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गाँधी स्मृति संस्थान द्वारा गाँधी पूण्य तिथि पर कार्यक्रमका आयोजन

 

g-4काठमाण्डू,(३०-३१ जनवरी २०१५) गाँधी स्मृति प्रतिष्ठान द्वारा महात्मा गाँधी जी की पूण्य तिथि पर दो-दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया । प्रथम दिन का आयोजन लैनचौर में और दूसरे दिन का आयोजन धुम्बाराही समर्पण एकेडेमी में किया गया । जिसमें भारतीय राजदूत महामहिम रणजीत राय, शिक्षा मंत्री चित्रलेखा यादव, भारत मध्यप्रदेश से आए डा. सुनीलम, ट्रान्सपेरेन्शी इन्टरनेशनल नेपाल के श्री कृष्ण प्रसाद भण्डारी, पूर्व मंत्री गणेश साह, सोच नेपाल के उत्तम निरौला, मजफो नेपाल के श्री रासमहाय यादव, वर्धा(भारत) से आए विद्वान श्री भारत, त्रि.वि.हिन्दी केन्द्रीय विभाग की विभागीय प्रमुख और हिन्दी पत्रिका हिमालिनी की संपादक डा. श्वेता दीप्ति, पूर्व एम.पी कल्याणी शाह, मधेशी जनअधिकार फोरम की श्री मति सीमा सिंह, श्री मति निर्मला, टेली कम्यूनिकेशन लंदन के तुलसी शाही जैसे कई जाने माने गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति थी । कार्यक्रम में भ्रष्टाचार और नारी सशक्तिकरण पर बृहत चर्चा हुई ।

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gandhi-2Gandhi Thought in good governance and anti corruption movement पर भारत से आये आन्ना हजारे के सहयोगी श्री सुनिलम ने मुख्य वक्ता के रुप मे विस्तृत से चर्चा की । गाँधी जी की अवधारणाओं के परिप्रेक्ष्य में इस चर्चा में जो बातें निष्कर्ष के रूप में सामने आईं उसके अनुसार भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए इसकी शुरुआत स्वयं से करनी होगी । कोई कानून तब तक कारगर सिद्ध नहीं हो सकता जब तक हम अपनी आत्मा को शुद्ध नहीं कर लेते । शुद्धता जो हमारे शब्द और हमारी आत्मा को प्रभावित करता है । वही हमें सही राह भी दिखा सकता है । आज का व्यक्ति दिखावे की जिंदगी जी रहा है । जीवन की सादगी समाप्त हो गई है और हम जिस उच्च जीवन की चाहत रखने लगे हैं, वही हमें भ्रष्ट भी बना रहा है । इसलिए अगर हमारा जीवन हमारी पूर्व संस्कृति को ध्यान में रखकर हो तो समाज में और देश में निश्चित तौर पर बदलाव आएगा और यही बदलाव भ्रष्टाचार को भी नियंत्रित करेगा । आवश्यकता पौर्वात्य को अपनाने की है पाश्चात्य की नहीं ।

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g-3गाँधी और नारी सशक्तिकरण (Gandhi and women empowerment) पर त्रि.वि.हिन्दी केन्द्रीय विभाग की विभागीय प्रमुख और हिन्दी पत्रिका हिमालिनी की संपादक डा. श्वेता दीप्ति ने अपना कार्यपत्र प्रस्तुत किया । नारी सशक्तिकरण पर भी सभी वक्ताओं की यह मान्यता रही कि नारी को उचित सम्मान और जगह देकर ही समाज तथा देश का विकास सम्भव है । उसकी महत्वपूर्ण भागीदारी ही परिवार, समाज और देश को बनाता है । वह कोई चीज नहीं है इस मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है । गाँधी जी की भी यही धारणा थी कि नारी सबल हो क्योंकि वही मानव निर्मात्री है । कार्यक्रम का आयोजन अत्यन्त महत्वपूर्ण और सांदर्भिक रहा । हि. स.g-5

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