समाजसेवी सगीर अहमद की पुण्यतिथि पर विशेष : रजनीश प्रियदर्शी व्यक्ति विशेष:
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कर्मभूमि चम्पारण भारत एवं नेपाल के प्रवेश द्वार स्थित सीमावर्ती शहर रक्सौल में अनेकानेक विभूतियों ने इस शहर को गौरवान्वित किया है जिनमें पूर्व सहकारिता राज्य मंत्री स्व. सगीर साहब का नाम बड़े अदब से आज भी लिया जाता है ।इनकी पहचान हिन्दू- मुस्लिम एकता के सच्चे पर पैरोकार के रूप में राजनीतिक गलियारों से लेकर गांँव के चौपाल में भी चर्चा की जाती है। स्व. हाजी जाहिर हुसैन साहब के पाँच पुत्रों में जफर अहमद, मोहम्मद इजहार , सगीर अहमद साहब तीसरे नंबर पर थे तथा इनसे दो भाई जावेद अहमद एवं परवेज अहमद छोटे हैं। सगीर साहब की प्रारंभिक शिक्षा रामपुर (यूपी )में हुई थी तथा उनकी आगे की पढ़ाई दरभंगा के मिल्लत कॉलेज में हुई थी ।देश सेवा का जज्बा इनमें कूट-कूट कर भरा था। भाषण कला में पारंगत होने के कारण प्रखर वक्ता के रूप में उनकी ख्याति थी। सन् 1965 में भारत पाक युद्ध के समय उनकी उम्र बमुश्किल 18-19 साल की रही होगी, उस समय भी देशभक्ति का जज़्बा इनके रोम-रोम से टपकता था । उन्होंने अपने पहले सार्वजनिक भाषण में लोगों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया था तथा राजनीतिक पंडितों एवं लोगों को भावी नेता की झलक उनके व्यक्तित्व में मिल गयी थी । सन् 1972 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर बिहार विधानसभा के लिए रक्सौल विधानसभा क्षेत्र से भारी मतों से विजय हुए। सन 1972 से 1990 तक लगातार चार बार रक्सौल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया जो उनकी लोकप्रियता का धोतक था। सन 1977 में जब कांँग्रेस को मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी के अभ्युदय से काँग्रेस पार्टी की शाख गिरने के बावजूद बाद वे अपनी रक्सौल की सीट को बचाने में कामयाब हो गये। वे लगभग एक दर्जन से भी अधिक संस्थाओं से संबद्ध रहे तथा अपनी कर्मठता, नेतृत्व क्षमता एवं कार्य क्षमता से शीर्ष नेतृत्व को खासा प्रभावित किया । पार्टी को विकट परिस्थितियों के मंजर से निकालने वाले युवा एवं संघर्षील विधायक होने के कारण पार्टी में उनका महत्वपूर्ण स्थान था।फलस्वरूप जगन्नाथ मिश्रा के मुख्यमंत्रित्व काल में उन्हें कैबिनेट में जगह मिली तथा उन्हें सहकारिता राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिला साथ ही वे दूसरी बार उन्होंने कानून एवं आवास मंत्रालय का प्रभार भी संभाला था। भागवत झा के मुख्यमंत्रित्व काल में उन्हें अल्पसंख्यक एवं वित्तीय निगम के चेयरमैन का भी दायित्व मिला था जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। बिहार काँग्रेस ( ई) में अतुलनीय योगदान को विशेष कर प्रदेश सचिव के रूप में पार्टी को मजबूत करने में उनकी भूमिका को आज भी पुराने कांग्रेसी बड़ी शिद्दत से याद कर सराहे बगैर नहीं रह पाते हैं। उनकी लोकप्रियता एवं प्रखर वक्ता के रूप में ऐसी ख्याति थी कि वे बिहार विधानसभा में स्पीकर के रूप में मनोनीत हो जाने वाले थे लेकिन किन्हीं राजनीति कारणों से विधान सभा स्पीकर बनने से वंचित रह गये। उनके विधायक रहते रक्सौल में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांँधी, वित्त मंत्री के रूप में प्रणव मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी समेत बहुत सारे दिग्गज राष्ट्रीय नेताओं का दौरा हुआ था। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ तिवारी एवं पूर्व रेल मंत्री केदार पाण्डेय इनके राजनीतिक गुरु रहे तथा उन्हीं की प्रेरणा एवं सलाह से वे अपना शानदार राजनीतिक सफर जारी रखते हुए
कई जनहित कार्यों को मूर्त रूप दिया।

इनके विधायक रहते रामगढ़वा के पीपरपाती घाट से अधकपरिया-फुलवरिया तक केसर-ए-हिन्द बाँध का निर्माण हुआ था । यह इलाका यहां के लोगों की लाइफलाइन थी लेकिन हर वर्ष विनाशकारी बाढ़ से तबाह हो जाता था तथा इस इलाके के लोग रामगढ़़वा से फुलवरिया तक की यात्रा जान जोखिम में डालकर नाव से करने को मजबूर होते थे। उन्हें इससे त्राण दिलाने में महत्वपूर्ण अदा की तथा केसर-ए- हिन्द बाँध की सौगात देकर इस क्षेत्र के लोगों को हर वर्ष आने वाली बाढ़ की विभीषिका से बचाया था। सत्तर एवं अस्सी के दशक में विधायक फंड बहुत ही कम था फिर भी क्षेत्र के लोगों को सभी जनहित योजनाओं का लाभ दिया तथा विकास की गति बनी रही तथा उन्होंने अपने विधायक फंड से हर गांव की कच्ची सड़कों को मजबूत खड़ंजा में बनवाया जो एक मिशाल है। आज उनकी तीसरी पुण्यतिथि है।देश की बदलती राजनीति दशा एवं दिशा को देखते हुए तथा उनकी स्मृति के आलोक में इस क्षेत्र के राजनेताओं को उनके व्यक्तित्व एवं एवं कृतित्व से प्रेरणा लेने की जरूरत है तभी वे जन आकांक्षाओं पर खरा उतर सकते हैं।


