जनकपुरधाम: अतीत की पीड़ा से उज्ज्वल भविष्य की ओर : लालकिशोर साह
लालकिशोर साह, जनकपुरधाम, 7अगस्त । जनकपुरधाम — धार्मिक आस्था की राजधानी, मिथिला सभ्यता का गौरव और जनक-सीता की पावन स्मृतिभूमि। लेकिन विडंबना यह रही कि यह नगर कभी गंदगी का प्रतीक बना, कभी मच्छरों का उपमा पाया, तो कभी अपनी मौलिकता खोते बस्तियों की पहचान में सिमट गया। वर्षों तक विकास के नाम पर पूर्ण शून्यता ही जनकपुरधाम की नियति बन चुकी थी।
ऐसे ही पृष्ठभूमि में २०७४ साल (2017 ई.) का स्थानीय चुनाव हुआ। मैं जनकपुरवासियों के समक्ष एक स्पष्ट दृष्टिकोण, प्रतिबद्धता और योजनाओं के साथ उपस्थित हुआ। जनता ने विश्वास किया और मुझे जिम्मेदारी मिली। उपमहानगरपालिका का मेयर बनने के साथ ही जनकपुरधाम के पुनर्जागरण की यात्रा की शुरुआत हुई।
मेयर पद की जिम्मेदारी सँभालते ही मैंने विकास को तीन चरणों में बाँटा — अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक योजनाएँ। लेकिन दो वर्ष के भीतर ही मानव सभ्यता को हिला देने वाली कोरोना महामारी शुरू हो गई। जनजीवन ठप हो गया, भय व्याप्त हुआ, और अर्थव्यवस्था चरमराने लगी। ऐसे समय में जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निभाई। हर वार्ड में होम क्वारंटीन की व्यवस्था, संक्रमितों के लिए भोजन, मास्क, सेनिटाइज़र, औषधि वितरण और परीक्षण की व्यवस्था की गई। जब राज्य की मशीनरी कमजोर पड़ गई, तब स्थानीय सरकार ही जनता का एकमात्र भरोसा बनी।
मेरा दृढ़ संकल्प था—जनकपुरधाम को स्वच्छ, हरा-भरा और सुव्यवस्थित नगर बनाना। लेकिन यह राह आसान नहीं थी। जनकपुर की सड़कों की चौड़ाई कम थी, हर तरफ कूड़े का अंबार था, और कभी तो इस नगर को ‘नरकपुर’ तक कहा गया। एशियाई विकास बैंक की ऋण सहायता परियोजना वर्षों से अटकी हुई थी, जिसे मैंने मूर्त रूप दिया। सड़क विस्तार के दौरान सैकड़ों घर ढहाए गए, जिससे कुछ लोगों को पीड़ा भी हुई। लेकिन जनकपुरवासियों ने नगरहित में साथ दिया, और वही साथ मेरी प्रेरणा बना।
महामारी के बाद एक और समस्या आई—भीषण गर्मी और जल संकट। चापाकल सूखने लगे, जनता प्यास से त्रस्त हुई। नगरपालिकाने हजार लीटर की टंकी हर वॉर्ड में लगवाई, २५ वॉर्डों में नए चापाकल लगाए गए। इसने न केवल पानी की कमी दूर की, बल्कि जनता का विश्वास भी फिर से कायम किया।
जनकपुर एक धार्मिक नगर है, पर ‘धाम’ के रूप में इसे कभी आधिकारिक मान्यता नहीं मिली थी। मैंने इस ऐतिहासिक पहल की—जनकपुर को ‘धाम’ के रूप में औपचारिक घोषणा की गई। नगर को केसरिया रंग से सजाया गया और परंपरा, संस्कृति और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित किया गया। नगर के २५ वार्डों में न स्वास्थ्य चौकी थी, न कार्यालय। मैंने ये आधारभूत संरचनाएँ निर्मित कीं। नगरपालिका का मुख्य भवन भी जीर्ण अवस्था में था, जिसे पुनर्निर्माण कर संस्थागत पहचान को मजबूती दी गई।
शिक्षा क्षेत्र सबसे उपेक्षित था। विद्यालयों की स्थिति जर्जर थी, भौतिक संरचनाओं की भारी कमी थी। संकटमोचन रामरति विद्यालय और गोगलप्रसाद विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया। माध्यमिक विद्यालयों को प्लस-टू स्तर में स्तरोन्नति किया गया, जिससे अनेक छात्रों को बाहर जाकर पढ़ने की बाध्यता समाप्त हुई।
नगर के प्रवेशद्वार जर्जर अवस्था में थे। मैंने चारों दिशाओं से जनकपुर में प्रवेश के लिए नई सड़कें बनवाईं। गाँव से शहर तक सम्पर्क मार्गों में सुधार किया। सीमावर्ती भारतीय बस्तियों से संबंध सहज बनाकर पर्यटन की संभावना को सुदृढ़ किया गया। हवाई अड्डे पर नाइट फ्लाइट और फ्यूल स्टेशन की व्यवस्था की गई, जिससे अब रोजाना चार–पाँच उड़ानें नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। भारत सरकार के साथ समन्वय कर धार्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए उच्चस्तरीय पहल की गई।
जनकपुर की रातें अंधेरी होती थीं। मैंने पाँच हजार पोलों में बल्ब और १३० हाईमास्ट लाइटें लगवाईं। नगर रोशन हुआ, सुरक्षित बना। यातायात व्यवस्था, ट्रैफिक सुधार और पुलिस प्रशासन के समन्वय से जनजीवन को अधिक सुरक्षित बनाया गया। संघीयता संघर्ष में बलिदान देने वाले शहीदों की स्मृति में ‘शहीदद्वार’ का निर्माण मेरी कार्यकाल की सबसे गौरवपूर्ण उपलब्धियों में से एक है।
जनकपुर मठ-मंदिर और सरोवरों का नगर है। मैंने इनके सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता दी। सांस्कृतिक विरासत को विश्वस्तर पर प्रस्तुत करने हेतु यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सूचीबद्ध कराने का प्रयास किया। देश-विदेश में जनकपुर की आवाज पहुँचाने के लिए अनेक पहल किए। कई अल्पकालिक और मध्यमकालिक योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया।
लेकिन अफसोस की बात है कि २०७९ (2022 ई.) के बाद विकास की यह यात्रा स्थायी रूप नहीं ले सकी। नए नेतृत्व ने मेरी योजनाओं को न तो संरक्षण दिया और न संवर्धन। विकास की गति थम गई। मैंने जो आत्मसम्मान के साथ नगर की सेवा की, उसकी रफ्तार रुकने से मैं आज चिंतित हूँ। मुझसे भी त्रुटियाँ हो सकती हैं, पर नीयत में कोई खोट नहीं थी। मेरा एकमात्र उद्देश्य जनकपुरधाम का समृद्ध भविष्य था और आज भी है।
जनकपुरधाम में विश्व की धार्मिक राजधानी बनने की सामर्थ्य है—इसके लिए बस इच्छाशक्ति, निरंतरता और जनता की जागरूकता चाहिए। नगर का विकास किसी एक जनप्रतिनिधि का कार्य नहीं, यह एक सामूहिक यात्रा है। यदि जनकपुरवासी फिर से सजग, सचेत और जागरूक हुए, तो यह नगर फिर चमक सकता है।
जनकपुरधाम को इतिहास के गौरव से भविष्य की मंज़िल बनाने की इस यात्रा में हम सब सहभागी बनें—यही मेरी अपील है।

पूर्व मेयर, जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका


