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उद्योगपति और साहित्यकार बसन्त चौधरी का उपन्यास ‘देवयानी’ लोकार्पित, प्रेम और द्वन्द्व की कथा

 

काठमाडौं, अषाढ़ 5 । उद्योगपति, कवि और चर्चित साहित्यकार बसन्त चौधरी का बहुप्रतीक्षित उपन्यास ‘देवयानी’ का कल काठमाडौं में एक समारोह के बीच लोकार्पण किया गया। यह साहित्यकार चौधरी की पहली आख्यानात्मक कृति है, जिसे शाङ्ग्री-ला बुक्स ने प्रकाशित किया है।

लोकापर्ण समारोह में साहित्य, कला और पत्रकारिता क्षेत्र के विशिष्ट हस्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि उपन्यास का डिजिटल लोकार्पण किया गया।

इस अवसर पर उपन्यासकार अमर न्यौपाने ने उपन्यास पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “देवयानी” प्रेम की सच्ची परिभाषा प्रस्तुत करता है, जिसमें प्रत्येक पात्र प्रभावशाली और जीवंत है। उपन्यास पारिवारिक प्रेम, सामाजिक द्वन्द्व और आत्ममंथन की गूढ़ कथा बुनता है।

वहीं उपन्यासकार उमा सुवेदी ने इसे विवाहेत्तर सम्बन्धों पर केन्द्रित बताते हुए कहा, “देवयानी” सामाजिक, मानवीय और कानूनी मूल्य–मान्यताओं की भी वकालत करता है। इसमें एक आदर्श समाज की झलक भी मिलती है।

साहित्यकार उषा शेरचन ने इसे मधुर लेखनशैली में लिखा गया सफल आख्यान बताया, जबकि निबंधकार कुमारी लामा ने कहा, “इस उपन्यास में मौन विद्रोह को सुंदर रूप में दर्शाया गया है, जहाँ कुछ पात्र बिना बोले भी विरोध करते हैं। यह इसकी गहराई को दर्शाता है।”

कार्यक्रम में अभिनेता दिव्यदेव और लेखक बसन्त चौधरी के बीच एक रोचक संवाद भी हुआ। चौधरी ने बताया, “मैं पाँच दशकों से लिख रहा हूँ, पर उपन्यास लेखन मेरे लिए एक नया अनुभव था। कथा का प्लॉट तय करना आसान था, लेकिन पात्रों को गढ़ना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। एक भी कमजोर पात्र उपन्यास को प्रभावित कर सकता था।”

जब दिव्यदेव ने सवाल किया कि आपकी कविताओं की तरह उपन्यास में भी प्रेम ही प्रमुख क्यों है, चौधरी ने उत्तर दिया, “प्रेम ही जीवन का स्थायी तत्व है। जीवन का वास्तविक अर्थ प्रेम ही है।”

दिव्यदेव ने उपन्यास के मुख्य पात्र ‘आदित्य’ को लेखक से जोड़ते हुए पूछा, क्या आदित्य का किरदार आपके जीवन से मेल खाता है, क्योंकि वह भी एक व्यवसायी और कवि है ? इस पर चौधरी ने मुस्कुराते हुए कहा, “यदि पात्र मुझसे मिलता-जुलता है तो वह मात्र संयोग है।”

कार्यक्रम के अंत में जब पूछा गया कि क्या इस उपन्यास पर फिल्म बनाए जाने की संभावना है, चौधरी ने हँसते हुए कहा, “अब तक तो ऐसा नहीं सोचा था, पर भविष्य में हो सकता है। और अगर फिल्म बनी, तो आदित्य का किरदार दिव्यदेव ही निभाएंगे।”

‘देवयानी’ एक ऐसा उपन्यास प्रतीत होता है जो प्रेम, समाज, द्वन्द्व और मौन विद्रोह की भावनात्मक और दार्शनिक परतों को छूता है। चौधरी की कविता में निखरी संवेदनशीलता अब उपन्यास के माध्यम से नई उड़ान भरती दिख रही है।

यह भी पढें   ‘सदन में हमारा विरोध जारी है और जारी रहेगा – हर्क साम्पाङ

प्रस्तुति : विजेता चौधरी

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