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पासपोर्ट छपाई घोटाला: सत्ता साझेदारी में ठेका बँटवारा, 8 अरब की निविदा दो हिस्सों में कांग्रेस और एमाले को

 
फ़ोटो साभार नया पत्रिका

 

काठमांडू, 26 जुलाई ।नयाँ पत्रिका की खुलासा । नेपाल में ई-पासपोर्ट छपाई के लिए की गई आठ अरब रुपये से अधिक की निविदा अब बड़े विवाद की जड़ बन गई है। पासपोर्ट विभाग द्वारा दो जर्मन कंपनियों को तकनीकी मानकों का उल्लंघन कर ठेका दिए जाने का खुलासा हुआ है। इस टेंडर को जानबूझकर दो भागों में विभाजित कर, एक भाग कांग्रेस से जुड़े ठेकेदार और दूसरे भाग एमाले से जुड़े ठेकेदार को दिया गया।

 कैसे बंटा पासपोर्ट टेंडर?

  • पैकेज 1 (₹1.55 अरब) : जर्मन कंपनी Mühlbauer ID Services, नेपाल में इसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं मनिन्द्र कुमार मल्ल, जो एमाले से निकटता रखते हैं।
  • पैकेज 2 (₹6.11 अरब) : जर्मन कंपनी Veridos, नेपाल प्रतिनिधि हैं सिद्धार्थ थापा, जो कांग्रेस से जुड़े माने जाते हैं। वे राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल के सलाहकार सुनील थापा के पुत्र हैं।

यूरो में भुगतान के कारण ₹8 अरब से अधिक लागत आने की संभावना है, क्योंकि युरो का विनिमय दर समझौते के समय की तुलना में अब ₹17 ज्यादा हो चुका है।

टेक्निकल मापदंड में हेरफेर: प्रिंटर और सर्वर विवाद

प्रिंटर विवाद:

  • निविदा में लिखा था: “N+1 प्रणाली”, यानी कम-से-कम दो सक्रिय प्रिंटर और एक बैकअप।
  • लेकिन Veridos ने सिर्फ दो प्रिंटर का प्रस्ताव दिया और बाद में कहा कि तीसरा प्रिंटर मुफ्त में देंगे, लेकिन यह उनके आर्थिक प्रस्ताव में दर्ज नहीं था। इसलिए वे कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं।
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सर्वर विवाद:

  • ब्लेड सर्वर अनिवार्य था, लेकिन कंपनियों ने सस्ता और पुराना रैक सर्वर प्रस्तावित किया, जो स्वीकृत कर लिया गया।
  • ब्लेड सर्वर की क्षमता 10 यूनिट, जबकि रैक सर्वर केवल 2 यूनिट का होता है — इससे पासपोर्ट प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

विनिमय दर में धांधली:

  • आर्थिक प्रस्ताव १४ जेठ (मई) को खोला गया था, लेकिन मूल्यांकन के लिए ९ फागुन (फरवरी) की विनिमय दर को आधार बनाया गया।
  • इससे अमेरिकी डॉलर में प्रस्ताव देने वाली फ्रेंच कंपनी IDEMIA का प्रस्ताव जानबूझकर महंगा दिखाया गया, जबकि यथार्थ में वह ₹28.95 करोड़ सस्ता था।
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क्या बोले अधिकारी?

पासपोर्ट विभाग का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है और कोई समस्या नहीं होगी। विभाग के महानिर्देशक तस्र्थराज अर्याल ने बताया कि २१० दिन के भीतर छपाई शुरू हो जाएगी।

 राजनीतिक प्रभाव और मिलीभगत के संकेत

  • सिद्धार्थ थापा कांग्रेस से जुड़ाव रखने वाले व्यक्ति हैं और ठेके की प्रक्रिया के समय परराष्ट्रमंत्री आरजु राणा देउवा जर्मनी के दौरे पर थीं।
  • सूत्रों के अनुसार, राणा शुरू से ही इस टेंडर में रुचि रखती थीं, और उन्होंने जर्मन विदेशमंत्री से मुलाकात भी की।

 जांच की मांग और अख्तियार की प्रारंभिक जांच

  • IDEMIA, जो पिछले 15 वर्षों से नेपाल में पासपोर्ट छाप रही है, ने टेंडर में धांधली का आरोप लगाकर कई निकायों में शिकायत की।
  • अब यह मामला अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग की जांच के दायरे में आ गया है।
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भविष्य की चिंता

  • दो कंपनियों के बीच कार्य विभाजन से डेटा सिक्योरिटी और संचालन में समस्या आने की आशंका है।
  • IDEMIA के पास वर्तमान डेटा है, लेकिन छपाई अब Veridos द्वारा की जाएगी — इससे संचालन में समन्वय की चुनौती उत्पन्न हो सकती है।
साभार नयाँ पत्रिका

यह पूरा मामला सिर्फ एक पासपोर्ट छपाई टेंडर का नहीं, बल्कि राजनीतिक मिलीभगत, तकनीकी अनियमितता, सार्वजनिक धन की बर्बादी और पारदर्शिता की हत्या का प्रतीक बन गया है। यह नेपाल की सार्वजनिक खरीद प्रणाली में सुधार की सख्त आवश्यकता को दर्शाता है। रिपोर्ट: नवराज मैनाली | स्रोत: नयाँ पत्रिका

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