क्या है इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की “ऑपरेशन जेपलिन” ?: मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

मुरलीमनोहर तिवारी (सीपू), हिमालिनी अंक जुलाई । ६३१ डब्ल्यू २०७वीं स्ट्रीट, न्यूयॉर्क सिटी, दिल्ली से करीब १२ हजार किलोमीटर का फासला है । लेकिन इसी पते से आई एक रिपोर्ट ने दिल्ली की राजनीति को हिला कर रख दिया था । २४ जनवरी २०२३ को हिंडनबर्द रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की थी । गौतम अडानी को दुनिया के सबसे बड़े कॉरपोरेट वल्र्ड का ठग बताया था । रिपोर्ट में दावा किया कि अडानी ग्रुप की ७ प्रमुख लिस्टेड कंपनियां ८५ फीसदी से अधिक ओवरवैल्यूज हैं । अगस्त, २०२२ में फिच ग्रुप की एक फिक्स्ड इनकम रिसर्च फर्म क्रेडिटसाइट्स ने ग्रुप के कर्ज पर चिंता जताई थी । क्रेडिटसाइट्स के अनुसार वित्त वर्ष २०२२ में कंपनी का कर्ज २.२ लाख करोड़ रुपये हो गया था ।
राजधानी दिल्ली के मान सिंह रोड का साउथ ब्लाक का इलाका, पता २४ अकबर रोड, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का हेडक्वार्टर, भरी दोपहर पिछले आठ दिनों से ४०० पार एक्यूआई लेवल से लोगों की अटकी सांसों के बीच राहुल गांधी अपने फेवरेट टॉपिक यानी गौतम अडानी के बारे में बात करने के लिए पत्रकारों के बीच पहुंचते हैं । अपने चिरपरिचित अंदाज में केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हैं और पूछते हैं अडानी जेल के बाहर क्यों हैं ? इसका जवाब भी खुद देते हुए बताते हैं कि क्योंकि नरेंद्र मोदी, अडानी के कंट्रोल में हैं ।
रिपोर्ट प्रकाशित होते ही अडानी समूह का बाजार पूंजीकरण लगभग १५० अरब अमेरिकी डॉलर घट गया और भारतीय शेयर बाजार में अचानक गिरावट आई । इस वित्तीय झटके के ठीक पहले, अडानी पोट्र्स एवं स्पेशल इकोनॉमिक जोन (ब्एक्भ्श्० ने इजÞराइल के हैफÞा पोर्ट में १.२ अरब डॉलर का शेयर खरीद सौदा पक्का किया था । यह सौदा भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारे (क्ष्ःभ्भ्ऋ) के लिए अहम माना जा रहा था ।
जब इजरायल के एक सी–पोर्ट हाइफा के मेंटनेंस के लिए बोली लगा रही थी । इस बिडिंग में १८ कंपनियां शामिल थी । लेकिन इजरायल में जब आप बिडिंग करते हैं और स्टैटर्जिक पोर्ट लेते हैं तो उस कंपनी के बारे में पूरी तरह से तहकीकात की जाती है । उसके सिक्योंरिटी, बैकग्राउंड से लेकर सबकुछ जाँच किया जाता है । इसकी पूरी छानबीन मोसाद करती है ।
जब पांच कंपनियां शार्टलिस्ट हुई तो उसमें एक चीन की कंपनी और एक भारत के अडानी की कंपनी टॉप २ में आती हैं । फिर अडानी बिडिंग जीत जाते हैं । इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुद इस डील को साइन करने के लिए मौजूद होते हैं । तभी उन्होंने गौतम अडानी से एक सवाल पूछा था कि आपके ऊपर हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट है और आपके ऊपर बहुत गंभीर आरोप लगाए गए हैं । क्या इससे आपके बिजनेस को नुकसान पहुंचेगा ? गौतम अडानी ने जवाब में इसे झूठा आरोप बताया । उस वक्त बेंजामिन नेतन्याहू मुस्कुराने लगे । उन्होंने कहा कि ये अटैक आप पर नहीं, ये अटैक इजरायल पर है । आप हाइफा पोर्ट के लिए बोली लगाने में शामिल थे, इस वजह से ये अटैक है । ये बात सिर्फ अडानी और हाइफा पोर्ट की नहीं बल्कि भारत और इजरायल के रिश्तों को खराब करने की बहुत बड़ी साजिश है ।
बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद ने अपने काम पर लगाया । ऑपरेशन जैपलिन को क्यों कहा जा रहा है उद्यम जगत के सबसे बड़े कोवर्ट ऑपरेशन ? प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी के एयरस्ट्राइक के दौरान कॉर्बेट बॉम्बिंग टर्म चर्चा में आया था । कहा जाता है कि बिजली की गति से दुश्मनों पर इसे गिराया जाता था । इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन जैपलिन इसी प्रकार दिया गया ।
जब “ऑपरेशन जेपलिन” शुरू हुआ तो मोसाद के एजेंट एंडरसन के पीछे भी लग गए, कि वो कहां जा रहा है ? किससे मिल रहा है ? प्रारंभिक जानकारी मिल गई कि वो चीनी फर्म से मिलता है । फिर ऑपरेशन का पार्ट टू शुरू हुआ । अमेरिका की व्हाइट स्नो नाम की लीगल फर्म को अडानी ने हायर किया । फिर कानूनी रूप से क्या किए जा सके, इसके लिए डोजीयर तैयार हुआ । डेढ़ साल के मंथन के बाद चीनी फर्म, अमेरिका के एक्टिविस्ट, भारत के कुछ मीडिया घराने और नेताओं के लिंक सामने आए । ३२६ पेजों का ये डोजीयर है । इस उद्देश्य के लिए मोसाद की दो बेहतरीन इकाइयों त्जÞोमेट और केशेट को सक्रिय किया गया । केशेट को साइबर ऑपरेशन और त्जÞोमेट को जमीन पर एक एक करके दुश्मनों का सफाया करने की जिम्मेदारी दी गई जिसमे तीन स्तर पर कार्य किए गए ।
१. नाथनएंडरसन एवं हिन्डेनबर्ग मुख्यालयः– न्यूयॉर्क स्थित हिन्डेनबर्ग रिसर्च ऑफिस पर कड़ी नजर रखी गई । मेल ट्रैफÞिक, फÞोन रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जाँच की गई ।
२. राजनीतिक कडि़याँः– सैम पिटरोडा के यू.एस. घरेलू सर्वर से एन्क्रिप्टेड संदेश बरामद । कथित बातचीत में हिन्डेनबर्ग टीम के साथ सहयोग करना सामने आया ।
३. वैश्विकनेटवर्कः– सितंबर २०२३ में मिली एक ईमेल में कहा गयाः “हमारी रिपोर्ट बस शुरुआत है, आगे और दस्तावेज आने वाले हैं ।” जनवरी २०२४ में स्विट्जÞरलैंड में एक गुप्त बैठक में गौतम अडानी को ३५३–पन्नों का विस्तृत गोपनीय ब्योरा सौंपा गया, जिसमें ग्क्ब्क्ष्म्, इऋऋच्ए, जॉर्ज सोरोस और अमेरिकी ९म्भभउ क्तबतभ० से जुड़े नाम शामिल थे ।
तीन तरह से साइबर वारफेयर, मोसाद एजेंट और लॉ फर्म व मीडिया हाउस के जरिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया । मोसाद ने अपने एजेंटों को ओक ब्रुक टैरिस लोकेशन पर भेजा । ये सैम पित्रोदा का पता है । इजरायल की जासूसी एजेंसी मोसाद ने भारतीय विपक्ष के हिंडनबर्ग रिसर्च से कथित संबंधों के सबूत तलाशने के लिए इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (आईओसी) के प्रमुख और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक गुरु सैम पित्रोदा के घरेलू सर्वर को हैक कर लिया ।
