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संघीय लोकतांत्रिक मोर्चा की बैठक : संवैधानिक अदालत की माँग और सरकार पर कड़े सवाल

 


काठमांडू,८ जुलाई २०२५ । संघीय लोकतांत्रिक मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार, २४ असार २०८२ को शंखमूल, काठमांडू में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता तराई-मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी के अध्यक्ष वृषेश चन्द्र लाल ने की। बैठक में मोर्चा के सभी घटक दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे और राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य, संविधान संशोधन, किसान संकट और धार्मिक बयानबाजी जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।

बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:

उपचुनाव में नागरिक उन्मुक्ति पार्टी को समर्थन

आगामी २०७९ कार्तिक १७ गते (नवंबर ३, २०२५) को रुपन्देही प्रतिनिधिसभा क्षेत्र नं. ३ में होने वाले उपचुनाव में मोर्चा ने नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के उम्मीदवार को साझा उम्मेदवार के रूप में समर्थन देने का सर्वसम्मत निर्णय लिया।

निजामती सेवा ऐन में घुसपैठ की निंदा

राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति द्वारा निजामती सेवा ऐन पर की गई राजनीतिक चलखेल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संसद का घोर अपमान बताया गया। मोर्चा ने इस अवांछित हस्तक्षेप में शामिल व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

संवैधानिक अदालत की मांग

संवैधानिक नियुक्तियों पर सर्वोच्च अदालत द्वारा दिए गए हालिया फैसले को संविधान के मर्म और भावना के विरुद्ध करार देते हुए, मोर्चा ने अलग संवैधानिक अदालत की स्थापना की मांग की है।

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रसुवा बाढ़ पीड़ितों के लिए शोक और सहायता की माँग

रसुवा में आई बाढ़ और भूस्खलन में जान गवाँने वालों को श्रद्धांजलि देते हुए मोर्चा ने पीड़ित परिवारों को राहत, घायलों को इलाज और लापता लोगों की खोजबीन के लिए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

किसानों के लिए खाद संकट पर चिंता

तराई-मधेश में सिंचाई की कमी और उर्वरक (मलखाद) के अभाव से खेती पर पड़ रहे गंभीर प्रभाव को लेकर बैठक में गंभीर चिंता जताई गई। सरकार से सहज और सुलभ तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने की आग्रहपूर्ण माँग की गई।

प्रधानमंत्री के धार्मिक बयानों की निंदा

प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर अप्रमाणित और अपुष्ट बयानों को निंदनीय बताते हुए मोर्चा ने कहा कि यह सनातन आस्था और हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान है। मोर्चा ने प्रधानमंत्री से इस तरह की आधारहीन टिप्पणी को वापस लेने की माँग की।

जनजागरण कार्यक्रम का विस्तार

मोर्चा की उद्देश्य, औचित्य और भूमिका को स्पष्ट करने के लिए देशव्यापी जनजागरण अभियान की घोषणा की गई। पहले घोषित ६ स्थानों के कार्यक्रम में २ और स्थान जोड़े गए। कार्यक्रम अब निम्नलिखित ८ शहरों में होंगे:

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स्थान तिथि

काठमांडू २०८२ श्रावण १७ गते
भैरहवा २०८२ श्रावण २१ गते
नेपालगञ्ज २०८२ श्रावण २३ गते
कैलाली २०८२ श्रावण २५ गते
विराटनगर २०८२ भाद्र १६ गते
राजविराज २०८२ भाद्र १८ गते
जनकपुर २०८२ भाद्र २० गते
वीरगंज २०८२ भाद्र २२ गते

संविधान संशोधन पर सरकार की चुप्पी पर सवाल

संविधान संशोधन से जुड़े विषयों पर बहस और साझा धारणा निर्माण के लिए मोर्चा आगे बढ़ेगा। बैठक में कहा गया कि वर्तमान ‘अप्राकृतिक’ सत्तागठबंधन ने जो वाचा किया था, उस अनुसार संविधान संशोधन पर सरकार को तत्काल सार्वजनिक धारणा स्पष्ट करनी चाहिए।

राजबंदियों की रिहाई और लाल आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग

पहचान पक्षधर आंदोलनों में झूठे मुकदमों के आधार पर जेल भेजे गए राजबंदियों को तत्काल रिहा करने और लाल आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की फिर से जोरदार माँग की गई।

आज की उपस्थिति:

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१. जनता समाजवादी पार्टी (जसपा), नेपाल

राजकिशोर यादव

मनीष सुमन

राम कुमार शर्मा

२. नागरिक उन्मुक्ति पार्टी

रेशम लाल चौधरी

रंजिता चौधरी

लालबीर चौधरी

गंगा चौधरी

हिमांचल भट्टराई

३. राष्ट्रिय मुक्ति पार्टी

राजेन्द्र महतो

केशव झा

संतोष मेहता

४. लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा)

महन्थ ठाकुर

सर्वेन्द्रनाथ शुक्ल

लक्ष्मणलाल कर्ण

ज्ञानेन्द्र झा

५. जनता प्रगतिशील पार्टी

हृदयेश त्रिपाठी

शिवजी यादव

सबिर हुसैन

६. तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी (तमलोपा)

वृषेश चन्द्र लाल

डॉ. विजय सिंह

विभा ठाकुर

पूनम झा

ब्रज किशोर सिंह

सुभाष कर्ण

संघीय लोकतान्त्रिक मोर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह न सिर्फ अपने क्षेत्रीय एवं पहचान आधारित अधिकारों के लिए संघर्षरत है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी संवैधानिक मर्यादा, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनहित के मुद्दों पर गंभीरतापूर्वक काम कर रहा है।

 संघीय लोकतान्त्रिक मोर्चा का संदेश

बैठक में लिए गए निर्णय यह दर्शाते हैं कि संघीय लोकतान्त्रिक मोर्चा न केवल जन प्रतिनिधित्व, बल्कि संवैधानिक शुद्धता, आस्था की रक्षा, किसानों के हक, और राजनीतिक पारदर्शिता के मुद्दों को लेकर गंभीर और संगठित प्रयास कर रहा है

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