मधेस सरकार माध्यमिक शिक्षा परीक्षा (SEE) से रहेगी अलग
जनकपुरधाम: मधेस प्रदेश के मुख्यमंत्री सतीश कुमार सिंह ने घोषणा की है कि आगामी गुरुवार (चैत्र ७) से शुरू होने वाली माध्यमिक शिक्षा परीक्षा (SEE) में प्रदेश सरकार किसी भी प्रकार से शामिल नहीं होगी।
मुख्यमंत्री ने जनकपुरधाम स्थित अपने कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि SEE परीक्षा को मर्यादित और व्यवस्थित बनाने के लिए किए गए प्रदेश सरकार के फैसलों को लागू नहीं किया गया, जिसके कारण सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया से अलग रहने का निर्णय लिया है।
गोलाप्रथा चयन प्रणाली को किया गया नजरअंदाज
मुख्यमंत्री सिंह ने बताया कि फागुन २६ को हुए निर्णय के अनुसार परीक्षा केंद्राध्यक्षों को गोलाप्रथा (लॉटरी प्रणाली) से चयन किया जाना था। यह निर्णय प्रदेश के सभी जिला परीक्षा समन्वय समितियों द्वारा लागू किया जाना था। लेकिन इस प्रणाली को नजरअंदाज किया गया, जिसके चलते प्रदेश सरकार ने परीक्षा की किसी भी गतिविधि में शामिल न होने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आठ जिलों के प्रमुख जिला अधिकारी (CDO), पुलिस प्रमुख और शिक्षा विकास एवं समन्वय इकाई प्रमुख की मौजूदगी में परीक्षा केंद्राध्यक्षों के चयन का निर्णय लिया गया था। लेकिन विभिन्न शिक्षक संघों और संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। परिणामस्वरूप, परीक्षा चयन समिति ने मनमाने तरीके से केंद्राध्यक्षों की नियुक्ति जारी रखी, जिससे प्रदेश सरकार को यह कड़ा निर्णय लेना पड़ा।
प्रदेश सरकार की भूमिका को कमजोर करने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड को अपने फैसले से अवगत कराया था, लेकिन हमारी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। प्रदेश सरकार की भूमिका को कमजोर करने की यह साजिश स्वीकार्य नहीं है।”
मधेस प्रदेश की शिक्षा एवं संस्कृति मंत्री रानी शर्मा तिवारी ने भी नाराजगी जताई और कहा कि संघीय सरकार जानबूझकर मधेस की शिक्षा प्रणाली को कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि “यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को समाप्त करने की साजिश है।”
SEE परीक्षा में 88 हजार से अधिक छात्र होंगे शामिल
मधेस प्रदेश के शिक्षा निर्देशनालय जनकपुरधाम के अनुसार, प्रदेश में कुल ३१२ परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इस साल ८८,८५८ परीक्षार्थी SEE परीक्षा में शामिल होंगे, जो १,२३१ स्कूलों से हैं। इन परीक्षा केंद्रों पर १२,२४२ कर्मचारी और ४,५८० सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि संघीय सरकार ने परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय को मंजूरी दी है। यदि कोई परीक्षार्थी परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन के साथ पकड़ा जाता है, तो उसका मोबाइल ज़ब्त कर लिया जाएगा।
प्रदेश सरकार की इस घोषणा के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा संचालन पर इसका क्या असर पड़ता है और संघीय सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।


