालों को क्या कहा जाए ? या ये भी कह सकते हैं कि परिवरिश कैसी है ? कम से कम अभिभावक ये तो अपने बच्चों को सिखाए कि जनकपुर भारत में नहीं जनकपुर नेपाल का ही भाग है वहाँ रहने वाले लोग भारतीय या बिहारी नहीं है वो भी नेपाली ही है ।
न जाने मधेश के लोगों को कब तक उन्हें इस परीक्षा से गुजरना होगा ।
ऐसे बहुत विज्ञों का कहना रहता है कि अगर कोई आपको धोती कहता है तो आपको बुरा क्यों लगता है ? भईया कहता है तो बुरा क्यों लगता है ? इसका जबाव मधेश के लोग देते हैं कि जब उन्हें मालुम है कि यह शब्द हमें बुरा लगता है तो फिर क्यों बार बार बोलकर हमें चिढ़ाते हैं । क्या जनकपुर की टीम नेपाल की नहीं है वो किसी और जगह से आई है । मधेश और मधेशी को छोड़कर शायद ही ऐसा कोई हो जो चाहता हो कि फाइनल में जनकपुर पहुँचे । उनकी चाहत थी कि कर्णाली और सुदूरपश्चिम की टीम बीच फाइनल हो । जनकपुर को तो फाइनल में पहुँचना ही नहीं था वो तो बाई चांस पहुँच गया है । जबकि क्रिकेट प्रशंसक जानते हैं कि पहले पाँच खेल में जनकपुर ने जीत हासिल की है ।

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इन सबके अलावे इस बात की भी चिंता है कि एनपीएल ने विदेशी खिलाडि़यों को भी नेपाल दिखाया है । बहुत बड़ी बात है इस तरह का आयोजन करना । सभी को एक साथ लेकर चलना लेकिन डर इस बात का कि न जाने विदेशी खिलाड़ी अपने साथ किस भावना को लेकर जाएंगे ? उन्हें कैसा लग रहा होगा कि एक ही देश के लोग एक दूसरे के प्रति इस तरह का प्रदर्शन कर रहे हैं ·लेकिन हो सकता है कि ये बातें उनकी सोच से परे हों ।

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कंचना झा
कार्यकारी संपादक
हिमालिनी ऑनलाइन
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