जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल ने सरकार से समर्थन वापस लिया, अब विपक्ष में बैठेगी

काठमांडू, 32 असार 2082 (16 जुलाई 2025) । जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल (जसपा) की संसदीय दल की बैठक आज सिंहदरबार स्थित संसदीय दल कार्यालय में सम्पन्न हुई। बैठक में पार्टी ने केपी शर्मा ओली नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार की विफलताओं की कड़ी समीक्षा करते हुए सरकार से समर्थन वापस लेने तथा अब विपक्ष में बैठने का महत्वपूर्ण निर्णय किया।
बैठक में जसपा द्वारा सरकार की विफलताओं को ११ बिंदुओं में स्पष्ट किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें शामिल हैं:
- सरकार आम जनता को सुशासन की गारंटी देने में पूर्णतः विफल रही है।
- भ्रष्टाचार, अनियमितता, दण्डहीनता, कमीशन प्रणाली और दलाल संस्कृति पर नियंत्रण करने में असमर्थ रही है।
- आर्थिक सुधार और विकास की गति को आगे बढ़ाने में विफलता के साथ-साथ आगामी आर्थिक वर्ष 2082/83 का बजट भी पक्षपातपूर्ण और असंतुलित रूप में प्रस्तुत किया गया।
- संघीयता को कार्यान्वयन में लाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।
- कृषि, उद्योग, पर्यटन और जलस्रोत जैसे क्षेत्रों में विकास के माध्यम से गरीबी और बेरोजगारी को हल करने में सरकार पूरी तरह असफल रही।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सेवाओं में गुणात्मक सुधार लाने में सरकार नाकाम रही।
- समानता पर आधारित न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में मधेसी, आदिवासी जनजाति, दलित, महिलाएं, पिछड़ा वर्ग, थारू और अन्य उत्पीड़ित समुदायों की समस्याओं को हल करने में गंभीरता नहीं दिखाई गई।
- मधेश, थरूहट, किरात-लिम्बुवान जैसे आंदोलनों के दौरान झूठे मुकदमों में गिरफ्तार किए गए राजनीतिक बंदियों को अब तक रिहा नहीं किया गया।
- संविधान संशोधन के लिए कोई पहल नहीं की गई।
- किसानों को सिंचाई, खाद, बीज, कीटनाशक और सस्ती दर पर ऋण जैसी कृषि आवश्यकताओं की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई।
- बेरोजगारी की विकराल समस्या के समाधान हेतु रोजगार सृजन की दिशा में सरकार कोई प्रभावी कदम नहीं उठा सकी।
इन सभी कारणों के मद्देनजर, जसपा नेपाल ने कहा कि वर्तमान सरकार को दिए गए समर्थन का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। इसलिए पार्टी ने सरकार से समर्थन वापस लेते हुए अब औपचारिक रूप से विपक्ष में बैठने का निर्णय लिया है।
इस निर्णय से देश की राजनीतिक स्थिति में संभावित उथल-पुथल की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि जसपा की संसद में निर्णायक उपस्थिति कई मुद्दों पर सरकार के लिए अहम साबित होती रही है।

