सुनो देश के वीर जवानो ! जयगान तुम्हे सुनाती हूँ : ‘बाल कविता’ प्रतियोगिता
हिमालिनी ज्ञानकुंज ‘बाल कविता’ प्रतियोगिता
सुनो देश के वीर जवानो ! जयगान तुम्हे सुनाती हूँ
कुहू ठाकुर कक्षा १० केंद्रीय विद्यालय, काठमांडू

कक्षा ः १०
केंद्रीय विद्यालय, काठमांडू
सुनो देश के वीर जवानो ! जयगान तुम्हे सुनाती हूँ,
माटी की पावन पूजा में, मैं रक्तपुष्प चढाती हूँ ।
यह भूमि न केवल धरणी यह यज्ञ–भूमि बलिदानो की,
जहां लहरों में भी गूंजती है बोली रण के ही गानों की ।
न पीठ दिखाई कभी रण में, सर उठा के हम सदा जिए ।
सीने पर गोली खाकर भी, राष्ट्र के चरणों में फूल खिले ।
माँ ने अपने लाल झोंके यज्ञ–ज्वाल की आहुति में,
वीरों की चिताएँ जलतीं, दीप्त हुआ नभ दुति में ।
रानी झाँसी की हुंकारें, बिजली बन बन टूट पड़ीं,
रण की रेखा लांघ स्वयं वो दुश्मन के सिर जूट चढ़ी ।
हँसते–हँसते बम फेंका था आजाद ने रणघोष में,
तख्तो –ताज काँपे सारे, झूम उठा बल रोष में ।
धरा धरे जो ध्वज पताका, वो भारत की माटी है,
शौर्य जहाँ गूंजे पल–पल, वो भूमि पावन हो जाती है ।
जागो वसुंधरा के वंशज, यह सिंहगर्जना पहचानो,
मैं गर्वगाथा कहने आयी, भारत की जयजयकार जानो ।

