Thu. Jul 16th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

कांग्रेस में कार्रवाई के खिलाफ शेखर कोइराला पक्ष का व्यापक विरोध, देशव्यापी दबाव की तैयारी

 

काठमांडू, असार ३०, २०८2 । नेपाली कांग्रेस के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर सियासी भूचाल आ गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला के नेतृत्व वाले गुट ने अनुशासन समिति द्वारा किए गए निष्कासन और निलंबन के फैसले को एकपक्षीय, पूर्वाग्रही और राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। इस गुट ने राजधानी काठमांडू में विरोधसभा आयोजित कर देशभर में दबाव कार्यक्रम शुरू करने की चेतावनी दी है।

वरिष्ठ नेताओं को बाहर कर रहे हैं, नवप्रवेशी धनाढ्यों को बचा रहे हैं?

पार्टी से निष्कासित और निलंबित कार्यकर्ताओं की सूची में अधिकांश पुराने, अनुभवी और त्यागी नेता शामिल हैं। दूसरी ओर, आलोचना है कि पार्टी में हाल ही में आए कुछ धनी और प्रभावशाली चेहरे अनुशासन समिति के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। कास्की के पूर्व जिला सभापति कृष्ण केसी ने कहा, “अनुशासन समिति के सदस्यों पर भी पार्टी में शिकायतें हैं, लेकिन उनके विरुद्ध कोई जांच नहीं हो रही है। क्या अब कांग्रेस नवधनाढ्य नेताओं की संपत्ति की सुरक्षा के लिए पुराने कार्यकर्ताओं की बलि चढ़ाएगी?”

यह भी पढें   कीर्तिपुर होल्डिङ सेंटर में कथित पुलिस ज्यादती पर राजेन्द्र महतो ने उठाए सवाल, अस्पताल में माजिद अंसारी से की मुलाकात

क्या हुआ है अब तक?

15 असार को कांग्रेस के अनुशासन समिति ने एक विज्ञप्ति जारी कर १८ नेताओं को पार्टी से निष्कासित, जबकि ५ को निलंबित और चेतावनी देने की घोषणा की थी। इन पर २०७९ के आम चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से गतिविधियों का आरोप है।

उदाहरण के लिए, खोटाङ के जिला सभापति विष्णु राई को एकीकृत समाजवादी के उम्मीदवार को वोट न देने के आरोप में एक वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया, जबकि आज कांग्रेस उस पार्टी के साथ गठबंधन में नहीं है।

यह भी पढें   फीफा विश्वकप - २ बार का विश्व विजेता फ्रांस को हराकर स्पेन ने किया फाइनल में प्रवेश

शेखर कोइराला ने जताया विरोध

शेखर कोइराला ने खुद पार्टी सभापति शेरबहादुर देउवा से मुलाकात कर अनुशासन समिति के निर्णयों पर आपत्ति जताई है। कोइराला गुट का मानना है कि यह कार्रवाई आगामी १५वें महाधिवेशन को प्रभावित करने के इरादे से की गई है।

दबाव बढ़ाने की रणनीति

गुरुराज घिमिरे, देवराज चालिसे, कृष्ण केसी सहित कई नेताओं ने कहा कि यह कार्रवाई पार्टी संविधान और परंपरा के खिलाफ है। कुछ नेताओं ने केन्द्रीय कार्यसमिति में पुनरावेदन की बात कही, जबकि अन्य ने संघर्ष का रास्ता अपनाने की बात कही। “हमने जेलें काटीं, संघर्ष किया और अब कुछ अमूल्य सिद्धांतों के लिए माफी क्यों मांगें?”, केसी ने कहा।

यह भी पढें   फीफा विश्वकप – नार्वे को पराजित करते हुए इंग्लैंड का सेमिफाइनल में प्रवेश

भविष्य की रणनीति के तहत कोइराला पक्ष देशव्यापी दबाव अभियान चलाने की तैयारी में है और पार्टी नेतृत्व से अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करने की मांग कर रहा है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *