विश्व की आर्थिक शक्ति का केन्द्र एशिया बनता जा रहा है, नेपाल को इसका लाभ उठाना चाहिएः डॉ.भट्टराई

काठमांडू, २४ मई । पूर्वप्रधानमंत्री डॉ. बाबुराम भट्टराई ने कहा है कि विश्व की आर्थिक शक्ति का केन्द्र धीरे–धीरे एशिया की ओर स्थानांतरित हो रहा है । उनके अनुसार, आगामी २५ वर्षों में यानी सन् २०५० तक नेपाल के पड़ोसी देश चीन दुनिया की सबसे बड़ी और भारत दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे । इन दो आर्थिक महाशक्तियों के बीच में स्थित नेपाल को इस ऐतिहासिक अवसर से लाभ उठाना चाहिए ।
डॉ. भट्टराई ने यह विचार राजनीतिक चिन्तक एवं अर्थशास्त्री मनिकर कार्की द्वारा लिखित पुस्तक ‘अर्थ दृष्टि’ के विमोचन समारोह में शुक्रवार को काठमांडू में व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि नेपाल अब गरीबी और बेरोजगारी के दुष्चक्र से बाहर निकलने की दिशा में बढ़ रहा है । यदि नेपाल २१वीं सदी की वैश्विक प्रवृत्तियों के अनुरूप कदम मिलाकर आगे बढ़ सका, तो देश शीघ्र ही अल्पविकास, गरीबी, बेरोजगारी और परनिर्भरता से मुक्ति पा सकता है ।
डॉ. भट्टराई ने कहा कि विकास और समृद्धि की अवधारणाएँ सापेक्ष होती हैं । ऐतिहासिक रूप से नेपाल और आज के कुछ यूरोपीय देशों की आर्थिक स्थिति एक जैसी थी । लेकिन पश्चिमी देशों में जल्दी हुई औद्योगिक क्रांति और विज्ञान–प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने उन्हें आगे बढ़ा दिया, जबकि नेपाल उस रफ्तार से आगे नहीं बढ़ सका । उनका मानना है कि नेपाल की आर्थिक, राजनीतिक और संस्थागत रूपांतरण प्रक्रिया में अपेक्षित सुधार न हो पाने के कारण देश विकास की दौड़ में पिछड़ गया है ।
डॉ. भट्टराई ने कहा– ‘हमने लोकतंत्र तो लाया है, शिक्षा और चेतना के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है, लेकिन हम अभी तक स्थायी सुधार और प्रगति के रास्ते पर स्पष्ट रूप से नहीं बढ़ पाए हैं ।’ उन्होंने यह भी कहा कि अब आगे की दिशा संतुलित विकास, समान संसाधन वितरण, दीर्घकालिक दृष्टिकोण (सस्टेनेबिलिटी) और जनसंतुष्टि को केंद्र में रखकर तय होनी चाहिए । उन्होंने यह भी कहा कि विकास के लिए अत्यंत आवश्यक श्रमशक्ति और प्राकृतिक संसाधनों का अभी तक समुचित उपयोग नहीं हो पाया है ।