मोसाद के निष्कर्षों का दावा है, कि राहुल गांधी, अडानी और मोदी को नुकसान पहुंचाने के लिए एंडरसन की टीम के साथ समन्वय कर रहे थे । जहां तक रुपित्रोरुदा का सवाल है, सूत्रोरुं ने कहा कि उनके अमेरिका स्रिुथत घरेलू सर्वर की हैकिंग ने एन्क्रिप्टेड चैटरुम और बैकचैनल समन्वय को उजागर कर दिया। दावे इस तथ्य की ओर इशारा करते हैं कि इस अवधि के दौरान भारत के मुख्य विपक्षी नेताओं पर मोसाद की कडरुी नजरुर थी। इस रिपोर्ट के अनुसार अडानी पर खुलासे के तीन महीने के बाद ही मई २०२३ में राहुल गांधी ने हिंडनबर्ग के लोगों के साथ मुलाकात की थी।
रिपोर्ट के लीक होने पर प्रमुख वैश्विक समाचार संगठन जैसे च्भगतभचक, द्ययियmदभचन व त्जभ न्गबचमष्बल ने इसे प्रकाशित करने से इनकार किया, जबकि फ्रेंच न्यूजरु पोर्टल मेडियापार्ट ने लीक अंशों को आधार बना कर कहानी प्रकाशित की। इसी दौरान पित्रोदा का सवाल है, सूत्रों ने कहा कि उनके अमेरिका स्थित घरेलू सर्वर की हैकिंग ने एन्क्रिप्टेड चैटरूम और बैकचैनल समन्वय को उजागर कर दिया । दावे इस तथ्य की ओर इशारा करते हैं कि इस अवधि के दौरान भारत के मुख्य विपक्षी नेताओं पर मोसाद की कड़ी नजÞर थी । इस रिपोर्ट के अनुसार अडानी पर खुलासे के तीन महीने के बाद ही मई २०२३ में राहुल गांधी ने हिंडनबर्ग के लोगों के साथ मुलाकात की थी ।
रिपोर्ट के लीक होने पर प्रमुख वैश्विक समाचार संगठन जैसे च्भगतभचक, द्ययियmदभचन व त्जभ न्गबचमष्बल ने इसे प्रकाशित करने से इनकार किया, जबकि फ्रेंच न्यूजÞ पोर्टल मेडियापार्ट ने लीक अंशों को आधार बना कर कहानी प्रकाशित की । इसी दौरान ग्।क्। के म्भउबचतmभलत या व्गकतष्अभ (म्इव्) और क्भअगचष्तष्भक बलम भ्हअजबलनभ ऋयmmष्ककष्यल ९क्भ्ऋ) ने अडानी समूह के खिलाफ मुकदमे दायर किए, लेकिन सबूतों की कमी और विधिक पेचीदगियों के चलते ये मुकदमे असफल रहे । परिणामस्वरूप कुछ शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया, और अंततः हिन्डेनबर्ग रिसर्च ने कानूनी इम्युनिटी के बदले खुद को भंग करने का प्रस्ताव रखा ।
हिंडनबर्ग पर अमेरिका में मुकदमा दायर ः– अडानी ने एक ठोस रणनीति अपनाई, जिसमें उन्होंने भारी कर्ज को चुकता किया, प्रमोटर और निवेशकों से पूंजी जुटाई, और समूह के मूल व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित किया । इसके साथ ही, अडानी समूह ने २०२४ के अंत तक अपनी कानूनी कार्रवाईयों को तेज किया और हिंडनबर्ग पर अमेरिका में मुकदमा दायर किया ।
२०२४ में एंडरनसन अडानी से संपर्क करते हैं । न्यूयॉर्क के मैनहटन में दोनों के मिलने का प्लान बनता है । एंडरसन सुलह चाहते थे । लेकिन बात बन नहीं सकी । नवंबर २०२४ के मीटिंग फेल होने के बाद हिंडनबर्ग के मालिक एंडरनसन ने अपनी शार्ट सेलर कंपनी को बंद करने की घोषणा कर दी । कंपनी के फाउंडर नाथन एडंरसन ने खुद इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कंपनी को बंद करने का फैसला लिया है । एंडरसन ने सोशल मीडिया एप एक्स पर ये ऐलान किया है । उन्होंने लिखा कि हमारी योजना थी कि हम जिन विचारों पर काम कर रहे हैं उन्हें पूरा करने के बाद कंपनी को बंद कर दिया जाए ।
