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पोखरा अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल:  उम्मीदों की उड़ान या भ्रष्टाचार की लैंडिंग? : डा.विधुप्रकाश कायस्थ

 

डा. विधुप्रकाश कायस्थ, काठमांडू । जब पोखरा अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल की नींव रखी गई थी, तब इसे नेपाल के लिए गेमचेंजर कहा जा रहा था। पर्यटन को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल को नई उड़ान देने की बड़ी उम्मीदें इससे जुड़ी थीं।

लेकिन हाल ही में संसद की सार्वजनिक लेखा समिति की उपसमिति ने जो जांच रिपोर्ट पेश की है, उसने इन तमाम उम्मीदों पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस रिपोर्ट से साफ हो गया है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पीछे की हकीकत उतनी चमकदार नहीं है, जितनी इसकी परिकल्पना थी।

जब बजट “गड़बड़ झाला” बन गया

एक सरकारी परियोजना में गड़बड़ी कोई नई बात नहीं, लेकिन जब यह गड़बड़ी “प्लान्ड” लगे, तो मामला गंभीर हो जाता है। पोखरा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में HVAC सिस्टम और फ्यूल स्टोरेज जैसी ज़रूरी चीज़ों के लिए जो खर्च किया गया, वह EPC कॉन्ट्रैक्ट के तहत होना चाहिए था। लेकिन CAAN (नागर विमानन प्राधिकरण) ने इसे अपने internal budget से कवर किया।

अब सवाल ये उठता है – जब पहले से ही पूरी परियोजना का EPC अनुबंध था, तो फिर अलग से खर्च क्यों किया गया? क्या यह एक छिपाने की कोशिश थी? क्या कहीं और भी इसी तरह के “बजट जंप” किए गए? जांच रिपोर्ट इन सवालों को हवा देती है, और जवाब शायद अब तक धुंध में छुपे हैं।

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निगरानी: खुद ही खिलाड़ी, खुद ही रेफरी?

किसी भी इंटरनेशनल लेवल की परियोजना में थर्ड-पार्टी सुपरविज़न अनिवार्य होता है। पर यहां CAAN ने अपने ही लोगों से निगरानी करवाई – बिना किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय परामर्शदाता के। और इसकी कीमत? लगभग 2.8 मिलियन डॉलर।

सोचिए – ना विशेषज्ञता की गारंटी, ना निष्पक्षता का भरोसा। नतीजा क्या हुआ? एक रनवे जो जमीन से 20 फीट नीचे है। एक ड्रेनेज सिस्टम जो ढंग से काम नहीं करता। और एक एयरपोर्ट जो दिखने में भले ही बड़ा हो, पर अंदर से खोखला लगता है।

160 मिलियन से 216 मिलियन डॉलर – ये कैसे हुआ?

शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट 160 मिलियन डॉलर में पूरा होना था। लेकिन असलियत में यह 216 मिलियन डॉलर पर जाकर रुका। यानी लगभग 56 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त लागत – और वो भी बिना किसी ठोस तकनीकी कारण के।

बिलों में गड़बड़ी, सामग्रियों की हेराफेरी, और फर्जी मूल्यांकन – ये सभी संकेत हैं कि पैसे का बड़ा हिस्सा कहीं और चला गया। जांच में सामने आया कि इस गड़बड़ी से करीब 1 अरब नेपाली रुपये का सीधा नुकसान हुआ।

तो अब क्या?

पोखरा अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं था – यह नेपाल की छवि, निवेश और पर्यटन विकास की उम्मीदों का प्रतीक था। लेकिन जिस तरह से इसकी पूरी योजना, निगरानी और कार्यान्वयन में खामियां रही हैं, उससे एक बड़ी सीख मिलती है।

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यह सिर्फ पोखरा की बात नहीं है। यह पूरे सिस्टम की कहानी है – एक ऐसा सिस्टम जो बार-बार पारदर्शिता की बलि चढ़ाता है, और जवाबदेही से बचने की कोशिश करता है।

राजनीतिक संलिप्तता

2011 में नेपाल के वित्त मंत्री ने बोली प्रक्रिया से पहले चीन CAMC इंजीनियरिंग को पक्षपातपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिससे प्रतिस्पर्धा चीनी फर्मों तक सीमित हो गई। इस निर्णय ने परियोजना की लागत को अनुमानित 160 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 305 मिलियन डॉलर कर दिया (बाद में 216 मिलियन डॉलर तक कम किया गया), जिसके लिए सबसे ऊंचे स्तर पर राजनीतिक मंजूरी की आवश्यकता होती है।

दलालों और मध्यस्थों की संभावित भूमिका

जांच में पाया गया कि परियोजना में दलालों और मध्यस्थों की भूमिका भी रही हो सकती है। उदाहरण के लिए, अयोग्य परामर्शदाताओं, जैसे IPPR और ERMC, का चयन प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के बिना किया गया, जिससे संदेह पैदा हुआ कि मध्यस्थों ने इसमें लाभ उठाया हो। हालांकि, इस संबंध में किसी विशेष व्यक्ति का नाम अभी तक सामने नहीं आया है। यह संभावना है कि ये मध्यस्थ परियोजना के अनुबंधों में हेरफेर कर लाभ कमाने में शामिल रहे हों।

भू-राजनीतिक जटिलताएं

परियोजना चीन के “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” (BRI) का हिस्सा है, और चीनी ऋण और ठेकेदारों ने नेपाल पर वित्तीय दबाव बढ़ाया है। नेपाल ने इस ऋण को अनुदान में बदलने का अनुरोध किया, लेकिन चीन ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके अलावा, भारत द्वारा हवाई मार्गों की मंजूरी न देने से विमानस्थल की अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों की संभावना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। यह विवादास्पद है और जांच को और जटिल बनाता है, क्योंकि यह भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाता है।

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चल रही जांच और प्रभाव

भ्रष्टाचार निरोधक प्राधिकरण (CIAA) ने नवंबर 2023 से इस मामले की जांच शुरू की है। CAAN के पोखरा कार्यालयों पर छापेमारी की गई और दस्तावेज जब्त किए गए। 20 से अधिक शिकायतें निर्माण गुणवत्ता और अन्य मुद्दों से संबंधित प्राप्त हुई हैं। उपसमिति की रिपोर्ट अब PAC की पूर्ण बैठक में प्रस्तुत की जाएगी।

यह घोटाला नेपाल के सार्वजनिक धन के प्रबंधन में गहरी दरारें दर्शाता है। इससे न केवल वित्तीय नुकसान हुआ है, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि और आर्थिक स्थिरता पर भी प्रभाव पड़ा है।

पोखरा अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल परियोजना, जो एक बार नेपाल की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना थी, अब भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का प्रतीक बन गई है। शीर्ष नौकरशाहों, राजनेताओं और संभावित दलालों की संलिप्तता ने इस घोटाले को और जटिल बनाया है। भू-राजनीतिक तनाव ने इसे विवादास्पद बना दिया है, और चल रही जांच इस मामले के पूरे दायरे को उजागर कर सकती है।

डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ, काठमांडू

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