महिलाओं की सबसे बड समस्या ही अशिक्षा है
शरवत आरा खानम, सभासद:शरवत आरा खानम को पता ही नहीँ चला कि वह कब और कैसे राजनीति में आ गयी । पिता फारुख अहमद आरिफ उर्दू के शायर थे और तात्कालीन राज दरबार से उनका व्यवसायिक सम्बन्ध भी था । दरबार से उनको अक्सर मुशायरा के लिए बुलाया जाता था । दरबार में आना जाना होने के कारण शरवत के घर में राजनीतिक बातें भी हुआ करती थी । बाँके मंे पली हर्ुइ शरवत ने मधेश और खास कर मुस्लिम महिला के जीवन को बहुत नजदीक से देखा है । उन्हे लगा कि परनिर्भरता और अशिक्षा के कारण ही मधेश में रहने वाली महिलाओं की स्थिति दयनीय है । और जैसे जैसे बडÞी होती गयी वह महिला उत्थान के क्षेत्र में कार्य करने लगी । उन्हे लगा कि बडÞा काम करने के लिए राजनीति को नजर अन्दाज नहीँ किया जा सकता है और २०४८ साल में वह नेपाली काँगे्रस से आबद्ध हो गयी । पिछली बार नेपाली काँग्रेस की तरफ से शरवत आरा खानम को संविधान सभा सदस्य बनने का अवसर मिला । एक आम मुस्लिम महिला से संविधान सभा सदस्य तक की यात्रा के संबन्ध में हिमालिनी प्रतिनिधि कञ्चना झा से शरवत आरा खानम की बातचीत के कुछ अंश-
० माघ आठ आने में तो बस कुछ ही हफ्ते बाँकी हंै, क्या तय की गई तारीख में नेपाली जनता को नयाँ संविधान मिलेगा –

– निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है । संविधान सभा के सभी सभासद चाहते हैं कि माघ ८ में नेपाली जनता को नया संविधान मिले लेकिन बडÞेÞ कहलाने वाले नेता ही नहीं चाहते हैं कि संविधान बने, इसलिए ढिलाई हो रही है । आशा करें कि सभी दलों के बीच सहमति हो और जनता को नया संविधान मिले ।
० राजनीतक दलों के बीच तो सैद्धान्तिक रूप से बहुत ज्यादा विवाद है, ऐसे में सहमति कैसे मुमकिन है –
– देखिये, विवाद सिद्धान्त का नहीं । मुझे तो लगता है कि सिर्फसरकार में जाने के लिए विवाद है । दिक्कत तो हम लोगों को है, जब जिला में जाती हूँ तो दूध वाले, रिक्सा वाले, किराना वाले सभी पूछते हैं, संविधान कब बनेगा – और हमारे पास कोई सटीक जवाब नहीं होता ।
० फिलहाल की बात करें तो तर्राई के लोगों को संविधान से भी ज्यादा जरूरी गर्म कपडÞे और कम्बल की है, लेकिन सरकार तो चुप है और मधेश से प्रतिनिधित्व करने वाले सभासद भी मौन बैठे हंै –
– सही बात है, तर्राई का अधिकांश जिला शीतलहर से परेशान है । लेकिन हम लोग चुप नहीं हंै, स्थानीय प्रशासन की ओर से जलावन, कम्बल की व्यवस्था की जा रही है । हाँ , देरी तो हर्ुइ है लेकिन वर्तमान सरकार भी तो पुरानी ही र्ढर्रर्ेेर चल रही है, सब कुछ बदलने में समय तो लगेगा ।
० यह तो बहानाबाजी हर्ुइ न – तर्राई में करीब दो दर्जन लोगों की जान जा चुकी है, क्या कहती हैं आप –
– हम लोग चाहते है कि काम जल्दी हो । लोगों तक तत्काल राहत पहँुचे लेकिन समस्या कर्मचारीतन्त्र की है । वे आलसी और गैर जिम्मेवार है । हम सभासद लोगों की जब वे बात नहीं मानते तो आम लोगों की तो बात ही छोडिÞये ।
० अब थोडÞा महिलाओं की बात करें, कैसे देखती हैं आप नेपाल की महिला को –
-एक शब्द में कहूँ तो बहुत ही दयनीय स्थिति है । महिलाएँ बहुत पीडिÞत हैं यहाँ । दिन प्रतिदिन महिला विरुद्ध की हिंसा बढÞ ही रही है । हत्या, बलात्कार, घरेलु हिंसा, हर कदम पर विभेद, दहेज, बालविवाह , ये सभी समस्या तो महिला को ही झेलना पडÞ रहा है ।
० तर्राई में महिला की स्थिति और नाजुक है, उन्हे विकास के मार्ग में लाने के लिए क्या करना होगा –
– हर तह और तबके की महिलाओं को शिक्षित होना आवश्यक है । शिक्षा के माध्यम से ही वे लोग आत्मनिर्भर हो सकते हंै और तभी सभी मायने में देश का विकास सम्भव है ।
० आप तो मुस्लिम समुदाय से संबन्ध रखती हैं, उनकी अवस्था के बारे में आप क्या कहती है –
– मुस्लिम हों या अन्य समुदाय, महिलाओं की सबसे बडÞी समस्या ही अशिक्षा है । जनचेतना के माधयम से सभी को शिक्षित करना होगा । जहाँ तक मुस्लिम महिला का सवाल है उनके लिए तो प्याकेज में ही कार्यक्रम लाना होगा ।
० अपने क्षेत्र के विकास के लिए क्या योजना है –
– देखिये मैं तो अभी भी अपने क्षेत्र में ही हूँ । संसद विकास कोष के मार्फ जो कुछ पैसे मिले है, उनको गाँववालों की सलाह के हिसाब से खर्च करने को सोच रही हूँ । मुझे तो लगता है कि शिक्षा और रोजगारी ही सबसे महत्वपर्ूण्ा बात है और इसी के लिए मंै कुछ योजना बनाना चाहती हूँ और कहाँ से शुरु किया जाय यही निश्चित करने के लिए गाँववालों से मश्वरा कर रही हूँ ।

