कुलमान घिसिंग पर बार-बार स्पष्टीकरण और विवाद

काठमांडू – नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक कुलमान घिसिंग हाल सरकार के निशाने पर हैं। सरकार ने उन्हें पांचवीं बार स्पष्टीकरण मांगा है, जिससे उनके नेतृत्व और कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। फाल्गुन 13 (फरवरी 25, 2025) को 24 घंटे स्पष्टीकरण मांगे जाने के 10 दिन के भीतर ही, मार्च 6, 2025 (फाल्गुन 22) को सरकार ने फिर से एक और स्पष्टीकरण मांगते हुए उनकी नियुक्ति रद्द करने तक की चेतावनी दी है। यह घटनाक्रम नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र और घिसिंग के व्यक्तित्व पर बहस का विषय बन गया है।
बार-बार स्पष्टीकरण: कारण और आरोप
सरकार ने इससे पहले अशोज 22 (अक्टूबर 8), कार्तिक 13 (नवंबर 29), और पुस 22 (जनवरी 6) को घिसिंग से स्पष्टीकरण मांगा था। गुरुवार को ऊर्जा, जलस्रोत और सिंचाई सचिव सुरेश आचार्य ने तीन दिन की समय सीमा देकर चार बिंदुओं वाला स्पष्टीकरण मांगा है। मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने कार्यसम्पादन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया, जिससे कार्य सम्पादन समझौते की शर्तों का उल्लंघन हुआ है। साथ ही, उनकी नियुक्ति रद्द करने के कारणों पर भी सवाल उठाया गया है। बुधवार रात को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक ने ही यह निर्णय लिया था, जो इस कदम के सुनियोजित होने का संकेत देता है।
ऊर्जा मंत्री का विवादास्पद बयान
गुरुवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में ऊर्जा मंत्री दीपक खड्का ने घिसिंग की लोकप्रिय उपलब्धि – लोडशेडिंग खत्म करना – को विवाद में खींच लिया। उन्होंने कहा कि नेपाल में लोडशेडिंग घिसिंग ने नहीं, बल्कि भारत के सहयोग से खत्म हुई और भारत को धन्यवाद दिया। इस बयान से घिसिंग के योगदान को कम आंकने की कोशिश के रूप में आलोचना हुई है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन ने मंत्री के इस बयान को ‘झूठ’ करार देते हुए घिसिंग को हटाने की कोशिश होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
कुलमान घिसिंग की पृष्ठभूमि और योगदान
कुलमान घिसिंग नेपाल में लोडशेडिंग खत्म करने वाले ‘हीरो’ के रूप में जाने जाते हैं। उनके पहले कार्यकाल (2016-2020) में रोजाना 18 घंटे तक की लोडशेडिंग खत्म हुई और बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इस सफलता ने उन्हें जनमानस में एक कुशल प्रशासक के रूप में स्थापित किया। हालांकि, हाल के समय में उनकी कार्यशैली और सरकार के साथ संबंधों में तनाव देखा जा रहा है।
विवाद का राजनीतिक पहलू
घिसिंग पर बार-बार मांगे गए स्पष्टीकरण को राजनीतिकरण का आरोप भी लग रहा है। कुछ का मानना है कि सरकार उनकी लोकप्रियता को कमजोर करना चाहती है, जबकि कुछ उनके
कार्यसम्पादन में कमियों का दावा करते हैं। ऊर्जा मंत्री का बयान और सरकार के कदमों ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है।
निचोर
कुलमान घिसिंग पर यह ताजा घटनाक्रम नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र के नेतृत्व और सरकार के इरादों पर सवाल उठाता है। उनके द्वारा तय समय में स्पष्टीकरण देने और सरकार के अगले कदम का इंतजार करना बाकी है। लेकिन यह प्रकरण निश्चित रूप से घिसिंग के भविष्य और नेपाल के बिजली क्षेत्र की दिशा को प्रभावित करेगा। उनके योगदान का सम्मान और सरकार की जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना अब एक बड़ी चुनौती होगी।