रिपोर्ट में सैम पित्रोदा का लिंक, राहुल गांधी का लिंक, अमेरिकी वकीलों, एक्टिविस्ट जजों, भारत के पत्रकारों, अमेरिका के पत्रकारों का लिंक का खुलाया किया है । ट्रेड फ्रंड मैनेजर से लेकर जार्ज सोरोस तक के लिंक सामने आए हैं । इसलिए इस ऑपरेशन को उद्यम जगत के सबसे बड़े कोवर्ट ऑपरेशन बताया जा रहा है । अडानी ने मीडिया में नहीं बोला । लेकिन अडानी, मोसाद या बेंजामिन नेतन्याहू ने पर्दे के पीछे काम किया । हिंगनबर्ग की दुकान बंद होने के बाद ऑपरेशन जैपलिन इन स्वीजरलैंड में आखिरी बैठक करता है । इस बैठक में अडानी भी शामिल होते हैं । इसमें उन्हें सारे डाक्यूमेंट सौंपे जाते हैं और फिर दोनों हाथ मिलाकर विदा लेते हैं ।
कांग्रेस का स्पष्टीकरणः भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये हिन्डेनबर्ग रिपोर्ट की सच्चाई, ध्यान हटाने का प्रयास मात्र है ।
सरकारी प्रतिक्रियाः केंद्र सरकार ने फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है, जबकि खुफिया एजेंसियाँ जांच के विवरण को गोपनीय रख रही हैं । यदि मोसाद के इन दावों में आंशिक भी सच्चाई हो, तो इससे राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक विश्वास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े हो जाएंगे । देशद्रोह और गद्दारी के कानूनी दायरे में यह मामला खड़ा हो सकता है, क्योंकि एक निर्वाचित सांसद पर विदेशी षड़यंत्रों से संलिप्त होने का आरोप लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती देता है । वर्तमान में “ऑपरेशन जÞेपेलिन” की जांच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी है, और भविष्य में उजागर दस्तावेजÞ लोकतंत्र, पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौतियों को फिर से परिभाषित कर सकते हैं । एक आर्थिक रिपोर्ट से शुरू हुई यह जासूसी गाथा हमें याद दिलाती है कि वैश्विक राजनीति, वित्त एवं खुफिया गठजोड़ कितने जटिल और संवेदनशील हो सकते हैं ।
अडानी समूह फिर हुआ मजबूतः “ऑपरेशन जेपलिन” की पूरी प्रक्रिया अब तक पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन यह निश्चित रूप से एक साहसिक और प्रभावी काउंटर स्ट्रैटेजी के रूप में इतिहास में दर्ज होगी । अडानी समूह के इस कदम ने न केवल उनकी छवि को बहाल किया, बल्कि वैश्विक मंच पर भी उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में प्रस्तुत किया । अडानी का यह रणनीतिक कदम है जो व्यापार, कूटनीति और साइबर रणनीति का मिश्रण था । संभवतः कॉर्पोरेट दुनिया में सबसे मजबूत वापसी के रूप में याद किया जाएगा । हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के दो साल बाद, अडाणी समूह ने साबित कर दिया कि वे किसी भी संकट का मुकाबला करने के लिए तैयार है ।


