राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली की स्मृति-सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखने की काेशिश
राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली की स्मृति-सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखने हेतु शब्दयात्रा भागलपुर ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित तीन दर्जन मंत्री सांसद विधायक और भाजपा अध्यक्षों को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है ।
‘ईमान बेचता फिरता तो, मैं भी महलों में रह लेता,
तू दलबंदी पर मरे, यहाँ लिखने में है तल्लीन कलम !’ – जैसी ओजपूर्ण पंक्तियों के रचयिता, स्वाधीन कलम के सिपाही राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली की स्मृति व सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखने संबंधी विभिन्न-मांगों को लेकर शब्दयात्रा भागलपुर द्वारा गत 24 फरवरी 2025 को भागलपुर के ऐतिहासिक आगमन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम जारी खुला-पत्र पर आवश्यक कार्रवाई हेतु, आज रविवार 16 मार्च 2025 को,
राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यसभा उप-सभापति डॉ हरिवंश नारायण सिंह, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान एवं केन्द्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ।
पश्चिम चम्पारण के सांसद डॉ संजय जायसवाल, रविशंकर प्रसाद, निशीकांत दूबे, श्रीमती लवली आनन्द, राजेश कुमार वर्मा एवं अजय कुमार मंडल ।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष नन्द किशोर यादव । बिहार भाजपा अध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार जायसवाल । उपमुख्यमंत्री द्वै सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा । बेतिया की विधायक पशुपालन व मत्स्य मंत्री श्रीमती रेणु देवी, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी ।
विधायक विद्यासागर केसरी उर्फ मंचन केसरी तथा अजीत कुमार शर्मा और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) नीलम महतो आदि तीन दर्जन मंत्रीद सांसद विधायक और भाजपा अध्यक्षों को, कविवर गोपाल सिंह नेपाली के कविताओं की प्रमुख पंक्तियों के साथ प्रधानमंत्री के नाम जारी खुला-पत्र एवं विभिन्न अखबारों में प्रकाशित उक्त संदर्भित समाचारों को द्रुत डाक (स्पीड पोस्ट) के माध्यम से भेजा गया ।
ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम जारी खुला-पत्र में शब्दयात्रा भागलपुर ने – कविवर गोपाल सिंह ‘नेपाली’ को मरणोपरांत सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने । उनकी शहादत-भूमि भागलपुर से जन्मभूमि बेतिया तक उनके नाम पर गोपाल सिंह नेपाली एक्सप्रेस ट्रेन चलाने । बेतिया स्थित उनके निवास ‘कालीबाग दरबार’ एवं भागलपुर के मारवाड़ी पाठशाला अवस्थित ‘गोपाल सिंह नेपाली सभागार’ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने । भागलपुर जंक्शन व बेतिया स्टेशन पर नेपाली जी की आदमकद प्रतिमा लगाने सहित समस्त भारतीय हिन्दी पाठ्यक्रमों में पूर्व की तरह नेपाली जी की रचनाओं को समाहित करने की मांग की गई है ।
शब्दयात्रा गोपाल सिंह नेपाली आन्दोलन के राष्ट्रीय प्रणेता वरिष्ठ पत्रकार कवि लघुकथाकार पारस कुंज की अध्यक्षता व नेतृत्व में शब्दयात्रा भागलपुर के संरक्षक रामरतन चुड़िवाला । स्वागताध्यक्ष प्रो नीलू कुमारी, संतोष कुमार अग्रवाल, विकास झुनझुनवाला । उपाध्यक्ष कुमार भागलपुरी । कोषाध्यक्ष रवि कुमार जैन एवं संयोजक डॉ सत्यम शरणम आदि ने बताया कि –
सन् 1962 ई. मैं चीनी आक्रमण के खिलाफ नव-प्रकाशित पुस्तक – हिमालय ने पुकारा के साथ अपनी ओजपूर्ण क्रान्तिकारी राष्ट्रवादी कविताओं के माध्यम से देश के नगर-नगर और डगर-डगर में वन मैन आर्मी बन घूम-घूमकर जन-जन में देशप्रेम व वीरता की लहर पैदा करने के दौरान राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली का 17 अप्रैल 1963 को भागलपुर जिले के एकचारी कवि सम्मेलन में काव्यपाठ कर भागलपुर लौटते समय (मात्र 51-52 वर्ष की अल्पायु में) ट्रेन में हो निधन गया । भागलपुर जंक्शन पर उनका शव उतारा गया जिसे स्थानीय मारवाड़ी पाठशाला में लोगों के दर्शनार्थ रखा गया, वहाँ उनके अंतिम दर्शन के लिए अपार भीड़ उमड़ पड़ी थी । तत्पश्चात दूसरी सुबह स्थानीय बरारी श्मशान घाट पर पूर्ण राजकीय सम्मन के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया । उनके निधन पर बिहार सरकार ने दो दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की थी ।
बताते चलें कविवर गोपाल सिंह नेपाली का जन्म 11 अगस्त 1911 को पश्चिम चम्पारण के बेतिया नगर में हुआ था ।
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श्री पारस कुंज भागलपुर सिटी बिहार


